Lucknow: यूपीएसआईएफएस: क्वांटम कम्प्यूटिंग विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला, भविष्य के युद्ध एआई, चिप्स से लड़े जाएंगे। 

योगी सरकार के निर्देशन में यूपी पुलिस फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (यूपीएसआईएफएस) लखनऊ में

Apr 23, 2026 - 15:20
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Lucknow: यूपीएसआईएफएस: क्वांटम कम्प्यूटिंग विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला, भविष्य के युद्ध एआई, चिप्स से लड़े जाएंगे। 
यूपीएसआईएफएस: क्वांटम कम्प्यूटिंग विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला, भविष्य के युद्ध एआई, चिप्स से लड़े जाएंगे। 

लखनऊ: योगी सरकार के निर्देशन में यूपी पुलिस फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (यूपीएसआईएफएस) लखनऊ में बुधवार को ‘क्वांटम कम्प्यूटिंग’ पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि क्वांटम कम्प्यूटिंग नवीन युग की शुरुआत है।

उद्घाटन सत्र में प्रमुख अतिथि एवं नेशनल क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के चेयरमैन व एचसीएल के सह-संस्थापक डॉ. अजय चौधरी ने कहा कि दुनिया अब यूनिपोलर (एकध्रुवीय) हो गई है, जहां हर देश अपनी तकनीक पर निर्भर है। ऐसे में भारत के लिए स्वदेशी तकनीक पर नियंत्रण अनिवार्य है। उन्होंने अमेरिका के सॉफ्टवेयर और चीन के हार्डवेयर प्रभुत्व का उदाहरण देते हुए चेताया कि भारत का डिजिटल ढांचा भी स्वदेश विकसित होना चाहिए। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध एआई, ड्रोन और चिप्स के जरिए लड़े जाएंगे। उन्होंने स्वदेशी तकनीकी की सफलता के उदाहरण में ऑपरेशन सिंदूर का नाम लिया।

स्वदेशी तकनीक ही भारत का भविष्य
डॉ. अजय चौधरी ने साइबर शिक्षा और सुरक्षा को तुरंत क्वांटम आधारित बनाना जरूरी है। भारत की नेशनल क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) में तेज प्रगति क्वांटम कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन और सेंसिंग, आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वदेशी तकनीक ही भविष्य में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिला सकती है।

  • उत्तर प्रदेश सरकार के अहम प्रसास

इस दौरान उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव अलोक कुमार ने क्वांटम एवं डीप टेक के लिए कई अहम घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि डेटा सेंटरों से आगे हर तकनीक में स्वावलंबन जरूरी है। यही राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का मूल मंत्र है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनक्यूएम ने प्रारंभिक सफलताएं हासिल की हैं। अगले 2-3 वर्षों में 1000 क्यूबिट का लक्ष्य हासिल हो सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के इस क्षेत्र में प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में क्वांटम कंप्यूटर भारत लाने के लिए आईआईटी कानपुर से साझेदारी हुई है। नोएडा-एनसीआर में डीप टेक हब स्थापित होगा। डीप टेक स्टार्टअप्स को 30-40 करोड़ फंडिंग दी जाएगी। डेटा सेंटर नीति में नई प्रोत्साहन योजना बनाई जा रही है। साथ ही इस वर्ष एआई मिशन के लिए 225 करोड़ और उभरती तकनीकों से जुड़ी रिसर्च के लिए 100 करोड़ के फंड का प्रावधान किया गया है।

  • क्वाटंम क्रांति की शुरूआत

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के सदस्य प्रो. अजय सिंह ने कहा कि फार्मा, बैंकिंग, फॉरेंसिक में क्वांटम क्रांति शुरू हो चुकी है। जापान के यूरो बैंक ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी से 2.2 अरब दस्तावेज सुरक्षित किए है। रोश, नोवार्टिस फार्मास्युटिकल कंपनियां क्वांटम कम्प्यूटिंग से दवा की खोज 10-15 साल से घटाकर 3-4 साल में कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय ने बैंकों को निर्देशित किया है कि एटीएम नेटवर्क, पेमेंट सिस्टम को क्वांटम सुरक्षित किया जाए।

  • क्वांटम टेक लैब बेहद अहम

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के हेड स्पेशल प्रोजेक्ट्स राजन लूथरा ने सुझाव दिया कि यूपीएसआईएफएस क्वांटम सेफ्टी लिटरेसी स्थायी करें, क्वांटम टेक लैब वीडियो हब बनाएं।

इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि डेटा सबसे मूल्यवान वस्तु है। अमेरिका की शक्ति डेटा प्रभुत्व से है और भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (डीपीडीपी एक्ट 2023) इसी कारण बना है। बिना लीगल कंप्लायंस के प्रौद्योगिकी अविश्वसनीय है। साइबर सिक्योरिटी डेटा प्रोटेक्शन का मात्र एक डोमेन है। यह संस्थान विधि लैब टेक्नोलॉजी एकीकरण का एकमात्र व्यवस्थित संस्थान है।

  • दशकों पुराना डाटा सुरक्षित करें

आईआईआईटी हैदराबाद के निदेशक डॉ. संदीप शुक्ला ने कहा कि बैंक और सरकारों को क्रिप्टो इन्वेंटरी, रिस्क असेसमेंट और क्रिप्टो-एजाइल सिस्टम अपनाने की सलाह दी। कार्यशाला में आयोजित पैनल चर्चा में अतिथि वक्ता प्रो. अजय सिंह (राष्ट्रीय क्वांटम मिशन सदस्य) के संचालन में शीर्ष उद्यमियों ने अपनी यात्रा साझा की। डॉ. सुनील गुप्ता ने छात्रों को जुनून और प्रयोग की प्रेरणा दी। नीलेश धांडे ने 53 पेटेंट्स और पूर्वोत्तर राज्यों में डेटा सेंटर्स की उपलब्धि साझा की। मयंक वर्मा ने पैशन और पर्सिस्टेंस को सफलता का सूत्र बताया तथा डीप टेक को विज्ञान आधारित समाधान बताया।

इस अवसर पर संस्थान के महानिरीक्षक राजीव मल्होत्रा ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। पैनल में सम्मलित होने वाले समस्त अतिथि वक्तागणों को पुलिस उपमहानिरीक्षक हेमराज मीना सहित उपनिदेशक जीतेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी और अतुल यादव ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। 

कार्यक्रम में संस्थान के फैकल्टी मेंबर डॉ. सपना शर्मा, डॉ. प्रीती मालिक, डॉ. शाश्य मिश्र, डॉ. हबीब-उर-रहमान, डॉ. मिमंषा जैशल, डॉ केके दुबे, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. नेहा माथुर, डॉ. स्नेह तिवारी, डॉ. अभिषेक उपाध्याय सहित जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार तिवारी उपस्थित रहे। इस कार्यशाला में संसथान के छात्रों सहित एसएमएस कॉलेज, अंबालिका इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, टीएस मिश्र विश्वविद्यालय सहित चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया।

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