Lucknow : मोहन भागवत ने कहा- मंदिर, कुआं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले हों
उन्होंने कहा कि संघ पूरे हिंदू समाज को एक मानता है। इसलिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर आपसी मेल-जोल बढ़ाना चाहिए। सामाजिक समरसता भाषण से नहीं बल्कि व्यवहार से आएगी। संघ के कुटुम्ब
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर, कुआं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए और इनमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। भागवत ने कहा कि बच्चों को यह समझाना होगा कि करियर सिर्फ पेट भरना, ज्यादा कमाना या उपभोग करना नहीं है। असली करियर बांटने में है। बच्चों को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए कि वे अमीर बनकर दान दें और दूसरों के लिए जीना सीखें। घरों में ऐसे संस्कार डालने होंगे जिनसे बच्चे समझें कि उनका हित देश के साथ जुड़ा है और देश पहले है। विद्या और धन देश के लिए कमाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संघ पूरे हिंदू समाज को एक मानता है। इसलिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर आपसी मेल-जोल बढ़ाना चाहिए। सामाजिक समरसता भाषण से नहीं बल्कि व्यवहार से आएगी। संघ के कुटुम्ब में जात-पात नहीं है और समाज में भी ऐसा ही होना चाहिए। भागवत ने कहा कि संघ को पुस्तकें पढ़ने से ज्यादा स्वयंसेवकों के कार्य से समझा जा सकता है।
समाज की इकाई व्यक्ति नहीं परिवार है। सामाजिक व्यवहार का परीक्षण परिवार में होता है। बचत करना हमारे परिवारों की आदत है और देश का धन घरों में रहता है। बच्चों को मातृभाषा ठीक से सिखानी चाहिए। देशभक्ति, सच्चाई, अनुशासन और परिवार गौरव का भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्ती और शाखा स्तर पर 70 से 100 परिवारों के कुटुम्ब मिलन होने चाहिए।
अभाव में नहीं रहना है लेकिन किसी के प्रभाव में भी नहीं आना है। जीवन संघ जैसा होना चाहिए। पंच परिवर्तन कार्यक्रमों में मातृशक्ति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है और सभी हिंदू सहोदर हैं। जो लोग संघ के निकट नहीं हैं उनके पास स्वयंसेवकों को जाना चाहिए और आत्मीय संबंध बनाना चाहिए। वह संबंध चौराहे से शुरू होकर परिवार तक पहुंचे।
स्क्रीन का समय तय होना चाहिए। तकनीक को नहीं रोका जा सकता लेकिन अनुशासन से उपयोग होना चाहिए। विज्ञान एआई, टीवी, मोबाइल और फिल्मों की हानियां भी बताता है। नई पीढ़ी को यह सब समझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आज सभी जगह मान्यता मिल रही है। यह बात बच्चों को बतानी चाहिए। संघ चिरतरुण संगठन है और भारत के सबसे ज्यादा युवा संघ के पास हैं।
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