Hardoi : विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम कर देश को समृद्ध बनाएं- राष्ट्रीय सह संगठक सतीश
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सतीश, प्रांत समन्वयक हर्षवर्धन सिंह, जिला संयोजक अवनीश द्विवेदी, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष विमलेश दीक्षित, पवन जैन, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष अशफाक हुसैन, संजीव खरे, राजीव औ
देश में डीजल, पेट्रोल और कुकिंग गैस की जरूरतों के लिए हमारी निर्भरता दूसरे देशों पर अठासी प्रतिशत तक है। इसके इस्तेमाल के बिना हमारा जीवन नहीं चलता, लेकिन दूसरे देशों पर निर्भर रहने के कारण हम हर दिन चार हजार करोड़ रुपये बाहर भेजते हैं। दुनिया के बयालीस देशों को हम अपना पैसा दे रहे हैं और पचपन प्रतिशत एलपीजी का आयात करते हैं।
इसके विपरीत, हमारा देश बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है और हम दूसरे देशों को बिजली बेचते हैं। ऐसे में हमें अपनी स्वदेशी बिजली का इस्तेमाल रसोई में इंडक्शन आदि के रूप में करना चाहिए, जिससे ऊर्जा बचेगी और देश को समृद्ध बनाने में मदद मिलेगी। यह विचार स्वावलंबी भारत अभियान और स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संगठक सतीश ने जेके पब्लिक स्कूल में आयोजित ऊर्जा आत्मनिर्भरता अभियान संगोष्ठी में व्यक्त किए।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सतीश, प्रांत समन्वयक हर्षवर्धन सिंह, जिला संयोजक अवनीश द्विवेदी, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष विमलेश दीक्षित, पवन जैन, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष अशफाक हुसैन, संजीव खरे, राजीव और गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे राजीव मोहन अवस्थी ने मिलकर दीप जलाकर की।
इस मौके पर कवि श्याम त्रिवेदी पंकज और शिक्षक राजकुमार सिंह ने स्वदेशी गीत गाकर लोगों को जागरूक किया। गोष्ठी में मौजूद वक्ताओं ने स्वदेशी सामान अपनाने और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने की अपील की। सभी ने कहा कि ऊर्जा बचाकर ही देश की प्रगति में सहयोग दिया जा सकता है।
मुख्य अतिथि सतीश ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीजल, पेट्रोल, कुकिंग गैस, सोना और यूरिया का कम इस्तेमाल करने का आह्वान किया था। यह आह्वान देश हित में है, जिससे पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ देश की तरक्की जुड़ी हुई है। रसोई गैस की तुलना में इंडक्शन का इस्तेमाल कम खर्चीला है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि देश में भारी मात्रा में सोने और यूरिया का आयात किया जा रहा है, जिससे दूसरे देशों की तिजोरियां भर रही हैं।
उन्होंने खेती में यूरिया के बजाय जैविक खाद का अधिक प्रयोग करने की सलाह दी, ताकि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बची रहे। इसके साथ ही उन्होंने विदेशी पेय पदार्थों का बहिष्कार करने की अपील भी की। कार्यक्रम के अंत में नए पदाधिकारियों की घोषणा भी की गई, जिसमें कई कार्यकर्ताओं को अलग-अलग ब्लॉकों और तहसीलों की जिम्मेदारी सौंपी गई। मंच का संचालन शोभित प्रताप सिंह तोमर ने किया और प्रांत समन्वयक हर्षवर्धन सिंह ने सभी का आभार जताया।
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