पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग में भारी उछाल, मई में बिक्री का आंकड़ा 1.5 लाख के पार।

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों एक बहुत बड़ा और स्थायी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा संबंध

Jun 1, 2026 - 14:34
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पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग में भारी उछाल, मई में बिक्री का आंकड़ा 1.5 लाख के पार।
पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग में भारी उछाल, मई में बिक्री का आंकड़ा 1.5 लाख के पार।
  • महंगे पारंपरिक ईंधन से परेशान ग्राहकों ने बदला रुख, मई 2026 में देश के ई-स्कूटर और ई-बाइक बाजार ने दर्ज की 8 फीसदी से अधिक की मासिक वृद्धि
  • सरकारी वाहन पोर्टल के आंकड़ों ने चौंकाया, दोपहिया बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर हुई करीब 9 प्रतिशत, ओला और बजाज में कड़ी टक्कर

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों एक बहुत बड़ा और स्थायी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा संबंध पारंपरिक ईंधनों की लगातार बढ़ती कीमतों और उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ने वाले इसके असर से है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती परेशानी से बचने के लिए मध्यमवर्गीय परिवारों और दैनिक यात्रियों ने तेजी से अपने परिवहन के विकल्पों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि मई 2026 के दौरान देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री ने एक बार फिर जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है, जो इस बात का साफ संकेत है कि अब लोग हरित ईंधन और कम परिचालन लागत वाले वाहनों को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के केंद्रीयकृत 'वाहन पोर्टल' पर दर्ज किए गए आधिकारिक पंजीकरण के नवीनतम आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह बात सामने आती है कि मई 2026 में देश के भीतर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का कुल पंजीकरण 1.5 लाख इकाई के पार चला गया है। अप्रैल महीने में देखी गई मामूली गिरावट और बाजार में आए ठहराव के बाद मई के इस प्रदर्शन को ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक शानदार और मजबूत वापसी माना जा रहा है। कुल मिलाकर मई में समूचे दोपहिया बाजार में बाइक और स्कूटर की संयुक्त खुदरा बिक्री 16 लाख इकाइयों से अधिक रही, जिसमें से अकेले इलेक्ट्रिक मॉडल्स ने लगभग 8.9 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी पर अपना मजबूत कब्जा जमा लिया है, जबकि इस साल की शुरुआत यानी जनवरी में यह हिस्सेदारी महज 6.7 प्रतिशत के आसपास सिमटी हुई थी।

बाजार में आई इस नई तेजी और कंपनियों के प्रदर्शन की बात करें तो अलग-अलग इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के बीच शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए बहुत ही दिलचस्प और कड़ी व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इस होड़ में एक अग्रणी घरेलू वाहन निर्माता कंपनी 42,376 इकाइयों के सफल पंजीकरण के साथ बाजार में पहले स्थान पर अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब रही है, हालांकि उसकी कुल बाजार हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है। इसके ठीक पीछे एक अन्य दिग्गज और पारंपरिक ऑटोमोबाइल कंपनी अपने लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर मॉडल की बदौलत बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसने मई में 39,104 वाहनों की बिक्री कर शीर्ष स्थान और अपने प्रतिद्वंद्वी के बीच के फासले को बहुत कम कर दिया है, जिससे आने वाले महीनों में इस बाजार की जंग और अधिक रोचक होने की उम्मीद है। पिछले कुछ महीनों में अपनी गिरती हुई बाजार हिस्सेदारी को बचाने के लिए संघर्ष कर रही देश की एक प्रमुख और सबसे चर्चित इलेक्ट्रिक स्टार्टअप कंपनी ने मई में करीब 23 प्रतिशत की शानदार मासिक विकास दर दर्ज की है। व्यावसायिक रणनीतियों में बदलाव और नए किफायती मॉडल्स को उतारने के कारण इस कंपनी का कुल पंजीकरण मई में बढ़कर 15,139 इकाइयों तक पहुंच गया, जिससे कंपनी की बाजार में वापसी का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

इस पूरे सकारात्मक बदलाव के पीछे सबसे बड़ा और प्रभावी कारण देश की तेल विपणन कंपनियों द्वारा हाल के सप्ताहों में ईंधन की कीमतों में की गई लगातार कई बढ़ोतरी को माना जा रहा है। पिछले महीने के उत्तरार्ध में तेल कंपनियों ने महज दस दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार इजाफा किया, जिससे देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल की कीमतें अपने चार साल के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। वर्तमान समय में जहां एक आम पेट्रोल चालित दोपहिया वाहन को चलाने का खर्च छह से सात रुपये प्रति किलोमीटर आता है, वहीं इसके विपरीत एक इलेक्ट्रिक स्कूटर या ई-बाइक की परिचालन लागत मात्र एक से डेढ़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है। यह भारी बजटीय अंतर दैनिक रूप से 40 से 50 किलोमीटर की यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों और रील्स या डिलीवरी का काम करने वाले युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है।

इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में हो रहे नए तकनीकी नवाचारों और बुनियादी ढांचे के विकास ने भी उपभोक्ताओं के मन से 'रेंज एंग्जायटी' यानी बीच रास्ते में बैटरी खत्म होने के डर को काफी हद तक दूर कर दिया है। देश के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे और श्रेणी-2 के शहरों में निजी और सरकारी सहयोग से स्थापित किए जा रहे डीसी फास्ट-चार्जिंग स्टेशनों के नेटवर्क ने लंबी दूरी की यात्राओं को बेहद सुगम और तनावमुक्त बना दिया है। इसके साथ ही, ई-कॉमर्स कंपनियों और हाइपरलोकल डिलीवरी प्लेटफार्मों की तरफ से लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक फ्लीट को अपनाने के कारण भी कमर्शियल सेगमेंट में इन वाहनों की मांग और परिचालन में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

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