हरदोई शिक्षा विभाग में सबसे बड़ा प्रशासनिक 'खेला', 61 नवनियुक्त शिक्षकों की मूल फाइलें दबाकर बैठा शातिर बाबू,फरार
वरिष्ठ सहायक के इस अड़ियल और नियम विरुद्ध रवैये के बाद जब विभाग ने संबंधित पत्रावलियों की खोजबीन शुरू की, तो दफ्तर के रिकॉर्ड से 61 शिक्षकों की फाइलें गायब पाकर पूरे महकमे में कोहराम मच गया। पटल सहायक से लेकर शिक्षा विभाग के तमाम आला अधिकारियों के
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई विज्ञान-गणित शिक्षकों की भर्ती अधर में, जिलाधिकारी के तबादला आदेश को भी आरोपी ने दिखाया ठेंगा
- वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्रा के खिलाफ शहर कोतवाली में नामजद FIR दर्ज, पुलिस कस्टडी से बचने के लिए आरोपी बाबू फरार
हरदोई जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय इन दिनों एक अभूतपूर्व और बेहद गंभीर प्रशासनिक संकट के केंद्र में आ गया है। शिक्षा विभाग के भीतर फैले भ्रष्टाचार और मनमानी की एक ऐसी सनसनीखेज दास्तान सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा दी है। जिले के शिक्षा महकमे में एक शातिर सरकारी कर्मचारी ने ऐसा दुस्साहस दिखाया है, जिसके कारण न केवल विभाग की साख पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई है, बल्कि नवनियुक्त 61 शिक्षकों का भविष्य भी पूरी तरह से अधर में लटक गया है। विज्ञान और गणित विषय के इन नवनियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियों से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण और मूल दस्तावेज रातों-रात गायब कर दिए गए हैं। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद से बीएसए दफ्तर से लेकर कलेक्ट्रेट तक हड़कंप मचा हुआ है और विभागीय अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर पर्दा डालने तथा फाइलों को बरामद करने के लिए लगातार भाग-दौड़ कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के एक बेहद कड़े और स्पष्ट आदेश के बाद लिखी जानी शुरू हुई थी। शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुपालन में हरदोई जिले में विज्ञान और गणित विषय के नवनियुक्त अध्यापकों की बंपर बहाली की प्रक्रिया को हरी झंडी दी गई थी। इसी साल 30 मार्च 2026 को जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डायट) हरदोई के परिसर में भारी गहमा-गहमी और उत्सव जैसे माहौल के बीच इन शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया था। काउंसलिंग पूरी होने के बाद नियमानुसार पारदर्शी तरीके से सभी नवनियुक्त योग्य अभ्यर्थियों को उनके संबंधित विद्यालयों का आवंटन भी कर दिया गया था। उस समय नौकरी पाने वाले सभी 61 अभ्यर्थियों के चेहरों पर खुशी साफ देखी जा सकती थी और वे देश के भविष्य को संवारने की नई जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह तैयार थे। लेकिन उन सभी बेखबर शिक्षकों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस दफ्तर से उनकी जीविका और भविष्य का फैसला हुआ है, वहीं का एक कर्मचारी उनकी किस्मत की चाबी पर अपनी टेढ़ी नजर गड़ाए बैठा है।
प्रशासनिक नियमों और तय व्यवस्था के मुताबिक, इन सभी 61 नवनियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियों से संबंधित अति-महत्वपूर्ण ओरिजिनल फाइलें प्रधान सहायक शिवनिवास मिश्र की आधिकारिक कस्टडी में सुरक्षित रखी गई थीं। इसी बीच विभागीय कामकाज को गति देने और अग्रिम औपचारिकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा अधिकारी ने एक मौखिक आदेश जारी किया। इस मौखिक आदेश का पालन करते हुए प्रधान सहायक शिवनिवास मिश्र ने अपने ही विभाग के वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्रा पर पूरी तरह से भरोसा कर लिया। उन्होंने बिना किसी लिखित रसीद या औपचारिकता के पूरी ईमानदारी और साफ नीयत के साथ इन सभी 61 नवनियुक्त शिक्षकों की मूल फाइलों का पूरा बंडल वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्रा के सुपुर्द कर दिया। शिवनिवास मिश्र को उस वक्त इस बात का बिल्कुल भी भान नहीं था कि उनका यह अत्यधिक भरोसा और मौखिक आदेश का पालन करना आगे चलकर विभाग के लिए गले की हड्डी बन जाएगा और फाइलों को सौंपने का यही क्षण इस पूरे सनसनीखेज 'फाइल कांड' की शुरुआत साबित होगा।
मामले में नया और नाटकीय मोड़ तब आया जब मई 2026 के महीने में हरदोई के जिलाधिकारी ने प्रशासनिक फेरबदल और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए अपना चाबुक चलाया। जिलाधिकारी के कड़े आदेश के तहत आरोपी बाबू अनुपम मिश्रा का तबादला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से हटाकर जिला जनगणना कार्यालय में कर दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी नियमावली और प्रशासनिक सेवा का यह बेहद स्पष्ट नियम है कि जब भी किसी कर्मचारी का स्थानांतरण होता है, तो उसे अपनी वर्तमान कुर्सी या पटल छोड़ने से पहले अपने प्रभार वाले एक-एक शासकीय दस्तावेज, पत्रावली और सरकारी संपत्ति का पूरा हिसाब-किताब नए प्रभारी को लिखित रूप में सौंपना होता है। लेकिन खुद को नियम-कानूनों से ऊपर समझने वाले वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्रा ने इन सभी स्थापित प्रशासनिक कायदों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया। वह बिना किसी को चार्ज दिए और बिना फाइलों का लेखा-जोखा सौंपे, सीधे अपने नए तैनाती स्थल यानी जनगणना कार्यालय में जाकर ठाठ से बैठ गए और 61 शिक्षकों की उन बेशकीमती मूल फाइलों को अपने पास ही दबाकर रख लिया।
वरिष्ठ सहायक के इस अड़ियल और नियम विरुद्ध रवैये के बाद जब विभाग ने संबंधित पत्रावलियों की खोजबीन शुरू की, तो दफ्तर के रिकॉर्ड से 61 शिक्षकों की फाइलें गायब पाकर पूरे महकमे में कोहराम मच गया। पटल सहायक से लेकर शिक्षा विभाग के तमाम आला अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली भर्ती से जुड़ी फाइलों का गायब होना एक अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बाद विभागीय स्तर पर अनुपम मिश्रा से संपर्क साधने की हर संभव कोशिश शुरू की गई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने आरोपी बाबू के सामने कई बार मनुहार की, उसे व्यक्तिगत रूप से फोन किए गए और आधिकारिक तौर पर एक के बाद एक कई कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। उससे बार-बार यही गुहार लगाई गई कि "भाई! इन सभी फाइलों को वापस दफ्तर में जमा कर दो, क्योंकि यह सीधे तौर पर 61 परिवारों की आजीविका और उनकी सरकारी नौकरी की वैधता से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है।" परंतु अहंकार में डूबे आरोपी बाबू ने सभी विभागीय चेतावनियों और मिन्नतों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया और अधिकारियों को सीधे शब्दों में सख्त रुख दिखाते हुए कार्रवाई की खुली चुनौती दे डाली।
विभागीय स्तर पर किए गए सभी प्रशासनिक प्रयास जब पूरी तरह से विफल साबित हो गए और पानी सिर से ऊपर निकल गया, तब जाकर पीड़ित प्रधान सहायक शिवनिवास मिश्र के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने मामले की गंभीरता और भविष्य में खुद पर आने वाली संभावित कानूनी गाज को भांपते हुए बिना समय गंवाए सीधे हरदोई के शहर कोतवाली पुलिस स्टेशन का रुख किया। शिवनिवास मिश्र ने कोतवाली में लिखित तहरीर देकर अपने ही सहयोगी वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्रा के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी। सरकारी फाइलों को इस तरह गायब करने और उन्हें सरकारी कस्टडी से हटाने की इस अनोखी घटना को सुनकर खुद पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से हैरान रह गया है। पुलिस अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में भारी-भरकम सरकारी फाइलें दफ्तर से बाहर कहां चली गईं? क्या इन फाइलों को किसी अवैध आर्थिक लाभ के लिए बेच दिया गया है, साक्ष्यों को मिटाने के लिए उन्हें पूरी तरह जलाकर नष्ट कर दिया गया है, या फिर किसी बेहद गहरी और सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत उन्हें किसी गुप्त स्थान पर छिपाकर रख दिया गया है?
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