PM Kisan Samman Nidh- दिवाली से पहले आ सकती है 21वीं किस्त, उससे पहले कर लें ये काम।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत देशभर के करोड़ों किसानों को सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह योजना 2019 में शुरू हुई थी, जो छोटे और सीमांत
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत देशभर के करोड़ों किसानों को सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह योजना 2019 में शुरू हुई थी, जो छोटे और सीमांत किसानों को कृषि कार्यों के लिए मदद प्रदान करती है। योजना की 21वीं किस्त का इंतजार लाखों किसानों को है, जो अक्टूबर 2025 में जारी होने की उम्मीद है। लेकिन इससे पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने योजना में गड़बड़ी का पता लगाया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने वेरिफिकेशन ड्राइव चलाई, जिसमें 31.01 लाख संदिग्ध लाभार्थी सामने आए। इनमें ज्यादातर वे मामले हैं जहां पति और पत्नी दोनों ही योजना का लाभ ले रहे हैं। नियम के अनुसार, एक परिवार में पति या पत्नी में से केवल एक ही लाभार्थी हो सकता है। इस गड़बड़ी से अब इन नामों को 21वीं किस्त से पहले हटाया जा सकता है। यह कदम योजना को पारदर्शी बनाने और सही किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है। सरकार का कहना है कि इससे बचे हुए पैसे जरूरतमंद किसानों को मिलेंगे।
योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसमें केंद्र सरकार पूरी तरह फंडिंग करती है। योजना के तहत छोटे और सीमांत किसान परिवारों को साल में तीन किस्तों में 2000-2000 रुपये दिए जाते हैं। अब तक 20 किस्तें जारी हो चुकी हैं। 2 अगस्त 2025 को 20वीं किस्त जारी की गई, जिसमें 9.70 करोड़ किसानों के खाते में कुल 20,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए। योजना ने अब तक 3.69 लाख करोड़ रुपये किसानों को पहुंचाए हैं। लेकिन समय के साथ कुछ अनियमितताएं सामने आईं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने हाल ही में बड़े पैमाने पर वेरिफिकेशन अभियान चलाया। इसमें आधार, बैंक डिटेल्स और भूमि रिकॉर्ड चेक किए गए। परिणामस्वरूप 31.01 लाख संदिग्ध मामले पकड़े गए। इनमें मुख्य समस्या यह थी कि एक परिवार के दोनों पति-पत्नी अलग-अलग नाम से रजिस्टर्ड थे। योजना के दिशा-निर्देश साफ कहते हैं कि परिवार का एक सदस्य ही लाभ ले सकता है। इससे पहले भी 2024 में 5 लाख से ज्यादा फर्जी नाम हटाए गए थे। अब यह नया आंकड़ा योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है।
कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया अभी जारी है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन संदिग्ध नामों की जांच करें। अगर पुष्टि हुई तो नाम हटा दिए जाएंगे। इससे 21वीं किस्त में ये लाभार्थी शामिल नहीं होंगे। योजना के तहत लाभ लेने के लिए किसान को कम से कम 2 डेसीमल भूमि का मालिक होना चाहिए। आयकर दाता, पेंशनभोगी अधिकारी या पेशेवर किसान योजना से बाहर हैं। अब तक 12 करोड़ से ज्यादा किसान रजिस्टर्ड हैं, लेकिन वेरिफिकेशन से संख्या 9.70 करोड़ हो गई। 21वीं किस्त अक्टूबर 2025 में जारी होने की संभावना है, लेकिन कुछ राज्यों में पहले ही वितरण शुरू हो चुका है। उदाहरण के लिए, 7 अक्टूबर 2025 को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जम्मू-कश्मीर के 8.55 लाख किसानों को 171 करोड़ रुपये जारी किए। पंजाब के 11 लाख किसानों को 222 करोड़ और उत्तराखंड के 7.9 लाख किसानों को 158 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। ये वितरण बाढ़ राहत के हिस्से के रूप में हुए। पूरे देश में 21वीं किस्त नवंबर तक पूरी हो सकती है।
संदिग्ध लाभार्थियों की संख्या इतनी ज्यादा होने से सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। 1 जनवरी 2025 से नई रजिस्ट्रेशन में किसान आईडी अनिवार्य कर दी गई। ई-केवाईसी, आधार लिंकिंग और भूमि सत्यापन जरूरी है। अगर ये पूरी न हो तो किस्त रुक जाती है। लाभार्थी pmkisan.gov.in पर जाकर स्टेटस चेक कर सकते हैं। वेबसाइट पर आधार नंबर, बैंक अकाउंट या मोबाइल नंबर डालकर डिटेल्स देखें। कैप्चा कोड भरकर 'गेट डेटा' पर क्लिक करें। अगर समस्या हो तो हेल्पलाइन 155261 या 1800115526 पर कॉल करें। सीएससी सेंटर पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी करवा सकते हैं। सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि गड़बड़ी सुधारें। कई बार आधार या बैंक डिटेल्स में त्रुटि से पेमेंट रुक जाता है। अब डीबीटी सिस्टम से सीधे खाते में ट्रांसफर होता है।
यह वेरिफिकेशन ड्राइव योजना को मजबूत बनाने का प्रयास है। मंत्रालय का कहना है कि फर्जी लाभार्थियों से पैसे बर्बाद हो रहे थे। 31 लाख नाम हटने से करीब 620 करोड़ रुपये (2000 रुपये प्रति किसान) बचेंगे। यह राशि सही किसानों को मिलेगी। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि पर निर्भरता कम करना है। लेकिन गड़बड़ी से गरीब किसान प्रभावित हो रहे। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कहा कि वेरिफिकेशन में देरी से किसान परेशान हैं। लेकिन सरकार ने सफाई दी कि यह पारदर्शिता के लिए जरूरी है। अब तक योजना ने किसानों को बड़ी राहत दी है। खासकर महामारी और प्राकृतिक आपदाओं में। 20वीं किस्त वाराणसी से जारी हुई, जहां पीएम मोदी ने किसानों से बात की। उन्होंने कहा कि योजना से किसानों का जीवन बदला है।
किसानों को सलाह है कि वे तुरंत ई-केवाईसी पूरी करें। वेबसाइट पर 'फार्मर कॉर्नर' में जाकर राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव चुनें। लाभार्थी लिस्ट जेनरेट करें। अगर नाम न हो तो सीएससी पर अपडेट करवाएं। मोबाइल ऐप से भी फेस ऑथेंटिकेशन से केवाईसी हो जाता है। योजना में महिलाओं का नाम जोड़ने का विकल्प है। अगर पति लाभ ले रहे हैं तो पत्नी का नाम जोड़ा जा सकता है। लेकिन दोनों को एक साथ नहीं। संदिग्ध मामलों में राज्य सरकारें जांच करेंगी। अगर गलती साबित हुई तो नाम हटेगा। लेकिन निर्दोष किसानों को अपील का मौका मिलेगा।
यह खबर किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। 21वीं किस्त से पहले नाम चेक करें। अगर संदिग्ध लिस्ट में हैं तो जल्दी वेरिफाई करें। योजना ने अब तक लाखों परिवारों को सहारा दिया। लेकिन पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। सरकार ने कहा कि आगे और सख्ती होगी। फर्जी रजिस्ट्रेशन पर जुर्माना लगेगा। किसान भाई-बहन सतर्क रहें। हेल्पलाइन पर संपर्क करें। यह योजना किसानों का हक है, लेकिन सही तरीके से मिले। आशा है कि वेरिफिकेशन से योजना और मजबूत बनेगी। किसानों को समय पर 2000 रुपये मिलें। दिवाली से पहले यह राहत बनेगी।
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