Madhya Pradesh: पुराने अधीक्षक की गुंडागर्दी: नए अधीक्षक को 4 दिन धूप में बैठाया, चार्ज देने से इनकार – आदेश न आने का बहाना।
मध्यप्रदेश के बैतूल में छात्रवासों की स्थिति बड़ी दयनीय है इसको लेकर विभिन्न संगठन सुधार किए जाने की मांगे लगातार करते आ रहे है पर नए साहब के रवैये के चलते हालात
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
- सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास के पुराने अधीक्षक की खुली गुंडागर्दी, नए आये अधीक्षक को 4 दिनों से बैठा रहे धूप में,चार्ज देने के नाम पर आदेश नही आने का दे रहे हवाला,सहायक आयुक्त कार्यालय से अब तक नही मिला अब तक कोई आदेश,पुराने अधीक्षक का कहना,मामले में उठ रहे कई सवाल,
मध्यप्रदेश के बैतूल में छात्रवासों की स्थिति बड़ी दयनीय है इसको लेकर विभिन्न संगठन सुधार किए जाने की मांगे लगातार करते आ रहे है पर नए साहब के रवैये के चलते हालात जस के तस है आपको बता दें कि सहायक आयुक्त विवेक पांडे के इस रवैये को लेकर उनके कार्यालय के कर्मचारी तक त्रस्त है ताजा मामला आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास से सामने आया है जहाँ पदस्थ अधीक्षक नारायण सिंह नगदे अपने अड़ियल स्वभाव के चलते हमेशा चर्चाओं में बने रहते है एक ओर तो वो खुद अधीक्षक पद पर रहना नही चाह रहे है।
इस बात को लेकर कई बार अधिकारी से बात की आवेदन भी दिए पर जब उन्हें वहां से हटा दिया गया तो वे उस पद को छोड़ना ही नही चाह रहे है पूरा मामला यह है कि सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास में पदस्थ नारायण सिंह नगदे को अपनी मूल पदस्थापना पर जाने के आदेश सहायक आयुक्त कार्यालय से होने की बात सामने आ रही है वही देवपुर कोटमी में पदस्थ सहायक शिक्षक अलकेश पाटनकर को छात्रवास का प्रभार दिया गया है जिसके लिए वह 12 अक्टूबर 2025 से रिलीव होकर जनपद पंचायत बैतूल आ गए थे।
जहाँ से रिलीव होने के बाद 28 अक्टूबर को सहायक शिक्षक पाटनकर छात्रावास में जॉइनिंग ले चुके है पर पुराने अधीक्षक छात्रावास का चार्ज देने के लिए मना कर चुके है उनका कहना है कि मुझे अब तक कोई लेटर नही मिला है इसीलिए मैंने चार्ज नही दिया है और इसी कारण से छात्रावास के नए अधीक्षक धूप में बाहर बैठे है और तो और उन्हें उपस्थिति पंजी पर भी हस्ताक्षर नही करने दिए जा रहे है अब इस पूरे मामले में एक सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नए अधीक्षक की जोइनिंग हो गयी है तो पुराने अधीक्षक को अब तक सहायक आयुक्त कार्यालय से कोई लेटर क्यों नही गया और क्या सहायक आयुक्त ही कुछ और गेम खेल रहे है।
इस मामले को लेकर जब सहायक आयुक्त का पक्ष जानने कार्यालय पहुँचे तो वे वहाँ नही थे मोबाइल पर कॉल किया तो साहब ने नए नम्बर ब्लैकलिस्ट कर रखे है इसीलिए चर्चा नही हो पाई खैर अब देखना यह होगा इस पूरे मामले में कलेक्टर संज्ञान लेकर कोई कार्यवाही करते है या फिर इसी तरह नए अधीक्षक को बाहर ही बैठे रहने को मजबूर होना पड़ेगा ।
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