यूपी में गन्ना किसानों को घटिया खाद-कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों पर होगी सख्त कार्रवाई, जब्त होगी बैंक गारंटी

उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। घटिया खाद या कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों की बैंक गारंटी जब्त होगी। नए नियम लागू।

Jul 10, 2026 - 21:34
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यूपी में गन्ना किसानों को घटिया खाद-कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों पर होगी सख्त कार्रवाई, जब्त होगी बैंक गारंटी
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को नकली खाद और कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों पर गिरेगी गाज, गन्ना आयुक्त ने जारी किए कड़े नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के लाखों गन्ना किसानों की सुरक्षा और कृषि उत्पादन की गुणवत्ता को सुधारने के लिए एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब प्रदेश की कोई भी चीनी मिल किसानों को बिना जांचे-परखे या घटिया स्तर के उर्वरक, जैविक खाद, सूक्ष्म पोषक तत्व और फसल सुरक्षा दवाएं नहीं बेच पाएगी। उत्तर प्रदेश की गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने इस संबंध में राज्य की सभी सहकारी और निजी चीनी मिलों के प्रबंधकों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों को ठगी से बचाना और उन्हें केवल पूरी तरह प्रमाणित कृषि सामग्रियां ही उपलब्ध कराना है ताकि गन्ने की खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सके।

इस कड़े कदम के तहत तय किया गया है कि मिलों द्वारा बांटे जाने वाले कृषि इनपुट के हर लॉट (बैच) का प्रयोगशाला में परीक्षण कराना कानूनी रूप से जरूरी होगा। यह जांच एनएबीएल से मान्यता प्राप्त सरकारी या अधिकृत लैब्स में ही करानी होगी। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पूरी तरह सही पाए जाने वाले उत्पादों को ही किसानों को दिया जा सकेगा। इसके लिए केंद्र सरकार के उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और कीटनाशक अधिनियम 1968 के मानकों को आधार बनाया गया है। इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा देश भर में प्रतिबंधित किए जा चुके किसी भी कीटनाशक के वितरण पर पूरी तरह से रोक रहेगी। मिलों को केवल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई दवाओं को ही बढ़ावा देना होगा।

नए सरकारी दिशा-निर्देशों में किसानों की मर्जी और उनकी जरूरत को सबसे ऊपर रखा गया है। अब चीनी मिलें अपने व्यावसायिक फायदे या टारगेट पूरा करने के लिए किसानों पर जबरन कोई भी कृषि उत्पाद नहीं थोप पाएंगी। किसी भी सामग्री का वितरण करने से पहले संबंधित किसान की लिखित या स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। मिलें केवल किसान की वास्तविक मांग और उसके गन्ने के रकबे (क्षेत्रफल) को देखकर ही उतनी ही मात्रा में सामग्री दे सकेंगी। यदि वितरण किसी बाहरी एजेंसी या डीलर के माध्यम से भी कराया जाता है, तो भी उसकी गुणवत्ता और सही वितरण की पूरी कानूनी जवाबदेही सीधे संबंधित चीनी मिल प्रबंधन की ही तय की जाएगी।

नियमों का उल्लंघन करने वाली और मनमानी करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ सरकार ने बेहद सख्त आर्थिक और कानूनी डंडे का प्रावधान किया है। अगर जांच के दौरान किसी मिल में घटिया सामग्री पाई जाती है या बिना किसान की मर्जी के जबरन वितरण का मामला सामने आता है, तो दोषी मिल के खिलाफ तत्काल विधिक कार्रवाई शुरू होगी। ऐसी स्थिति में गन्ना मूल्य भुगतान से खाद-दवा के पैसों की कटौती या समायोजन करने की सुविधा को तुरंत रोक दिया जाएगा। इसके अलावा, प्रशासन की ओर से संबंधित चीनी मिल की जमा बैंक गारंटी को भी जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।

इस नई व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए बाजार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त की टीमें स्थानीय स्तर पर कीटनाशकों और खादों की औचक सैंपलिंग करेंगी। वहीं इंटरनेट या सोशल मीडिया पर किसानों को गुमराह करने वाले भ्रामक विज्ञापनों और गलत जानकारी फैलाने वाले डीलरों के खिलाफ भी सख्त मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि इस वैज्ञानिक और किसान-केंद्रित व्यवस्था से खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और गन्ना उत्पादकता बढ़ने से किसानों की आमदनी में बड़ा इजाफा होगा।

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