दिल्ली के इंडिया गेट पर वायु प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में माओवादी कमांडर मदवी हिडमा के समर्थन में लगे नारे, हिंसा के बाद 15 गिरफ्तार।
दिल्ली के इंडिया गेट पर रविवार शाम को वायु प्रदूषण के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने सबसे पहले
दिल्ली के इंडिया गेट पर रविवार शाम को वायु प्रदूषण के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने सबसे पहले शहर की जहरीली हवा के खिलाफ नारे लगाए, लेकिन जल्द ही कुछ लोगों ने मारे गए माओवादी कमांडर मदवी हिडमा के पोस्टर दिखाए और उनके समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। नारों में 'कितने हिडमा मारोगे', 'हर घर से निकलेगा हिडमा' और 'हिडमा अमर रहे' जैसे वाक्य सुनाई दिए। एक पोस्टर पर लिखा था 'बिरसा मुंडा से मदवी हिडमा तक, हमारे जंगलों और पर्यावरण की लड़ाई जारी रहेगी'। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। परिणामस्वरूप 15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना दिल्ली की वायु संकट की गंभीरता के साथ-साथ राजनीतिक विवाद को भी जन्म दे रही है, जहां प्रदूषण का मुद्दा माओवादी समर्थन से जुड़ गया।
घटना रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे शुरू हुई। दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार पहुंच गया था, जो गंभीर श्रेणी में आता है। शहर के कई इलाकों में स्कूलों को हाइब्रिड मोड में भेजा गया और स्वास्थ्य सलाह जारी की गई। 50 से 60 युवा इंडिया गेट के सी-हेक्सागन क्षेत्र में इकट्ठा हुए। वे प्लेकार्ड लेकर बैठे और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। नारे लगे 'दिल्ली की हवा को साफ करो', 'प्रदूषण बंद करो' और 'सरकार सो रही है'। प्रदर्शनकारी सरकार पर आरोप लगाते थे कि क्लाउड सीडिंग और वाटर स्प्रिंकलर जैसे उपाय केवल दिखावटी हैं। लेकिन कुछ मिनटों में माहौल बदल गया। एक युवक ने मदवी हिडमा का स्केच वाला पोस्टर ऊंचा किया। बाकी लोग भी शामिल हो गए। नारे तेज हो गए। वीडियो फुटेज में साफ दिखा कि प्रदर्शनकारी 'रेड सैल्यूट' भी दे रहे थे।
पुलिस को सूचना मिली तो दिल्ली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। डीसीपी देवेश कुमार महला ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से हटाने की कोशिश की गई। लेकिन वे सड़क ब्लॉक किए हुए थे। जब पुलिस ने उन्हें हटाना शुरू किया तो कुछ युवाओं ने मिर्च स्प्रे छिड़का। इससे तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। एक वायरल तस्वीर में एक युवक को फर्श पर दबाकर पकड़ा गया दिख रहा है। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और 15 लोगों को हिरासत में लिया। सभी को कोतवाली थाने ले जाया गया। जांच में पता चला कि प्रदर्शनकारी जेएनयू और डीयू के छात्र लग रहे हैं। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और वीडियो से पहचान कर रही है। एंटी-टेरर चार्ज लगाने की भी बात हो रही है।
मदवी हिडमा माओवादी संगठन सीपीआई (माओइस्ट) के सबसे खतरनाक कमांडरों में से एक था। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी हिडमा ने बटालियन नंबर 1 का नेतृत्व किया। उसके सिर पर एक करोड़ रुपये का इनाम था। हिडमा को 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारे डुमिल्ली जंगलों में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया गया। यह ऑपरेशन ग्रेहाउंड का हिस्सा था। हिडमा पर कई बड़े हमलों का आरोप था। 2010 के दंतेवाड़ा हमले में 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए। 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले में 27 लोग मारे गए, जिनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल थे। 2017 के बुरकापल हमले और 2021 के सुकमा-बीजापुर हमले में 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। हिडमा ने 26 से ज्यादा हमले कराए। उसकी मौत को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता माना गया। लेकिन प्रदर्शन में उसके समर्थन ने विवाद खड़ा कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि हिडमा आदिवासी अधिकारों और पर्यावरण की लड़ाई का प्रतीक था। पोस्टर पर बिरसा मुंडा का जिक्र आदिवासी विद्रोह की याद दिलाता है। लेकिन आलोचकों ने इसे माओवादी प्रचार बताया। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने एक्स पर लिखा कि प्रदूषण के बहाने नक्सली और जिहादी सोशल एक्टिविस्ट बनकर घूम रहे हैं। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि ये वही जेएनयू वाले छात्र हैं जो प्रदूषण के नाम पर कम्युनिस्ट एजेंडा चला रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा की जीत के बाद ही ऐसे प्रदर्शन शुरू हुए। सोशल मीडिया पर #UrbanNaxals ट्रेंड करने लगा। रेडिट पर यूजर्स ने लिखा कि प्रदर्शन हमेशा सतह पर एक मुद्दा लेकर शुरू होते हैं लेकिन असली एजेंडा अलग होता है। एक यूजर ने कहा कि प्रदूषण के नाम पर हिडमा को जॉइन करने का मौका मिल गया।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन की जांच चल रही है। डीसीपी महला ने बताया कि हिडमा के पोस्टर कैसे आए, इसकी पड़ताल हो रही। क्या यह संगठित प्रयास था या कुछ लोग घुस आए। गिरफ्तार युवाओं से पूछताछ हो रही। एनआईए को भी सूचना दी गई है। प्रदर्शनकारी संगठन का नाम नहीं बताया गया, लेकिन बैनर से लग रहा कि ये पर्यावरण समूह से जुड़े हैं। पुलिस ने सख्त चेतावनी दी कि प्रदूषण का मुद्दा उठाना ठीक है लेकिन हिंसा या उग्रवादी नारे बर्दाश्त नहीं। इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। इंडिया गेट पर नाइट कर्फ्यू जैसी अफवाहें उड़ीं लेकिन खारिज कर दी गईं।
दिल्ली का वायु प्रदूषण अब गंभीर समस्या बन गया है। नवंबर में धुंध की चादर ने शहर को घेर लिया। पराली जलाने, वाहनों की संख्या और निर्माण कार्य मुख्य कारण हैं। सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान लागू किया। निर्माण बंद, 50 प्रतिशत सरकारी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम। लेकिन प्रदर्शनकारी कहते हैं कि ये अस्थायी उपाय हैं। स्थायी समाधान चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण पर राजनीति हो रही। लेकिन हिडमा के नारे ने मुद्दे को विवादास्पद बना दिया। पर्यावरण कार्यकर्ता नलिनी उनागर ने एक्स पर लिखा कि हिंसा का समर्थन नहीं लेकिन प्रदूषण पर प्रदर्शन जरूरी। उन्होंने कहा कि युवा सड़कों पर उतरें तो नेता जागेंगे।
यह घटना भारत में नक्सलवाद और पर्यावरण आंदोलनों के बीच कथित लिंक को उजागर करती है। नक्सली अक्सर आदिवासी इलाकों में पर्यावरण के नाम पर समर्थन जुटाते हैं। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में ऐसे मामले देखे गए। हिडमा की मौत के बाद उसके समर्थक सक्रिय हो सकते हैं। सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान तेज किया है। लेकिन दिल्ली जैसे शहरों में उभरते 'अर्बन नक्सल' का खतरा बढ़ा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि सोशल मीडिया से प्रचार आसान हो गया। युवा पर्यावरण के नाम पर जुड़ते हैं लेकिन गलत एजेंडे में फंस जाते हैं। एनएचआरसी और चुनाव आयोग जैसे संस्थान भी ऐसे मामलों पर नजर रखते हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए। एएनआई के वीडियो में नारे साफ सुनाई दे रहे। लाखों व्यूज आए। लोग दोहरी प्रतिक्रिया दे रहे। कुछ प्रदूषण मुद्दे को सपोर्ट कर रहे, तो कुछ नक्सली नारों की निंदा। एक यूजर ने लिखा कि प्रदूषण असली समस्या है, नारे नहीं। दूसरे ने कहा कि पुलिस ने सही किया। भाजपा ने इसे राजनीतिक हथियार बनाया। कांग्रेस ने चुप्पी साधी। आम आदमी पार्टी ने प्रदूषण पर फोकस रखा। लेकिन विवाद बढ़ने से प्रदूषण मुद्दा पीछे छूट गया।
प्रदर्शन के बाद इंडिया गेट साफ हो गया। लेकिन दिल्ली की हवा अभी भी जहरीली है। सोमवार को एक्यूआई 450 के पार। अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ीं। बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित। सरकार ने अंतरराज्यीय परिषद बुलाई। पंजाब, हरियाणा से बात हो रही। प्रदर्शनकारी चाहते थे कि केंद्र और राज्य मिलकर काम करें। लेकिन नारे लगने से उनका संदेश कमजोर पड़ा। पुलिस ने कहा कि भविष्य में अनुमति के बिना प्रदर्शन नहीं।
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