बैंक और प्रशासनिक व्यवस्था की घोर लापरवाही के चलते दान पर डाला गया डाका, पूर्व आईएएस अधिकारी ने निगरानी तंत्र पर उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक और प्रबंधकीय स्तर पर एक बड़ी हलचल पैदा हो गई है। पूर्व आईएएस अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस पूरी धांधली के पीछे सीधे तौर पर बैंकिंग संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदारा
- अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में हुई हेराफेरी पर भड़के निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, कहा— करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ हुआ विश्वासघात
- राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और जिम्मेदार बैंक के बीच हुए समझौते के उल्लंघन का दावा, पूरे काउंटिंग प्रोसेस की नए सिरे से होगी उच्चस्तरीय जांच
अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे और दान राशि में बड़े पैमाने पर हुई चोरी और वित्तीय विसंगतियों का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस संवेदनशील और आस्था से जुड़े प्रकरण पर श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने अपनी बेहद तीखी और गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को देश और दुनिया के करोड़ों राम भक्तों की अटूट आस्था पर एक करारा प्रहार माना है। उनका मानना है कि जब देश का आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक हिस्सा पूरी श्रद्धा के साथ भगवान के चरणों में समर्पित करता है, तब ऐसी व्यवस्थाओं में सेंधमारी होना केवल एक सामान्य वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों के भरोसे का कत्ल है जो इस पावन स्थल से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।
इस पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक और प्रबंधकीय स्तर पर एक बड़ी हलचल पैदा हो गई है। पूर्व आईएएस अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस पूरी धांधली के पीछे सीधे तौर पर बैंकिंग संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ तौर पर दिखाई देता है। उन्होंने इस चोरी की घटना को किसी छिपे हुए वित्तीय गबन की तरह नहीं, बल्कि एक खुले डाके की संज्ञा दी है, जिसे बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। इस पूरे मामले में मंदिर परिसर की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, आंतरिक ऑडिट प्रणाली और दैनिक वित्तीय प्रबंधन के तौर-तरीकों पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं, जिसने पूरे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।
राम मंदिर दान प्रबंधन और काउंटिंग प्रक्रिया के नियम
समझौता और दायित्व: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अनुबंधित बैंक के बीच हुए मूल लिखित समझौते के तहत दान पेटियों से धन निकालना, उसकी सुरक्षित गिनती करना और उसे खाते में जमा करने की पूर्ण विधिक जिम्मेदारी बैंक की तय की गई थी।
सुरक्षा मापदंड: काउंटिंग रूम के भीतर चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों की लाइव निगरानी, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और मेटल डिटेक्टर के माध्यम से तलाशी की सख्त व्यवस्था का नियम है।
अधिकारियों की भूमिका: प्रत्येक काउंटिंग सत्र के दौरान बैंक के प्रबंधकीय स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ ट्रस्ट के अधिकृत प्रतिनिधियों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य की गई थी।
मामले की गहराई में जाने पर जो सबसे चिंताजनक पहलू सामने आ रहा है, वह है पैसे की गिनती (काउंटिंग प्रक्रिया) के दौरान सुरक्षा और सतर्कता के बुनियादी नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन होना। नृपेंद्र मिश्रा ने इस बात की ओर संकेत किया है कि अब तक की शुरुआती जांच और साक्ष्यों से जो तथ्य सामने आए हैं, वे यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि जिस समय और स्थान पर इस दान राशि की गिनती की जा रही थी, वहां सुरक्षा और सतर्कता का स्तर लगभग शून्य था। पूरी व्यवस्था में विजिलेंस यानी सतर्कता विंग का इतना गंभीर अभाव था कि किसी भी बाहरी या आंतरिक व्यक्ति को इस वित्तीय धांधली को अंजाम देने में कोई खास कठिनाई नहीं हुई। यह प्रशासनिक ढिलाई इस मायने में भी चौंकाने वाली है कि अयोध्या जैसे अति-संवेदनशील और देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक परिसर में ऐसी चूक की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
इस पूरे वित्तीय कुप्रबंधन के कानूनी और तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि मंदिर में आने वाले भारी चढ़ावे को व्यवस्थित करने के लिए बकायदा एक कानूनी ढांचा तैयार किया गया था। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संबंधित अनुबंधित बैंक के बीच एक विस्तृत लिखित समझौता हुआ था। इस समझौते के क्लॉज (शर्तों) में यह पूरी तरह से और साफ शब्दों में तय किया गया था कि मंदिर परिसर में रखी दान पेटियों से चढ़ावा निकालने से लेकर, उसकी गिनती करने, उसे सुरक्षित वॉल्ट में रखने और उसका सटीक हिसाब-किताब मेनटेन करने की पूरी जवाबदेही केवल और केवल बैंक प्रशासन की होगी। इस स्पष्ट विधिक जिम्मेदारी के बावजूद बैंक अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रहा, जो उसकी पेशेवर साख और कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा धब्बा है।
इस बड़े खुलासे के बाद अयोध्या पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। पुलिस प्रशासन उन सभी सीसीटीवी फुटेज को बहुत ही बारीकी से स्कैन कर रहा है जहां पिछले कुछ महीनों के दौरान दान की गिनती का काम किया गया था। संदेह के घेरे में बैंक के उन कर्मचारियों को रखा गया है जिनकी ड्यूटी नियमित रूप से काउंटिंग रूम में लगाई जाती थी। इसके साथ ही, इस बात की भी गहनता से तफ्तीश की जा रही है कि कहीं इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा अंतर-प्रांतीय गिरोह तो काम नहीं कर रहा था, जिसने बैंक के भीतर अपने मोहरे फिट कर रखे थे। इस तरह के संवेदनशील मामलों में वित्तीय हेराफेरी को तब तक लंबे समय तक अंजाम नहीं दिया जा सकता जब तक कि व्यवस्था के भीतर बैठे कुछ प्रभावशाली लोगों का मूक संरक्षण या मिलीभगत न हो।
इस घटना के सामने आने के बाद से पूरे देश के संतों, मठाधीशों और आम राम भक्तों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। अयोध्या के स्थानीय साधु-संतों ने इस घटना की तीव्र निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मुकदमा चलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन के लिए देश के करोड़ों लोगों ने दशकों तक त्याग और बलिदान दिया है, और आज जब मंदिर बनकर तैयार हो गया है, तो उसकी पवित्रता और उसके संसाधनों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। इस भारी जनाक्रोश को देखते हुए सरकार और स्थानीय प्रशासन भी भारी दबाव में है और मामले की त्वरित जांच के आदेश दिए गए हैं।
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