नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: इन 10 शहरों के लिए सबसे पहले उड़ान भरेंगी फ्लाइट्स: मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद समेत देश के महानगरों से सीधे जुड़ेगा नोएडा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन होने के बाद अब सबकी निगाहें कमर्शियल ऑपरेशंस यानी व्यावसायिक उड़ानों के
- आज से शुरू हुआ जेवर का नया सफर, दिल्ली-एनसीआर को मिला दूसरा हवाई ठिकाना
- टिकट बुकिंग की तारीखों का हुआ खुलासा: जानिए कब से शुरू होगा जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों का सिलसिला
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन होने के बाद अब सबकी निगाहें कमर्शियल ऑपरेशंस यानी व्यावसायिक उड़ानों के शुरू होने पर टिकी हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, उद्घाटन के बाद उड़ानों का सिलसिला अगले 45 से 60 दिनों के भीतर शुरू होने की संभावना है। शुरुआती चरण में घरेलू उड़ानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि कनेक्टिविटी को मजबूती दी जा सके। जेवर से उड़ान भरने वाले विमानों के लिए 'DXN' कोड आवंटित किया गया है, जो जल्द ही दुनिया भर के बुकिंग पोर्टल्स पर दिखाई देने लगेगा। यह हवाई अड्डा आधुनिक सुविधाओं और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों से लैस है, जो इसे भारत के अन्य हवाई अड्डों से अलग बनाता है।
शुरुआती दौर में जिन 10 प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की योजना बनाई गई है, उनमें देश के सबसे व्यस्त रूट शामिल हैं। इन शहरों की सूची में मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, पुणे, अहमदाबाद, चेन्नई, लखनऊ, गोवा और जयपुर के नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आए हैं। इन शहरों का चयन उनकी उच्च मांग और व्यापारिक महत्व को देखते हुए किया गया है। इन शहरों के लिए उड़ानें शुरू होने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के यात्रियों को दिल्ली जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी। इसके अलावा, इससे क्षेत्रीय पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
टिकट बुकिंग को लेकर यात्रियों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है। एयरपोर्ट प्रबंधन और एयरलाइंस कंपनियों के बीच हुए समझौतों के अनुसार, टिकटों की बुकिंग वास्तविक उड़ान संचालन शुरू होने से लगभग 2 से 4 सप्ताह पहले शुरू की जा सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अप्रैल के अंत या मई 2026 के पहले सप्ताह तक बुकिंग विंडो खुल सकती है। इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी एयरलाइंस ने पहले ही इस हवाई अड्डे से अपनी सेवाएं शुरू करने की पुष्टि कर दी है। जैसे ही एयरलाइंस को अंतिम नियामक मंजूरी और स्लॉट आवंटित हो जाएंगे, वे अपने आधिकारिक मोबाइल ऐप और वेबसाइटों पर टिकटों की बिक्री शुरू कर देंगे।
इनसेट: नोएडा एयरपोर्ट (DXN) की विशेषताएं जेवर एयरपोर्ट को 'नेट जीरो एमिशन' की अवधारणा पर विकसित किया गया है। पहले चरण में इसकी क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की है। इसमें 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है जो दुनिया के सबसे बड़े विमानों को भी लैंड कराने में सक्षम है। भविष्य में इस एयरपोर्ट की क्षमता को 7 करोड़ यात्रियों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
हवाई अड्डे के उद्घाटन के बाद पहले कुछ हफ्तों में विमानों की 'ट्रायल रन' और सुरक्षा जांच के अंतिम चरणों को पूरा किया जाएगा। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से पहले ही एयरोड्रोम लाइसेंस प्राप्त हो चुका है, जो यह सुनिश्चित करता है कि बुनियादी ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। शुरुआती उड़ानों के लिए जो 10 शहर चुने गए हैं, उनके लिए समय सारिणी तैयार की जा रही है। एयरपोर्ट प्रशासन का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि शुरुआत में उड़ानों का परिचालन सुचारू रहे और यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। इसके लिए सुरक्षा और ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ की तैनाती भी पूरी कर ली गई है।
नोएडा एयरपोर्ट न केवल उड़ानों के लिए बल्कि अपनी कनेक्टिविटी के लिए भी जाना जाएगा। इसे यमुना एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ा गया है, जिससे आगरा और मथुरा से आने वाले यात्री भी आसानी से यहाँ पहुँच सकेंगे। इसके अलावा, यहाँ से विभिन्न शहरों के लिए इलेक्ट्रिक टैक्सियों और बस सेवाओं का जाल बिछाया जा रहा है। मेट्रो और रैपिड रेल के माध्यम से इसे दिल्ली के प्रमुख केंद्रों से जोड़ने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। यह मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी इस हवाई अड्डे को यात्रियों की पहली पसंद बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। शुरुआत में दिन के समय उड़ानें संचालित होंगी, जिन्हें बाद में 24 घंटे के लिए विस्तारित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बात करें तो, 2026 के अंत तक जेवर से खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए सेवाएं शुरू होने की संभावना है। हालांकि, पहले 10 शहरों की सूची पूरी तरह घरेलू मेट्रो शहरों पर आधारित है। सरकार का मानना है कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। कार्गो ऑपरेशंस के लिए भी यहाँ विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिससे स्थानीय निर्यातकों को अपना सामान अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने में आसानी होगी। जेवर का यह 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के रियल एस्टेट बाजार में भी उछाल ला रहा है।
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