Lucknow : सीएम योगी के 'टेंपल इकॉनमी मॉडल' से मजबूत हो रही यूपी की अर्थव्यवस्था
अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल का कहना है कि 122 करोड़ पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आगमन यह दर्शाता है कि धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र अब “इमोशनल स्पेस” से आगे बढ़कर “इकोनॉमिक जोन” बन चुके
- पिछली सरकारों में उपेक्षित रहे राज्य के प्राचीन धार्मिक स्थलों पर आधारभूत ढांचे के विकास से मिला पर्यटन को बल
- सुविधाएं बढ़ीं तो श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में भी हुआ भारी इजाफा
- स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, आतिथ्य, परिवहन व सेवा क्षेत्र में बढ़ा कारोबार
- अयोध्या, काशी, प्रयागराज ही नहीं, छोटे शहरों तक दिखाई दिया योगी मॉडल का असर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन केवल आस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला सशक्त मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्राचीन धार्मिक स्थलों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जाए तो आस्था, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था, तीनों को एक साथ मजबूती से आगे बढ़ाया जा सकता है।
पिछली सरकारों के दौर में उपेक्षित रहे अनेक धार्मिक स्थलों पर अब सुनियोजित विकास कार्यों ने तस्वीर बदल दी है। सड़कों का चौड़ीकरण, घाटों का सौंदर्यीकरण, आधुनिक यात्री सुविधाएं, समुचित पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, ठोस सुरक्षा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था जैसे बुनियादी सुधारों ने श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाया है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि उत्तर प्रदेश आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष उत्तर प्रदेश में 122 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। यह संख्या न केवल राज्य के प्रशासनिक प्रबंधन की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि इस तथ्य को भी स्थापित करती है कि धार्मिक पर्यटन अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है।
बड़े धार्मिक केंद्रों से लेकर छोटे शहरों तक असर
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विकास और भव्य अवसंरचना निर्माण ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। वहीं वाराणसी में काशी क्षेत्र के व्यापक विकास, घाटों के पुनरुद्धार और यात्री सुविधाओं के विस्तार ने पर्यटन को नई ऊंचाई दी। प्रयागराज में संगम क्षेत्र के विकास और महाकुंभ व माघ मेला जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के सफल संचालन ने भी इस मॉडल की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ का प्रभाव केवल इन प्रमुख धार्मिक शहरों तक सीमित नहीं रहा। मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य, विंध्याचल और अन्य छोटे धार्मिक नगरों में भी आधारभूत ढांचे के विकास के साथ स्थानीय व्यापार और सेवाक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
धार्मिक पहचान से आर्थिक पुनर्जागरण तक
आईआईएम लखनऊ की अयोध्या पर आधारित हालिया रिपोर्ट भी टेंपल इकोनॉमी को सपोर्ट करती है। रिपोर्ट में अध्ययन के आधार पर बताया गया है कि अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य, परिवहन, निर्माण और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कीं। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए, हजारों एमएसएमई सक्रिय हुए और स्थानीय बाजारों में कारोबार कई गुना बढ़ा। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तेज उछाल देखा गया, जिससे निजी निवेश को मजबूती मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे, आधुनिक रेलवे स्टेशन, चौड़ी सड़कों और नगर सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों ने अयोध्या को एक सुव्यवस्थित धार्मिक-पर्यटन केंद्र में परिवर्तित करने की दिशा में ठोस आधार प्रदान किया।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन
इसी तर्ज पर अन्य धार्मिक स्थलों में भी सुविधाएं बढ़ने से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई और इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, प्रसाद उद्योग, होटल एवं गेस्ट हाउस व्यवसाय, परिवहन सेवाओं, रेस्तरां, गाइड सेवाओं और छोटे व्यापारियों के कारोबार में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ। हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिले। हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ने से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को भी बल मिला है। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री बढ़ी है, जिससे ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचा है।
आस्था से अर्थव्यवस्था तक का समन्वय
योगी सरकार का यह मॉडल इस सोच पर आधारित है कि आस्था और अर्थव्यवस्था एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यदि धार्मिक स्थलों का समग्र विकास किया जाए, तो यह न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का माध्यम बनता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और निवेश आकर्षण का भी आधार तैयार करता है। आज उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ होटल इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, परिवहन नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं में भी तेजी देखी जा रही है। बेहतर कानून-व्यवस्था और सुव्यवस्थित आयोजन क्षमता ने निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाया है।
सनातन अर्थशास्त्र का आधुनिक मॉडल
अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल का कहना है कि 122 करोड़ पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आगमन यह दर्शाता है कि धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र अब “इमोशनल स्पेस” से आगे बढ़कर “इकोनॉमिक जोन” बन चुके हैं। योगी सरकार ने भारत की पारंपरिक ग्राम-नगर-तीर्थ संरचना को आधुनिक नीति और अवसंरचना से जोड़कर एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसमें आस्था आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनती है। प्रदेश सरकार के हालिया बजट में नगर विकास के लिए ₹26,514 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह निवेश केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि नगर-आधारित आर्थिक पुनरुत्थान की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। काशी-विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण और प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्र के प्रस्तावित विकास जैसे कदम सांस्कृतिक भूगोल को आर्थिक भूगोल में रूपांतरित करने की दिशा में उठाए गए हैं। रामपथ, तीर्थ सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक केंद्रों और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार धार्मिक स्थलों को स्थायी आर्थिक केंद्रों में बदलने का आधार तैयार कर रहा है।
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