New Delhi: आरक्षण- जब जस्टिस गवई ने एडवोकेट रीना एन सिंह के मुद्दों को उठाया, आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए रीना एन सिंह ने दाखिल की है सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका।
पिछले दिनों देश के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने आंध्र प्रदेश के अमरावती में एक कार्यक्रम के दौरान आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को आरक्षण
नई दिल्ली। पिछले दिनों देश के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने आंध्र प्रदेश के अमरावती में एक कार्यक्रम के दौरान आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर करने की बात की और कहा कि इसके लिए संसद को कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब एक व्यक्ति आई ए एस बन जाता है तो उसके बच्चे का सामाजिक स्तर गांव में खेतिहर और मजदूर व्यक्ति के बच्चे के बराबर नहीं रह जाता इसलिए आरक्षण का लाभ गरीब और खेतिहर मजदूर के बच्चे को ही मिलना चाहिए ना कि आई ए एस के बच्चे को। मुख्य न्यायाधीश के इस बयान की लगातार चर्चा हो रही है।
इसी तरह के मामले पर पिछड़ा वर्ग और दलित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह ने एक जनहित याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की है जिसे न्यायाधीश सूर्यकांत एवं जायमाल्या बागची की बेंच ने 11 अगस्त 2025 को स्वीकार कर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, इसमें रीना एन सिंह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत आरक्षण में संवैधानिक सुधार की मांग की है इसके अलावा उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 में दिए गए मौलिक अधिकारों का जिक्र करते हुए मांग की है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने जिन मुद्दों को उठाया ठीक उन्ही मुद्दों पर रीना एन सिंह ने जनहित याचिका दाखिल की है।
रमाशंकर प्रजापति बनाम भारत संघ व अन्य मामले में अधिवक्ता रीना एन सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने उनकी सराहना की और साथ ही बड़े व्यापक सुधार के लिए उनसे समाज में होने वाले विरोध के लिए भी तैयार रहने को कहा।मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर करने की बात कही और कहा कि यह देश की संसद तय करे कि आरक्षण जारी रहेगा या नहीं।
इस मामले पर जब रीना एन सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरक्षण पात्र व्यक्ति को दिया जाना चाहिए और मदद वहां से शुरू होनी चाहिए जहां उसकी सर्वाधिक आवश्यकता हो मुख्य न्यायाधीश के द्वारा दिए गए बयान की प्रशंसा और उनको धन्यवाद देते हुए रीना एन सिंह ने कहा की मुख्य न्यायाधीश आर्थिक रूप से कमजोर पिछड़ा वर्ग और दलितों की आवाज बने हैं। विधायिका को उनके वक्तव्य पर मंथन करना चाहिए। रीना एन सिंह ने कहा कि सच्चा सामाजिक न्याय तभी स्थापित होगा जब जन्म नहीं बल्कि अवसर तय करेगा कि कौन कितना आगे बढ़ सकता है, और आरक्षण की सफलता तभी मानी जाएगी जब इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंदों और सबसे वंचित लोगों तक पहुँचे,ओबीसी में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू होने के बावजूद एस सी एस टी में अभी भी इसे लागू नहीं किया गया है, जिसके कारण कई सम्पन्न और स्थापित परिवार लगातार आरक्षण का लाभ उठाते रहते हैं जबकि अत्यंत गरीब और पिछड़े परिवार पीछे ही छूट जाते हैं।
रीना एन सिंह ने कहा कि इसी असमानता को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने हमारी जनहित याचिका को स्वीकार किया जिसमें यह प्रार्थना की गई है कि आरक्षण व्यवस्था से क्रीमी लेयर को बाहर किया जाए और आरक्षण का पहला अधिकार उन लोगों को मिले जो सबसे गरीब, सबसे पिछड़े और सबसे अधिक वंचित हैं, ताकि आरक्षण कुछ परिवारों का स्थायी विशेषाधिकार न बनकर एक प्रगतिशील व्यवस्था बने जो वास्तविक गरीबों को उभरने का अवसर दे, और देश एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ सके।
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