Lucknow : पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के विलय की तैयारी, छात्रवृत्ति बढ़ाने पर भी विचार

बैठक में मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि पिछड़े वर्गों तथा दिव्यांगजनों के विकास के लिए सरकार के पास बजट की कोई कमी नहीं है। उन्होंने शासकीय विशेष विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पर चिंता जताते हुए निर्देश दिए कि जब तक शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक संविदा

Jun 1, 2026 - 22:46
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Lucknow : पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के विलय की तैयारी, छात्रवृत्ति बढ़ाने पर भी विचार
Lucknow : पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के विलय की तैयारी, छात्रवृत्ति बढ़ाने पर भी विचार

उत्तर प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नरेन्द्र कश्यप (स्वतंत्र प्रभार) की अध्यक्षता में विधान सभा स्थित कार्यालय में विभागीय योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में पिछड़े वर्गों और दिव्यांगजनों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति जांची गई। बैठक के दौरान पिछड़ा वर्ग कल्याण के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने दोनों विभागों पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण को आपस में विलय करने का प्रस्ताव रखा। वर्तमान में ये दोनों विभाग समाज कल्याण के अंतर्गत काम करते हैं। इसके साथ ही विभाग की अपनी अलग वेबसाइट बनवाने पर भी बल दिया गया ताकि लाभार्थियों को समय पर लाभ मिल सके। मंत्री ने इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद निर्णय लेने का भरोसा दिया।

बैठक में मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि पिछड़े वर्गों तथा दिव्यांगजनों के विकास के लिए सरकार के पास बजट की कोई कमी नहीं है। उन्होंने शासकीय विशेष विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पर चिंता जताते हुए निर्देश दिए कि जब तक शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक संविदा के आधार पर शिक्षक रखकर पढ़ाई-लिखाई तुरंत शुरू कराई जाए। शिक्षकों के बिना विद्यालयों का संचालन धन की बर्बादी है। उन्होंने आने वाले विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य के विशेष विद्यालयों जैसे संकेत, स्पर्श, ममता और प्रयास में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने और इसके लिए नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए। साथ ही विश्व योग दिवस को भी व्यापक स्तर पर मनाने की बात कही।

मंत्री ने आगे बताया कि आधुनिक दौर में भले ही इन विभागों के नाम पिछड़े और दिव्यांग दिखते हों, लेकिन हमारे प्रयासों से अधिकतर योजनाओं की प्रगति शत-प्रतिशत रही है। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार दिव्यांग छात्रों की छात्रवृत्ति को 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करने और परिवार की वार्षिक आय सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। विभागीय योजनाओं के प्रचार और समाज में जागरूकता लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कार्यशाला, बुकलेट और कृत्रिम अंगों की प्रदर्शनी के साथ ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी होगी। प्रधानमंत्री की अपील पर मंत्री ने अधिकारियों को जिलों के कर्मचारियों के साथ हर हफ्ते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद करने और उसका लिंक उन्हें भी भेजने के निर्देश दिए ताकि वह खुद भी जुड़ सकें। बैठक में निदेशक उमेश प्रताप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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