Lucknow : योगी सरकार की पहल से रेशम उद्योग को मिली नई दिशा, मंत्री राकेश सचान ने किया सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ का शुभारंभ

मंत्री राकेश सचान ने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्या

Feb 2, 2026 - 22:42
36 Views
Lucknow : योगी सरकार की पहल से रेशम उद्योग को मिली नई दिशा, मंत्री राकेश सचान ने किया सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ का शुभारंभ
Lucknow : योगी सरकार की पहल से रेशम उद्योग को मिली नई दिशा, मंत्री राकेश सचान ने किया सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ का शुभारंभ

  • ‘सॉइल टू सिल्क’ की जीवंत झलक देगा रेशम उद्योग का सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स
  • शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान और विपणन को मिलेगा एकीकृत मंच
  • प्रशिक्षण, प्रदर्शन और विपणन का केन्द्र बनेगा रेशम उद्योग का एक्सीलेन्स सेंटर
  • रेशम उत्पादन से रोजगार तक, पारंपरिक उद्योग को आधुनिक स्वरूप दे रही योगी सरकार

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक एवं ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा रेशम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया से आमजन को परिचित कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है।इस महत्वाकांक्षी केन्द्र का उद्घाटन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा किया गया। इस अवसर पर मंत्री श्री सचान ने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां रेशम उत्पादन की पूरी श्रृंखला का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां रेशम कीट से धागा बनने की प्रक्रिया, धागाकरण एवं वस्त्र निर्माण की संपूर्ण विधि को एक ही स्थान पर देखा जा सकता है।मंत्री राकेश सचान ने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा।उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 10,000 करोड़ रुपये के ग्रोथ फंड की घोषणा की गई है, जिससे प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को व्यापक लाभ मिलेगा।उत्तर प्रदेश में लगभग एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं और यह क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला है। एमएसएमई को सशक्त किए बिना एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं है।मंत्री सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हों। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध एवं व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को शुद्ध रेशम की पहचान, गुणवत्ता की समझ तथा नकली या मिश्रित रेशम से भेद करने की जानकारी देना है।यह केन्द्र प्रशिक्षण एवं जागरूकता के साथ-साथ एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा, जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों एवं परिधानों का सीधा विक्रय किया जाएगा। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों को प्रत्यक्ष बाजार उपलब्ध होगा।

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम),  केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के अधिकारी एवं वैज्ञानिकों सहित विभागीय एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

Also Click : सतना में अडानी ग्रुप के वॉक-इन इंटरव्यू में हजारों बेरोजगारों की भीड़, छत से कूदकर अंदर घुसने की कोशिश, अव्यवस्था से हालात बेकाबू

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow