Manoj Bajpayee Interview: मनोज बाजपेयी ने बताया क्यों ठुकराते हैं कमर्शियल फिल्में, 'बड़ी फिल्में सिर्फ 40-50 दिन का पिकनिक हैं'

Manoj Bajpayee News: मनोज बाजपेयी ने मुख्यधारा (मेनस्ट्रीम) की फिल्मों को रिजेक्ट करने की वजह बताई है। एक्टर ने कमर्शियल सिनेमा को 'पिकनिक' करार दिया है।

Jun 22, 2026 - 12:07
 0  2
Manoj Bajpayee Interview: मनोज बाजपेयी ने बताया क्यों ठुकराते हैं कमर्शियल फिल्में, 'बड़ी फिल्में सिर्फ 40-50 दिन का पिकनिक हैं'
Actor Manoj Bajpayee
  • Manoj Bajpayee On Mainstream Cinema: 'मेनस्ट्रीम फिल्में सिर्फ पिकनिक हैं', जानें मनोज बाजपेयी क्यों रिजेक्ट करते हैं बड़े बजट के ऑफर
  • "40-50 दिन का पिकनिक हैं बड़ी फिल्में..." मनोज बाजपेयी ने खोला राज, आखिर क्यों बड़ी कमर्शियल फिल्मों को कह देते हैं 'ना'
  • सिनेमा पर मनोज बाजपेयी का बेबाक बयान, कहा- '40-50 दिन का पिकनिक होती हैं बड़ी फिल्में, वहां अभिनय की भूख नहीं मिटती'

भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन और संजीदा अभिनेताओं में शुमार मनोज बाजपेयी अपने बेबाक बयानों और अनूठे किरदारों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मनोज बाजपेयी ने फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े चलन और अपने काम करने के तरीके को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने साफ शब्दों में बताया कि वे आखिर क्यों करोड़ों के बजट वाली मुख्यधारा (मेनस्ट्रीम) की कमर्शियल फिल्मों के ऑफर को रिजेक्ट कर देते हैं। एक्टर ने कहा कि बड़ी व्यावसायिक फिल्में उनके लिए '40-50 दिन का पिकनिक' जैसी होती हैं, जहां रचनात्मक संतुष्टि नहीं मिलती। सिनेमाई समझ और अभिनय के प्रति उनके इस दृष्टिकोण ने एक बार फिर बॉलीवुड में कंटेंट बनाम स्टारडम की बहस को हवा दे दी है।

मनोज बाजपेयी ने हाल ही में मीडिया और सिनेमा समीक्षकों के साथ बातचीत में अपने करियर के फैसलों पर खुलकर चर्चा की। इस बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि बड़े बैनर और भारी-भरकम स्टारकास्ट वाली फिल्मों में वे अब बहुत कम क्यों दिखाई देते हैं, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। बाजपेयी ने मुख्यधारा की बड़ी मसाला फिल्मों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें महज मनोरंजन और पिकनिक का जरिया बताया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या वाकई बड़े बजट की फिल्मों में अभिनेताओं के कौशल का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है।

मनोज बाजपेयी पिछले तीन दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और उन्होंने 'सत्या', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', 'अलीगढ़' से लेकर 'द फैमिली मैन' जैसी कल्ट वेब सीरीज के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एक टॉक शो के दौरान अपने अनुभवों को साझा करते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा, "जब आप एक बड़ी मेनस्ट्रीम फिल्म करते हैं, तो अक्सर वहां अभिनय से ज्यादा ध्यान तड़क-भड़क, भव्यता और सेट पर मिलने वाली सुख-सुविधाओं पर होता है। ऐसी फिल्में मेरे लिए 40-50 दिन का एक पिकनिक जैसी होती हैं। आप वहां जाते हैं, फाइव स्टार होटल में रुकते हैं, वैनिटी वैन में आराम करते हैं, चंद शॉट देते हैं और वापस आ जाते हैं।"

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एक कलाकार के रूप में उनकी भूख इस तरह के काम से शांत नहीं होती। उन्हें ऐसे किरदारों की तलाश रहती है जो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौती दें। यही वजह है कि वे बड़ी रकम और मशहूर डायरेक्टर्स के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को भी बिना किसी हिचकिचाहट के रिजेक्ट कर देते हैं और उसकी जगह छोटे बजट की मगर मजबूत कहानी वाली स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) फिल्मों को प्राथमिकता देते हैं।

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एक कलाकार के रूप में उनकी भूख इस तरह के काम से शांत नहीं होती। उन्हें ऐसे किरदारों की तलाश रहती है जो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौती दें। यही वजह है कि वे बड़ी रकम और मशहूर डायरेक्टर्स के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को भी बिना किसी हिचकिचाहट के रिजेक्ट कर देते हैं और उसकी जगह छोटे बजट की मगर मजबूत कहानी वाली स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) फिल्मों को प्राथमिकता देते हैं।हालांकि, कुछ ट्रेड एनालिस्ट्स और कमर्शियल फिल्म मेकर्स का मानना है कि मेनस्ट्रीम फिल्मों का अपना एक अलग महत्व है। इन फिल्मों से ही इंडस्ट्री का बिजनेस चलता है और थियेटरों में दर्शकों की भीड़ जुटती है।सोशल मीडिया पर फैंस मनोज बाजपेयी की इस ईमानदारी की सराहना कर रहे हैं। प्रशंसकों का कहना है कि इसी कलात्मक प्रतिबद्धता के कारण वे 'द फैमिली मैन' के श्रीकांत तिवारी जैसे आइकॉनिक किरदार दे पाते हैं।यह बयान दिखाता है कि स्थापित होने के बाद भी कुछ कलाकारों के लिए मोटी रकम से ज्यादा स्क्रिप्ट का मजबूत होना मायने रखता है।ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद से मनोज बाजपेयी जैसे एक्टर्स को अब कमर्शियल सिनेमा पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ी है। उन्हें डिजिटल स्पेस में अपनी प्रतिभा दिखाने के भरपूर मौके मिल रहे हैं।इस तरह के बयानों से दर्शकों के बीच भी यह संदेश जाता है कि वे केवल स्टारडम के पीछे भागने के बजाय अच्छी कहानियों को सपोर्ट करें।

मनोज बाजपेयी के वर्कफ्रंट की बात करें तो वे आने वाले समय में कई दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं। फैंस को सबसे ज्यादा इंतजार उनकी मशहूर सीरीज 'द फैमिली मैन' के अगले सीजन का है। इसके अलावा वे कुछ स्वतंत्र निर्देशकों के साथ ऑफ-बीट फिल्मों की शूटिंग में भी व्यस्त हैं। मनोज ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भी उनका चयन इसी तरह की कहानियों के इर्द-गिर्द रहेगा, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करें, न कि केवल चंद घंटों का मनोरंजन प्रदान करें।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow