HC से मुस्लिम पक्ष को मिला बड़ा झटका, हिंदू पक्ष की दलीलों को सुनने योग्य माना

Aug 3, 2024 - 01:32
Aug 3, 2024 - 01:33
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HC से मुस्लिम पक्ष को मिला बड़ा झटका, हिंदू पक्ष की दलीलों को सुनने योग्य माना

प्रयागराज/मथुरा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि कटरा केशव देव की भूमि से शाही ईदगाह मस्जिद के अवैध कब्जे को हटाने की मांग में दाखिल सिविल वादों की पोषणीयता पर गुरुवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने स्वामित्व को लेकर दाखिल सिविल वादों को पोषणीय माना तथा मस्जिद पक्ष की अर्जियां खारिज कर दीं। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन के फैसले से हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली है। ये मुकदमे शाही ईदगाह मस्जिद का ढांचा हटाकर जमीन का कब्जा देने और मंदिर का पुनर्निर्माण कराने की मांग को लेकर दायर किए गए थे। पूरा विवाद मुगल सम्राट औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। इसका निर्माण भगवान कृष्ण की जन्मस्थली पर बने मंदिर को कथित तौर पर ध्वस्त करने के बाद किया गया। हिंदू पक्ष की याचिकाओं में शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को हिंदुओं का बताया है और वहां पूजा का अधिकार दिए जाने की मांग की है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने वक्‍फ एक्‍ट आदि का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष की याचिकाओं को खारिज किए जाने की दलील पेश की है। अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि मालिकाना हक को लेकर हिंदू पक्ष की याचिकाएं सुनवाई योग्‍य हैं। इन पर सुनवाई जारी रहेगी। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब इस विवाद से जुड़े मामलों में ट्रायल शुरू होगा।

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सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए स्टे करने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाते हुए हाई कोर्ट इलाहाबाद की कार्यवाही को जारी रखने के आदेश दिया । इसके बाद न्यायालय में 7 नियम 11 की सुनवाई की गई। कुल 32 तारीखें पड़ीं। मंदिर पक्ष का कहना है कि ईदगाह के पक्ष में कोई भी दस्तावेज विरोधी के पास नहीं है। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता सौरभ तिवारी का कहना है कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले में मंदिर पक्ष की बड़ी जीत हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की एकल पीठ ने शाही ईदगाह मस्जिद ट्रस्ट के सीपीसी के आदेश सात ,रूल -11 का आवेदन खारिज कर दिया है। मस्जिद पक्ष की तरफ से इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के संकेत दिए गए हैं। मस्जिद पक्ष की तरफ से प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, मियाद कानून और वक्फ संपत्ति होने के आधार पर यह कहा गया था कि सिविल कोर्ट को वाद सुनने का अधिकार नहीं है । मंदिर पक्ष ने इन आपत्तियों को निराधार बताया था। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव सहित 18 सिविल वादों में 15 की सुनवाई न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने की थी। यह लगभग एक ही प्रकृति के थे।

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