Ayodhya News: अयोध्या राजनीतिक दावपेच व कानूनी प्रक्रिया में फस गया मिल्कीपुर विधानसभा का उपचुनाव।
राजनीतिक दावपेच व कानूनी प्रक्रिया में फस गया मिल्कीपुर विधानसभा का उपचुनाव। उत्तर प्रदेश में 10 विधानसभा....
रिपोर्ट- देव बक्श वर्मा
अयोध्या: राजनीतिक दावपेच व कानूनी प्रक्रिया में फस गया मिल्कीपुर विधानसभा का उपचुनाव। उत्तर प्रदेश में 10 विधानसभा के उपचुनाव होने हैं जिसमें से मात्र 9 की घोषणा किया गया, एक सीट अयोध्या जनपद के मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र का नहीं किया गया। बताया जाता है कि गति चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बाबा गोरखनाथ समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद से चुनाव हार गए थे और बाबा गोरखनाथ ने अवधेश प्रसाद द्वारा दाखिल किए गए शपथ पत्र पर टिप्पणी करते हुए माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में रिट दाखिल किया था जो अभी भी पेंडिंग है।
बाबा गोरखनाथ ने माननीय उच्च न्यायालय में अपनी रीट वापस करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया किंतु समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद द्वारा रिट वापस करने का पुरजोर विरोध किया जिस कारणरिट वापस नहीं हो पाई और अब मिल्कीपुर का विधानसभा उपचुनाव खटाई में पड़ गया चुनाव में मिल्कीपुर की तारीख का घोषणा नहीं किया गया मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की धर्म नगरी अयोध्या, राम मंदिर के निर्माण के साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर रहा है और पूरी दुनिया में अयोध्या का डंका बज रहा है।
किंतु लोकसभा चुनाव में फैजाबादअयोध्या लोकसभा क्षेत्र भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार गई, समाजवादी पार्टी ने अवधेश प्रसाद को टिकट दिया था जो मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे, उनके सांसद बनने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र खाली हो गया और अब उपचुनाव होना है । मिल्कीपुर सीट को भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की सीट मानकर चल रहे हैं । फैजाबाद लोकसभा सीट से अवधेश प्रसाद के सांसद बन जाने से मिल्कीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई। हां यह बात सही है कि चुनाव समीकरण पर निर्भर करता है, जनता के बीच में जैसा समीकरण बन जाए चुनाव इस तरफ करवट ले लेता है।
मिल्कीपुर विधानसभा में 3 लाख 57 हजार 659 वोटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति वर्ग के हैं। दूसरे नंबर पर ओबीसी वोटर्स हैं। यहां पर यादव और मुस्लिम समाज के वोटरों पर सपा की मजबूत पकड़ मानी जाती है। अनुसूचित जाति वर्ग से पासी समाज का वोट सबसे ज्यादा सपा को मिलता रहा है। यही वजह से सपा और बीजेपी का जोर पासी उम्मीदवार पर ही है।
2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बाबा गोरखनाथ को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस बार भी वह अपना टिकट फाइनल मानकर चल रहे हैं। गोरखनाथ को सपा के अवधेश प्रसाद ने 12 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। गोरखनाथ के अलावा बीजेपी के कई स्थानीय नेताओं का नाम संभावित प्रत्याशी के रूप में सामने आया है। इनमें कई नेता पासी समाज के भी हैं।
लोकसभा सीट गंवाने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। योगी ने भूमिहार, ठाकुर, यादव और ब्राह्मण समाज के मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतार कर जातिगत समीकरण साधने की तैयारी तेज कर दी है। मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम चाहे जो हो सपा और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा मानी जा रही है इसको लेकर 2027 के विधानसभा चुनाव के दृष्टि से देखा जा रहा है और यह सीट सपा भाजपा के लिए नाक का बाल साबित होगी। चुनाव अब नेता के मेहनत और कार्य पर नहीं बल्कि समीकरण पर निर्भर करता है । जनता का मूड किस पर जाता है आने वाले समय में पता चल जाएगा।
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