Sambhal : थाना परिसर में खुद को आग लगाने वाले ग्रामीण की दिल्ली एम्स में मौत, गांव बना पुलिस छावनी
सम्भल पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, 17 जून की रात धनारी थाना क्षेत्र के बगढेर गांव में दो पक्षों के बीच मारपीट की सूचना मिली थी। पुलिस दोनों पक्षों को थाने लाई थी, जिसमें सुरेंद्र नामक व्यक्ति घायल था और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया था। पुलिस के मुताबि
Report : उवैस दानिश, सम्भल
जनपद सम्भल के धनारी थाना क्षेत्र के बगढेर गांव निवासी एक ग्रामीण की दिल्ली एम्स में उपचार के दौरान मौत हो गई। ग्रामीण ने दो दिन पहले धनारी थाना परिसर के बाहर खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली थी, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया था। घटना के बाद पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए कंबल डालकर आग बुझाई और उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया था। गंभीर हालत को देखते हुए बाद में उसे दिल्ली एम्स रेफर किया गया, जहां शनिवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
ग्रामीण की मौत की सूचना मिलते ही गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मृतक का शव पोस्टमार्टम के बाद देर शाम तक परिजनों को सौंपे जाने की संभावना है।
पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों का किया खंडन
सम्भल पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, 17 जून की रात धनारी थाना क्षेत्र के बगढेर गांव में दो पक्षों के बीच मारपीट की सूचना मिली थी। पुलिस दोनों पक्षों को थाने लाई थी, जिसमें सुरेंद्र नामक व्यक्ति घायल था और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया था।
पुलिस के मुताबिक 18 जून की शाम करीब 30 वर्षीय मोरध्वज पुत्र भूरे ने शराब के नशे में खुद पर मिट्टी का तेल डालकर थाना परिसर के बाहर आग लगा ली थी, जिससे वह 25-30 प्रतिशत तक झुलस गया था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत आग बुझाकर उसे सीएचसी बहजोई भेजा, जहां से जिला अस्पताल और बाद में दिल्ली एम्स रेफर किया गया।
प्रेस नोट में पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा "बेटी से छेड़छाड़ से आहत पिता ने खुद को आग लगाई" वाला दावा पूरी तरह भ्रामक है। पुलिस के अनुसार मामला छेड़छाड़ से संबंधित नहीं था। मृतक मोरध्वज की कोई पुत्री नहीं थी, बल्कि उसका ढाई वर्ष का एक पुत्र है। जांच में भी छेड़छाड़ जैसी कोई बात सामने नहीं आई। पुलिस का कहना है कि यह मामला दोनों पक्षों के बीच आपसी कहासुनी और विवाद का था, जिसमें समझौता भी हो गया था। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मोरध्वज ने अपने पक्ष के लोगों पर मुकदमा दर्ज न होने से आहत होकर यह कदम उठाया था। मामले में तथ्यों के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
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