Lucknow News: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अनूठी पहल- सार्वजनिक परिवहन में चालकों का विवरण प्रदर्शित करने का निर्णय
डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बताया कि यह निर्णय महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और परिवहन साधनों में होने वाली अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है। हाल ...
By INA News Lucknow.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक अभिनव और प्रभावी कदम उठाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने घोषणा की कि प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाली उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए आयोग समय-समय पर ठोस सुझाव और संस्तुतियां सरकार को प्रेषित करता रहा है। इसी कड़ी में, आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत प्रदेश में संचालित होने वाले सभी सार्वजनिक परिवहन साधनों, जैसे ई-रिक्शा, ऑटो, टेंपो, ओला, उबर, रैपिडो जैसी कैब सेवाओं पर चालक का नाम, मोबाइल नंबर, और आधार नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बताया कि यह निर्णय महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और परिवहन साधनों में होने वाली अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है। हाल के वर्षों में, सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, उत्पीड़न, और अन्य अपराधों की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने महिलाओं के बीच असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है, जिससे उनकी स्वतंत्रता और गतिशीलता पर भी असर पड़ा है। आयोग का मानना है कि चालकों का विवरण वाहनों पर प्रदर्शित करने से न केवल चालकों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों, विशेषकर महिलाओं को भी सुरक्षित महसूस होगा।
यह पहल न केवल अपराधों की रोकथाम में सहायक होगी, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में चालक की पहचान और त्वरित कार्रवाई को भी आसान बनाएगी। चालक का नाम, मोबाइल नंबर, और आधार नंबर वाहन पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से यात्रियों को यह विश्वास होगा कि उनकी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, यह व्यवस्था पुलिस और प्रशासन के लिए भी अपराधियों की पहचान और जांच प्रक्रिया को सरल बनाएगी। डॉ. चौहान ने बताया कि इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए आयोग ने परिवहन विभाग को औपचारिक रूप से पत्र लिखा है। इस पत्र में परिवहन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह से अनुरोध किया गया है कि वे इस निर्णय को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी सार्वजनिक परिवहन साधनों, चाहे वे निजी हों या सरकारी, पर चालक का विवरण अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए।
आयोग ने सुझाव दिया है कि इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग द्वारा एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके तहत, वाहन मालिकों और चालकों को अपने वाहनों पर यह जानकारी प्रदर्शित करने के लिए जागरूक किया जाए, और नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके लिए परिवहन विभाग, पुलिस, और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग लंबे समय से महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। आयोग ने समय-समय पर विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए कदम उठाए हैं। इस नई पहल को आयोग की उन कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है, जो महिलाओं को सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ सार्वजनिक स्थानों पर आवागमन करने में सक्षम बनाएंगे।
डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि यह पहल न केवल महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी देगी कि उत्तर प्रदेश सरकार और आयोग महिलाओं के कल्याण और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की पहलें अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकती हैं, जहां सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
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