Sambhal : पांचवीं मोहर्रम पर गमगीन हुआ सिरसी, हज़रत मुस्लिम के बेटों की शहादत की याद में निकले शबीहे ताबूत
शुरुआत में हजारों लोगों ने हज़रत मुस्लिम के हाथों पर इमाम हुसैन की बैअत की, लेकिन जालिम हाकिम के खौफ से लोग अपने वादे से मुकर गए और उन्हें तन्हा छोड़ दिया।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल जनपद के कस्बा सिरसी के मोहल्ला शर्की स्थित मरहूम जफर हुसैन के अज़ाखाने में पांचवीं मोहर्रम के मौके पर अकीदत और गम के माहौल में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस के बाद हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील के दो मासूम बेटों की याद में शबीहे ताबूत बरामद किए गए, जिनकी ज़ियारत के लिए बड़ी संख्या में अज़ादार और अकीदतमंद मौजूद रहे।
मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मंजूर आलम ने हज़रत मुस्लिम की कुर्बानियों और वफादारी पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि कूफा के लोगों के खतों के जवाब में हज़रत इमाम हुसैन ने अपने चचेरे भाई हज़रत मुस्लिम को अपना सफीर बनाकर कूफा भेजा था। शुरुआत में हजारों लोगों ने हज़रत मुस्लिम के हाथों पर इमाम हुसैन की बैअत की, लेकिन जालिम हाकिम के खौफ से लोग अपने वादे से मुकर गए और उन्हें तन्हा छोड़ दिया।
मौलाना ने कहा कि हज़रत मुस्लिम के साथ उनके दो कमसिन बेटे भी थे, जो गिरफ्तारी के दौरान उनसे जुदा हो गए। बाद में जालिमों ने हज़रत मुस्लिम को शहीद करने के साथ-साथ उनके मासूम बेटों को भी बेरहमी से कत्ल कर दिया।
इस दर्दनाक वाकये का बयान सुनकर मजलिस में मौजूद अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और कई लोग फूट-फूट कर रो पड़े। मजलिस के बाद दोनों शहजादों के शबीहे ताबूत बरामद किए गए। इस दौरान अंजुमन हाशमी ने नौहाखानी और मातम पेश किया। गम और अकीदत से सराबोर जुलूस मोहल्ले के विभिन्न मार्गों से होता हुआ इमामबाड़ा पहुंचकर सम्पन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
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