दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क दुर्घटना: तेज रफ्तार टेंपो ट्रेवलर ने तीन बाइक सवार युवकों को कुचला, सभी की मौके पर ही मौत।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) एक बार फिर रक्त रंजित हो उठा है, जहाँ एक तेज रफ्तार टेंपो ट्रेवलर ने कहर बरपाते हुए तीन युवकों को अपनी
- रफ्तार का कहर: एक्सप्रेसवे पर अनियंत्रित वाहन ने छीनी तीन घरों के चिरागों की रोशनी, चालक वाहन छोड़कर हुआ फरार
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर खूनी खेल: गाजियाबाद के पास दर्दनाक हादसा, हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर लगा लंबा जाम
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) एक बार फिर रक्त रंजित हो उठा है, जहाँ एक तेज रफ्तार टेंपो ट्रेवलर ने कहर बरपाते हुए तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। यह हृदय विदारक दुर्घटना गाजियाबाद सीमा के पास स्थित एक्सप्रेसवे के एक हिस्से पर हुई, जहाँ गति सीमा के उल्लंघन और लापरवाही ने तीन बेकसूर जानों की बलि ले ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना भीषण था कि टक्कर लगते ही तीनों युवक सड़क पर काफी दूर तक घिसटते चले गए और उनके वाहन के परखच्चे उड़ गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एक्सप्रेसवे की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुँची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सा कर्मियों ने घटनास्थल पर ही तीनों युवकों को मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा मानकों और भारी वाहनों की अनियंत्रित गति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतकों की पहचान के संबंध में मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तीनों युवक आपस में दोस्त थे और किसी निजी कार्य से दिल्ली की ओर जा रहे थे। जैसे ही उनकी मोटरसाइकिल गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक क्षेत्र के समीप एक्सप्रेसवे के मुख्य लेन पर पहुँची, पीछे से आ रही एक अनियंत्रित टेंपो ट्रेवलर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टक्कर मारने के बाद आरोपी चालक ने मौके से भागने का प्रयास किया, लेकिन वाहन के क्षतिग्रस्त होने के कारण वह कुछ ही दूरी पर टेंपो ट्रेवलर छोड़कर पैदल ही फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है और उसके पंजीकरण नंबर के आधार पर मालिक और चालक की तलाश शुरू कर दी गई है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों का प्रवेश वर्जित है, इसके बावजूद अक्सर बाइक सवार इस मार्ग का उपयोग करते देखे जाते हैं। पुलिस जांच में यह बिंदु भी सामने आया है कि क्या युवक गलत दिशा से आ रहे थे या वे अनुमति न होने के बावजूद एक्सप्रेसवे की मुख्य लेन पर सफर कर रहे थे। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि टेंपो ट्रेवलर की गति निर्धारित सीमा से कहीं अधिक थी, जिसके कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर चीख-पुकार मच गई और राहगीरों ने तुरंत पुलिस को फोन किया। पुलिस ने मृतकों के पास से मिले दस्तावेजों और मोबाइल फोन के जरिए उनके परिजनों को सूचित किया, जिसके बाद उनके घरों में मातम पसर गया है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा नियमों के अनुसार दोपहिया और तिपहिया वाहनों का चलना पूरी तरह प्रतिबंधित है। तेज रफ्तार लेन में इन वाहनों का प्रवेश न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस प्रशासन समय-समय पर चालान के माध्यम से कड़ाई बरतता है, फिर भी उल्लंघन जारी है। दुर्घटना के बाद एक्सप्रेसवे की मुख्य लेन पर घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। गाजियाबाद पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर रास्ता साफ कराया ताकि यातायात सामान्य हो सके। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और फोरेंसिक टीम को भी साक्ष्य जुटाने के लिए बुलाया गया। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि शायद टेंपो ट्रेवलर चालक को झपकी आ गई थी या वह किसी अन्य वाहन को ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है ताकि हादसे के वास्तविक कारणों और आरोपी चालक के भागने के रूट का पता लगाया जा सके।
इस हादसे ने एनएचएआई (NHAI) और यातायात विभाग के उन दावों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिनमें एक्सप्रेसवे को स्मार्ट और सुरक्षित बताया जाता है। यदि प्रवेश द्वारों पर निगरानी सख्त होती, तो शायद ये युवक एक्सप्रेसवे की मुख्य लेन तक नहीं पहुँचते और उनकी जान बच सकती थी। एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह लगे स्पीड डिटेक्शन कैमरों की रिपोर्ट भी मंगवाई जा रही है ताकि यह देखा जा सके कि दुर्घटना के समय टेंपो ट्रेवलर की वास्तविक गति क्या थी। प्रशासन अब इस घटना के बाद उन कट पॉइंट्स को भी सील करने की योजना बना रहा है, जहाँ से छोटे वाहन अवैध रूप से एक्सप्रेसवे पर चढ़ जाते हैं। परिजनों के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जुटे रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतकों में से एक युवक अपने परिवार का एकमात्र सहारा था और हाल ही में उसकी नौकरी लगी थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर पुलिस की मौजूदगी और पेट्रोलिंग को और अधिक सक्रिय करने की आवश्यकता है, ताकि भारी वाहनों की गति पर लगाम कसी जा सके और प्रतिबंधित वाहनों को प्रवेश करने से रोका जा सके। अक्सर रात और तड़के सुबह के समय चालक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं, जिससे ऐसे जानलेवा हादसे होते हैं। पुलिस ने इस मामले में लापरवाही से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
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