क्या देश में लगेगा लॉकडाउन? पीम मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग कर क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पश्चिम एशिया के वर्तमान घटनाक्रमों और वहां चल रहे सैन्य संघर्ष के भारत

Mar 28, 2026 - 13:42
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क्या देश में लगेगा लॉकडाउन? पीम मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग कर क्या कहा?
क्या देश में लगेगा लॉकडाउन? पीम मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग कर क्या कहा?
  • प्रधानमंत्री मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग: पश्चिम एशिया संकट पर रणनीतिक समीक्षा, राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश
  • वैश्विक युद्ध के खतरों के बीच भारत की 'कवच' रणनीति: राज्यों के सुझावों की सराहना, सामूहिक प्रयासों से संकट से उबरने का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पश्चिम एशिया के वर्तमान घटनाक्रमों और वहां चल रहे सैन्य संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने बैठक की शुरुआत में ही साफ कर दिया कि दुनिया के एक महत्वपूर्ण हिस्से में जारी तनाव से भारत अछूता नहीं रह सकता, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के संदर्भ में। उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा साझा किए गए जमीनी फीडबैक और सुझावों को अत्यंत मूल्यवान बताया। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन इनपुट्स के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बदलते वैश्विक परिवेश को प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर सकेंगी और राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करेंगी।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने देशवासियों और राज्य सरकारों को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ा आश्वासन दिया कि देश में किसी भी प्रकार का लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही पाबंदियों और तालाबंदी की अफवाहों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखना प्राथमिकता है। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने राज्यों में कानून-व्यवस्था बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि जनता के बीच किसी भी प्रकार का भय न फैले। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अतीत में भी कई वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और इस बार भी हम अपनी सामूहिक शक्ति और सूझबूझ से इस परिस्थिति से विजयी होकर बाहर निकलेंगे।

आर्थिक मोर्चे पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्यों को अपनी 'सप्लाई चेन' यानी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और सुचारू बनाने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव के कारण ईंधन की कीमतों और परिवहन लागत में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिसका सीधा असर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इसे रोकने के लिए राज्यों को भंडारण सुविधाओं की निगरानी करने और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अनाज, दवाओं और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना राज्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच एक समर्पित 'कोऑर्डिनेशन डेस्क' स्थापित करने का भी सुझाव दिया जो आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को रियल-टाइम में दूर कर सके।

इनसेट: ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों पर नजर भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। वर्तमान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में उछाल की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उपयोग करने पर विचार कर रही है। साथ ही, युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लाखों भारतीय कामगारों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित प्रत्यावर्तन के लिए विदेश मंत्रालय ने नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं।

प्रधानमंत्री ने वर्तमान डिजिटल युग में गलत सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने मुख्यमंत्रियों को आगाह किया कि विदेशी ताकतों या शरारती तत्वों द्वारा पैनिक यानी भगदड़ की स्थिति पैदा करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि पैनिक को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका सही और भरोसेमंद जानकारी का समय पर प्रसार करना है। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्य सरकारें आधिकारिक बुलेटिन जारी करें और सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखें ताकि समुदायों के बीच अविश्वास पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। पारदर्शिता और स्पष्ट संवाद ही जनता के भरोसे को बनाए रखने की कुंजी है।

भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने 'सतर्कता' और 'तैयारी' को अपना मूल मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में मिलकर काम करने का है। भारत की विदेश नीति वर्तमान में शांति और संवाद पर केंद्रित है, लेकिन सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने राज्यों से अपनी साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा बढ़ाने को कहा, क्योंकि युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह हाइब्रिड वॉरफेयर के रूप में डिजिटल स्पेस को भी प्रभावित कर सकता है। प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ हर कदम पर खड़ी है और संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी।

बैठक में पश्चिम एशिया से आने वाले भारतीय प्रवासियों के पुनर्वास और उनके परिवारों की देखभाल के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। केरल, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों, जहाँ के लोग बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में काम करते हैं, के मुख्यमंत्रियों ने विशिष्ट चिंताओं को रखा। प्रधानमंत्री ने इन राज्यों को विशेष सहायता का आश्वासन दिया और कहा कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो सरकार 'ऑपरेशन गंगा' या 'वंदे भारत' जैसी बड़ी निकासी योजनाओं के लिए भी तैयार है। उन्होंने राज्यों से अनुरोध किया कि वे विदेशों में फंसे अपने नागरिकों का एक अद्यतन डेटाबेस तैयार रखें ताकि संकट के समय संचार आसान हो सके।

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