Hardoi : श्रीकृष्ण का अवतार धर्म, प्रेम और मानव कल्याण का दिव्य संदेश: प्रेम भूषण महाराज
कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए धर्म, प्रेम, दया और नीति का सनातन संदेश है। जब भी धरती पर पाप और अन्याय बढ़ता है, तब भगवान धर्म की स्थापना और अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवता
Report : अभिषेक त्रिवेदी
अरवल थाना क्षेत्र के मंगरौरा गांव में स्थित महावीर बजरंग बली मंदिर में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का भव्य आयोजन किया गया। दिव्य प्रसंग को सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पूरा इलाका भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के रंग में डूबा नजर आया। असलापुर धाम से आए प्रसिद्ध भागवताचार्य और अखिल विश्व कल्याण पीठ के पीठाधीश्वर कथाव्यास पंडित प्रेम भूषण महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की अमृतमयी कथा सुनाते हुए लोगों को धर्म, भक्ति और लोककल्याण का मार्ग दिखाया।
कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए धर्म, प्रेम, दया और नीति का सनातन संदेश है। जब भी धरती पर पाप और अन्याय बढ़ता है, तब भगवान धर्म की स्थापना और अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। द्वापर युग में कंस के अत्याचारों से परेशान पृथ्वी का कष्ट दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने देवकी-वसुदेव के जेल के कष्टों, कंस के क्रूर शासन और भगवान के जन्म का बेहद भावुक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात को भगवान ने चार भुजाओं वाले रूप में प्रकट होकर अपने माता-पिता को दर्शन दिए, जिससे पूरी सृष्टि दिव्य प्रकाश से जगमगा उठी।
उन्होंने आगे कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें कठिन समय में भी धीरज, बुद्धि, प्रेम और धर्म के रास्ते पर चलने की सीख देता है। उनका जन्मोत्सव मनाना तभी सही मायने में सार्थक है जब हम उनके दिखाए सत्य, सेवा, सदाचार और कर्तव्य के रास्ते को अपने जीवन में शामिल करें। कथा के दौरान जैसे ही बाल रूप श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, पूरा पंडाल भजनों और जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमने और नाचने लगे। महाराज के ज्ञानवर्धक विचारों ने लोगों को अपनी संस्कृति और सनातन मूल्यों के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर मुख्य यजमान परिवार के साथ परीक्षित रामलखन द्विवेदी, राकेश शुक्ला, रामदेव दीक्षित, देवेश शुक्ला, रामसागर द्विवेदी, अजय सिंह और मुनेश्वर सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे।
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