Strait of Hormuz: ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर ईरान का हमला, एक भारतीय नाविक की मौत, 8 घायल
Strait of Hormuz में दो तेल टैंकरों पर ईरान के हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई है और 8 अन्य घायल हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया।
- Iran Attack on Oil Tankers: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमले का शिकार हुए दो जहाज, भारतीय क्रू मेंबर ने गंवाई जान
- Strait of Hormuz में तनाव: ईरान ने दो तेल टैंकरों को बनाया निशाना, भारतीय क्रू मेंबर की मौत से हड़कंप
- BREAKING: ओमान की खाड़ी में ईरानी नौसेना का हमला, दो तेल टैंकरों पर गोलीबारी में एक भारतीय की मौत
वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नजदीक ओमान की खाड़ी में ईरान द्वारा दो वाणिज्यिक तेल टैंकरों को निशाना बनाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई में एक भारतीय क्रू मेंबर (नाविक) की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि चालक दल के 8 अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर उपजे तनाव के बीच हुई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने टैंकरों को रोकने के प्रयास में यह हमला किया। इस घटना के बाद हिंद महासागर और मध्य पूर्व के समुद्री व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि भारत सरकार पीड़ित परिवारों से संपर्क साधने और मामले की पूरी जानकारी जुटाने में लगी है।
ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन से गुजर रहे दो बड़े कमर्शियल तेल टैंकरों पर ईरान की नौसैनिक इकाइयों द्वारा हमला किया गया। आधिकारिक सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इन जहाजों पर अचानक गोलीबारी की गई और उन्हें जबरन अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया गया। जहाजों पर सवार चालक दल में कई भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इस हमले के दौरान हुई फायरिंग की चपेट में आने से एक भारतीय क्रू मेंबर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 8 अन्य नाविक घायल हुए हैं जिन्हें नजदीकी बंदरगाह पर चिकित्सा सहायता पहुंचाई गई है।
यह घटना उस समय हुई जब दोनों तेल टैंकर अपने तय व्यापारिक मार्ग से गुजर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और नौसैनिक खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक:
पहला चरण: ईरानी नौसेना की तेज रफ्तार नौकाओं ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों वाणिज्यिक जहाजों को घेर लिया और उन्हें रुकने का सिग्नल दिया।
दूसरा चरण: जहाजों द्वारा मार्ग न बदलने और चेतावनी को अनदेखा करने पर ईरानी बलों की ओर से भारी गोलाबारी शुरू कर दी गई।
तीसरा चरण: गोलाबारी के कारण जहाजों के डेक और केबिन को भारी नुकसान पहुंचा। इसी गोलाबारी की चपेट में आने से भारतीय नागरिक की जान चली गई।
चौथा चरण: अंतरराष्ट्रीय संकट कॉल (SOS) सक्रिय होने के बाद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और सहयोगी देशों के नौसैनिक बेड़े तुरंत हरकत में आए, जिसके बाद ईरानी नावें पीछे हट गईं।
इस गंभीर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) ने एक बयान जारी कर ईरान की इस कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है। सूत्रों के मुताबिक, ओमान और ईरान में स्थित भारतीय दूतावासों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि मृतक के शव को जल्द से जल्द भारत वापस लाया जा सके और घायल भारतीय नागरिकों को सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
दूसरी ओर, ईरान सरकार या उसकी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की तरफ से अभी तक इस विशिष्ट हमले को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, हालांकि ईरान अतीत में ऐसे जहाजों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की वकालत करता रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। इस हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तत्काल उछाल देखा जा सकता है। इसके अलावा, इस मार्ग से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों के बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है, जिससे वैश्विक व्यापार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
इस हमले के बाद ओमान की खाड़ी और अरब सागर के हिस्सों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। भारत सहित कई देशों की नौसेनाएं अपने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) में भी इस मुद्दे को उठाए जाने की तैयारी चल रही है, जहां ईरान के खिलाफ सख्त राजनयिक कदम उठाने की मांग की जा सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर ईरान के समक्ष इस मुद्दे को किस प्रकार उठाती है।
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