G-7 शिखर सम्मेलन 2026: पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बड़ा बयान, समुद्री सुरक्षा को लेकर जताई गंभीर चिंता

इस द्विपक्षीय बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय नेतृत्व की बातचीत की क्षमता और उनके व्यक्तित्व की प्रशंसा की, जिसे कूटनीतिक हलकों में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्षी खेमे की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि केवल तारीफों या व्य

Jun 20, 2026 - 11:55
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G-7 शिखर सम्मेलन 2026: पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बड़ा बयान, समुद्री सुरक्षा को लेकर जताई गंभीर चिंता
G-7 शिखर सम्मेलन 2026: पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बड़ा बयान, समुद्री सुरक्षा को लेकर जताई गंभीर चिंता

  • भारत-अमेरिका रणनीतिक वार्ता: अमेरिकी राष्ट्रपति संग प्रधानमंत्री की बैठक को विपक्षी नेता ने सराहा, पर व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर राष्ट्रीय हितों को रखने की दी नसीहत
  • खाड़ी देशों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा गरमाया: शांति समझौते के मसौदे पर शशि थरूर ने अमेरिकी प्रशासन को दी सतर्क रहने की बड़ी सलाह

G-7 शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत पर विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का बड़ा बयान सामने आया है। विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने इस रणनीतिक संवाद के विभिन्न पहलुओं का गहराई से विश्लेषण किया है। फ्रांस के एवियान शहर में आयोजित इस वैश्विक मंच के इतर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच करीब सोलह महीनों के लंबे अंतराल के बाद सीधी वार्ता हुई। इस संवाद में सबसे संवेदनशील मुद्दा खाड़ी क्षेत्र और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हाल ही में हुए मिसाइल हमलों में भारतीय नाविकों की जान जाने का था। इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में उपजे तनाव के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। विपक्षी सांसद ने इस मुलाकात के संदर्भ में देश की चिंताओं को वैश्विक स्तर पर मजबूती से रखने के लिए सरकार के रुख का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही भविष्य के रिश्तों को लेकर कुछ जरूरी नसीहतें भी दी हैं।

शशि थरूर ने साफ तौर पर कहा कि युद्ध और सैन्य तनाव के इस दौर में वाणिज्यिक जहाजों पर काम करने वाले नागरिक नाविकों को किसी भी परिस्थिति में सैन्य अभियानों का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात की सराहना की कि भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिकी प्रशासन के सामने सार्वजनिक मंचों और बंद कमरे की बैठकों, दोनों ही जगहों पर इस चिंता को पूरी मजबूती के साथ सामने रखा। खाड़ी देशों में और विशेष रूप से समुद्री व्यापारिक मार्गों पर लाखों की संख्या में भारतीय नागरिक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में व्यापारिक नाकाबंदी को लागू करने के नाम पर निर्दोष नागरिकों की जान लेना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। भारत सरकार को इस बात पर अडिग रहना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत नागरिक जहाजों को हमेशा सुरक्षा कवच मिलना ही चाहिए। कूटनीति में व्यक्तिगत गर्मजोशी और दोस्ताना संबंध अपनी जगह महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन वे कभी भी गंभीर राष्ट्रीय हितों, ठोस नीतिगत समझौतों और व्यावहारिक कूटनीतिक परिणामों का विकल्प नहीं बन सकते।

इस द्विपक्षीय बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय नेतृत्व की बातचीत की क्षमता और उनके व्यक्तित्व की प्रशंसा की, जिसे कूटनीतिक हलकों में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्षी खेमे की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि केवल तारीफों या व्यक्तिगत बैठकों से देशों के बीच के गहरे नीतिगत मतभेद दूर नहीं होते। भारत को अमेरिकी प्रशासन के साथ केवल औपचारिक या मंत्रालयों के स्तर की बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समुद्री सुरक्षा की ठोस गारंटी और व्यापारिक प्रतिबंधों के आर्थिक दुष्प्रभावों को कम करने के लिए वास्तविक धरातल पर काम करना होगा। दोनों देशों को अपने साझा हितों को साधने के लिए केवल बयानों पर निर्भर रहने के बजाय कूटनीतिक और रक्षा समझौतों को धरातल पर लागू करना होगा।

वैश्विक परिदृश्य में हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के मसौदे का भी थरूर ने विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने इस कूटनीतिक प्रगति का स्वागत करते हुए सचेत किया कि किसी भी सहमति की वास्तविक सफलता उसके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। वर्तमान में यह केवल एक प्राथमिक समझौता है जिसे एक पूर्ण और व्यापक कानूनी संधि का रूप दिया जाना बाकी है। इतिहास गवाह है कि शुरुआती सहमतियों और अंतिम समझौतों के बीच कई व्यावहारिक मुश्किलें आती हैं, इसलिए इसे लेकर अत्यधिक उत्साहित होने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। भारत को इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखनी होगी ताकि हमारे व्यापारिक हित प्रभावित न हों।

इस शांति समझौते को लेकर कुछ अन्य वैश्विक देशों द्वारा जताई जा रही नाराजगी पर भी संतुलित दृष्टिकोण रखने की सलाह दी गई है। यह स्पष्ट किया गया कि किसी एक देश के सुरक्षा हितों को पूरी दुनिया के व्यापारिक और मानवीय हितों पर हावी होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस क्षेत्रीय तनाव के कारण दुनिया के अनेक देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और कई मासूम जानें गई हैं। वैश्विक समुदाय को यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सभी देशों के सामूहिक सहयोग से ही संभव है, जहां हर राष्ट्र को बिना किसी डर के शांतिपूर्ण ढंग से अपना आर्थिक और व्यापारिक कामकाज संचालित करने का अधिकार है।

इस शिखर सम्मेलन से निकलकर आए नतीजों को भारत के कूटनीतिक प्रयासों की एक कसौटी के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी नेता के अनुसार, आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच होने वाली व्यापारिक वार्ता और साझा सैन्य अभ्यास इस बात का निर्धारण करेंगे कि यह मुलाकात कितनी फलदायी रही। भारत को खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए अन्य वैश्विक ताकतों के साथ मिलकर भी प्रयास करने होंगे। कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए इन कदमों की निरंतरता ही देश के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने का एकमात्र जरिया बन सकती है।

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