Digvijaya Singh Statement: मोहन यादव सरकार पर जीतू पटवारी ने लगाया आरोप, दिग्विजय सिंह के बयान से फंसी कांग्रेस
मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आई है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों को दिग्विजय सिंह ने खारिज किया।
- MP Congress Rift: जीतू पटवारी के आरोपों पर दिग्विजय सिंह का यू-टर्न, बैकफुट पर आई कांग्रेस
- MP Politics: मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह उजागर, मुख्यमंत्री पर जीतू पटवारी के आरोपों को दिग्विजय ने नकारा
- मध्य प्रदेश कांग्रेस में रार: जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, दिग्विजय सिंह के एक बयान से अपनी ही पार्टी हुई बैकफुट पर
मध्य प्रदेश की सियासत में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी और वैचारिक मतभेद एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा राज्य की डॉक्टर मोहन यादव सरकार पर लगाए गए भ्रष्टाचार के एक गंभीर आरोप को उनकी ही पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। उज्जैन में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए इस अप्रत्याशित बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी को घेरने की रणनीति बना रही कांग्रेस खुद अपने ही चक्रव्यूह में फंसकर बैकफुट पर आ गई है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय की कमी को साफ तौर पर उजागर कर दिया है, जिससे आगामी राजनीतिक मोर्चों पर कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती दिख रही है।
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और उनकी सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से जुड़ा है। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को सीधे निशाने पर लेते हुए वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप मढ़े थे। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में था। हालांकि, उज्जैन के धार्मिक प्रवास पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक सवाल के जवाब में इन आरोपों की पुष्टि करने के बजाय ऐसा बयान दे दिया जिससे जीतू पटवारी के दावों की जमीन खिसक गई।
मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और भाजपा सरकार की घेराबंदी करने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कुछ समय पूर्व एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के गृह क्षेत्र और उनके विभागों से जुड़े कुछ मामलों में बड़े भ्रष्टाचार का दावा किया था। कांग्रेस इसे एक बड़ा मुद्दा बनाकर राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही थी।
विवाद तब खड़ा हुआ जब उज्जैन पहुंचे वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से पत्रकारों ने जीतू पटवारी के उन दावों और सबूतों को लेकर सवाल पूछा। दिग्विजय सिंह ने परिपक्व राजनीतिक शैली के बजाय स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके पास इस तरह के किसी बड़े भ्रष्टाचार की कोई पुख्ता जानकारी या तथ्यात्मक दस्तावेज नहीं हैं। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि बिना ठोस प्रमाण के ऐसे व्यक्तिगत आरोप लगाने से बचना चाहिए। दिग्विजय सिंह के इस अकेले बयान ने जीतू पटवारी के पूरे अभियान की हवा निकाल दी और यह संदेश गया कि संगठन के शीर्ष नेताओं के बीच इस मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं थी।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस पर पलटवार करने का बड़ा मौका मिल गया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ताओं ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस एक ऐसी दिशाहीन गाड़ी है जिसके पहिए अलग-अलग दिशाओं में भाग रहे हैं। भाजपा का कहना है कि जीतू पटवारी केवल सनसनी फैलाने के लिए झूठे आरोप लगाते हैं और उनके झूठ का पर्दाफाश खुद उनकी ही पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता ने कर दिया है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता इस स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि दिग्विजय सिंह के बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर देखा जा रहा है और पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह एकजुट है। हालांकि, आंतरिक सूत्रों का मानना है कि इस बयान से जीतू पटवारी खेमा काफी असहज महसूस कर रहा है।
इस अंतर्विरोध का मध्य प्रदेश के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जो कार्यकर्ता जमीन पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों की तैयारी कर रहे थे, वे अब असमंजस की स्थिति में हैं। इसके साथ ही, इस घटना ने जनता के बीच भी यह संदेश दिया है कि विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए ठोस तथ्यों की कमी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही पुराने और वरिष्ठ नेताओं के साथ उनका तालमेल ठीक नहीं बैठ पा रहा है और दिग्विजय सिंह का यह बयान इसी आंतरिक असंतोष का नतीजा है।
इस विवाद के सामने आने के बाद दिल्ली स्थित कांग्रेस हाईकमान भी सक्रिय हो गया है। प्रदेश प्रभारी के माध्यम से दोनों नेताओं के बयानों की रिपोर्ट तलब की जा सकती है ताकि आने वाले समय में इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी को रोका जा सके। जीतू पटवारी के सामने अब चुनौती अपनी खोई हुई साख को वापस पाने और नए सिरे से तथ्यों को जुटाकर सरकार पर हमला बोलने की होगी। वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव इस राजनीतिक बढ़त का लाभ उठाकर आगामी विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष पर और अधिक आक्रामक रुख अख्तियार कर सकते हैं।
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