ज्ञानवापी-मथुरा-सम्भल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की पहल, सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद बोले- 1991 का कानून ही लागू रहे, चुनाव से पहले नए मुद्दे खड़े कर रही BJP
सम्भल: ज्ञानवापी, मथुरा और सम्भल से जुड़े धार्मिक स्थलों के विवादों के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से अगस्त में लोक
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: ज्ञानवापी, मथुरा और सम्भल से जुड़े धार्मिक स्थलों के विवादों के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से अगस्त में लोक अदालत के माध्यम से दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर समाधान तलाशने की पहल पर सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 में संसद द्वारा पारित कानून के तहत बाबरी मस्जिद को छोड़कर अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों को नहीं खोला जाना चाहिए।
नवाब इकबाल महमूद ने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला दे चुका है और पूरे देश ने उस निर्णय का सम्मान किया। उनका कहना है कि अब 1991 के कानून को पूरी तरह लागू रखा जाना चाहिए और ज्ञानवापी, मथुरा तथा सम्भल जैसे मामलों पर आगे सुनवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे देश में संवेदनशील माहौल बनने की आशंका रहती है। लोक अदालत की पहल पर उन्होंने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को बुलाया है तो वे अपनी बात वहीं रखेंगे और यही कहेंगे कि इन मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। सपा विधायक ने इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी जोड़ते हुए आरोप लगाया कि भाजपा विकास के मुद्दों पर बात करने के बजाय नए-नए धार्मिक विवाद सामने ला रही है। उन्होंने दावा किया कि पीडीए अभियान को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे भाजपा की राजनीतिक जमीन खिसक रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि राम मंदिर चंदे का मुद्दा भी भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है और इसी कारण नए विवादों को हवा दी जा रही है।
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