सुप्रीम कोर्ट में जजों के सामने अमर्यादित व्यवहार करने वाले युवक की हुई पहचान, इटावा का रहने वाला है छात्र
नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में जजों के सामने हंगामा करने वाले युवक प्रवल प्रताप सिंह यादव की पहचान इटावा के रूप में हुई है। युवक का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है।
- Supreme Court Ruckus: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाला युवक निकला इटावा का प्रवल प्रताप, हैरान हैं ग्रामीण
- Praval Pratap Singh Yadav: कौन है सुप्रीम कोर्ट में जजों के सामने कागज उड़ाने वाला प्रवल प्रताप? जानिए पारिवारिक पृष्ठभूमि
- सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले प्रवल प्रताप का खुला इटावा कनेक्शन, परिजनों और ग्रामीणों का बयान आया सामने
नई दिल्ली स्थित देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में शुक्रवार को जजों के समक्ष कथित रूप से अमर्यादित व्यवहार करने, दस्तावेज उड़ाने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले व्यक्ति की शिनाख्त हो गई है। आरोपी युवक की पहचान उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के भरथना तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम नगला जयलाल भोली निवासी प्रवल प्रताप सिंह यादव के रूप में हुई है। वह वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि (एलएलबी) की पढ़ाई कर रहा है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद युवक के परिजनों सहित पूरा गांव स्तब्ध और गहरे सदमे में है, क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार उसका स्वभाव बेहद शांत रहा है। इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा आगे की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के भीतर शुक्रवार को एक बेहद हैरान करने वाला वाकया सामने आया। अदालत कक्ष में सुनवाई के दौरान एक युवक ने अचानक जजों के सामने अमर्यादित आचरण शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती सूचनाओं के अनुसार, युवक ने न केवल जजों के समक्ष बदतमीजी की, बल्कि वहां मौजूद महत्वपूर्ण कागजों को भी हवा में उड़ा दिया। इसके साथ ही उसने कथित तौर पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लेकर अपशब्दों का प्रयोग भी किया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कोर्ट रूम में मौजूद सुरक्षाकर्मी और अधिवक्ता हैरान रह गए। सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए युवक को हिरासत में ले लिया और दिल्ली पुलिस को सूचित किया।
इस घटना को अंजाम देने वाला युवक प्रवल प्रताप सिंह यादव मूल रूप से इटावा के भरथना कस्बे से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित नगला जयलाल भोली गांव का रहने वाला है। उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है। उसके पिता के पास महज ढाई बीघा कृषि भूमि है और वे अपनी आजीविका चलाने के लिए भरथना कस्बे में एक निजी दुकान पर काम करते हैं।
प्रवल प्रताप की प्रारंभिक शिक्षा भरथना के एसएवी इंटर कॉलेज से हुई थी। इसके बाद उसने सुतियानी के एसएस मेमोरियल कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और हैंवरा डिग्री कॉलेज से बीएड की पढ़ाई पूरी की। वकालत की पढ़ाई करने की इच्छा के चलते वह लगभग दो वर्ष पूर्व लखनऊ चला गया था, जहाँ वह लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है। उसका एलएलबी का एक वर्ष अभी शेष है। वह विश्वविद्यालय परिसर के पास ही एक किराए का कमरा लेकर रह रहा था।
घटनाक्रम से जुड़ी कड़ियों के अनुसार, बीते 12 मई को उसके ताऊ रविंद्र सिंह यादव के हृदय का आगरा में ऑपरेशन हुआ था, जिसमें प्रवल प्रताप सहायता के लिए उनके साथ गया था। आगरा से वह सीधे दिल्ली के लिए रवाना हो गया और उसके बाद से वह अपने गांव वापस नहीं लौटा था।
इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रवल प्रताप के घर और गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। आरोपी युवक का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है, जिसके कारण उसका परिवार इस अप्रत्याशित हरकत से गहरे सदमे में है। प्रवल की मां कुंती देवी ने बताया कि शुक्रवार शाम को लगभग छह बजे उनकी बेटे से फोन पर बातचीत हुई थी। उस बातचीत के दौरान प्रवल ने सामान्य लहजे में कहा था कि वह अभी सोने जा रहा है और उसने बाद में फोन करने की बात कहकर कॉल काट दी थी। मां ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण है, घर में मात्र एक कमरा और बरामदा है तथा छत पर जाने के लिए पक्की सीढ़ियां तक नहीं बनी हैं।
दूसरी ओर, गांव के स्थानीय निवासियों जैसे सचिन यादव, सुनील कुमार और विशाल ने बताया कि प्रवल का स्वभाव हमेशा से बहुत शांत और सौम्य रहा है। वह गांव में जब भी आता था, लोगों को आपस में मिलजुल कर रहने और किसी भी प्रकार के विवाद या झगड़े से दूर रहने की सलाह देता था। ऐसे शांत स्वभाव के युवक ने देश की सबसे बड़ी अदालत में जाकर ऐसा गंभीर कृत्य क्यों किया, यह बात ग्रामीणों और परिजनों की समझ से पूरी तरह परे है।
सुप्रीम कोर्ट जैसी कड़ी सुरक्षा और उच्च मर्यादा वाले स्थान पर इस तरह के कृत्य ने न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था और वहां मौजूद जनमानस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चूंकि मामला सीधे तौर पर न्यायपालिका की अवमानना और जजों के प्रति अभद्र व्यवहार से जुड़ा है, इसलिए इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव युवक के करियर पर भी पड़ सकता है, क्योंकि वह खुद कानून का छात्र है और इस प्रकार की अनुशासनहीनता या आपराधिक मामला दर्ज होने से उसके भविष्य पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों ने युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही है कि युवक मानसिक रूप से परेशान था या किसी खास मामले की सुनवाई से असंतुष्ट होकर उसने इस कदम को उठाया। स्थानीय स्तर पर इटावा पुलिस भी युवक की पृष्ठभूमि और उसके लखनऊ तथा दिल्ली प्रवास के दौरान के संपर्कों की पड़ताल कर सकती है। न्यायालय इस मामले में अवमानना की कार्यवाही या अन्य दंडात्मक कदम उठाने पर विचार कर सकता है।
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