एथेनॉल के बाई प्रोडक्ट से बन रहा पशु आहार: मक्का व चावल के अवशेष से प्रतिदिन 5 से 6 कुंतल पशु आहार उत्पादन की तैयारी। 

Gorakhpur News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘अनुसंधान और विकास’ पर जोर देने के मंत्र को अपनाकर गोरखपुर के गीडा क्षेत्र में स्थित इंडिया ग्लाइकॉल्स लिमिटेड...

Jul 17, 2025 - 19:32
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एथेनॉल के बाई प्रोडक्ट से बन रहा पशु आहार: मक्का व चावल के अवशेष से प्रतिदिन 5 से 6 कुंतल पशु आहार उत्पादन की तैयारी। 
प्रोडक्ट से बन रहा पशु आहार: मक्का व चावल के अवशेष से प्रतिदिन 5 से 6 कुंतल पशु आहार उत्पादन की तैयारी। 
  • हाई प्रोटीन पशु आहार को लेकर पशुपालकों के फीडबैक से गीडा स्थित आईजीएल प्रबंधन उत्साहित
  • आईजीएल प्रबंधन ने कहा-काम आ रहा सीएम योगी का ‘अनुसंधान और विकास’ पर जोर देने का मंत्र

Gorakhpur News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘अनुसंधान और विकास’ पर जोर देने के मंत्र को अपनाकर गोरखपुर के गीडा क्षेत्र में स्थित इंडिया ग्लाइकॉल्स लिमिटेड (आईजीएल) ने आम के आम गुठलियों के दाम वाली कहावत को चरितार्थ किया है। अनाज से एथेनॉल बना रही आईजीएल ने अब इसके बाई प्रोडक्ट (सह उत्पाद) से  प्रोटीन से भरपूर पशु आहार का उत्पादन शुरू किया है। इसका ट्रायल सफल रहा है। अब कंपनी इसके वाणिज्यिक उत्पादन से जुड़ने जा रही है। 

आईजीएल गीडा क्षेत्र में स्थित बड़े उद्योगों में से एक है। इसके डिस्टलरी प्लांट में ग्रेन बेस्ड (अनाज आधारित) एथेनॉल भी बनता है। एथेनॉल बनाने के कंपनी मक्का और चावल का इस्तेमाल करती है। एथेनॉल बनाने के बाद बचे अनाज के अवशेष से आईजीएल ने पशु आहार बनाना शुरू किया है। आईजीएल के बिजनेस हेड एसके शुक्ला बताते हैं कि बाई प्रोडक्ट में कुछ और पोषक तत्व मिलाकर इसका ट्रायल शुरू किया। यह डीडीजीएस (डिस्टिलर्स ड्राईड ग्रेन्स विथ सॉल्यूबल्स) पशु आहार है। इसमें प्रोटीन और फाइबर प्रचुर मात्रा में है। आईजीएल ने तैयार पशु आहार को क्षेत्र के कई पशुपालकों को प्रयोग के तौर पर दिया गया।

पशुपालकों से प्राप्त फीडबैक के अनुसार पंद्रह दिन लगातार यह पशु आहार देने के बाद प्रति दुधारू पशु दो लीटर अधिक दूध प्राप्त होने लगा। बिजनेस हेड के अनुसार अब कंपनी ने ‘प्रोटीजीएस’ ब्रांड से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रही है। शुरुआती चरण में प्रतिदिन 5 से 6 कुंतल उत्पादन किया जाएगा है। अभी पचास किलो की पैकिंग में पशु आहार उपलब्ध कराया जाएगा और इसके बाद यह 25 और 5 किलो के पैक में भी उपलब्ध होगा। एसके शुक्ला का मानना है कि उद्यमिता क्षेत्र में मुख्यमंत्री की अनुसंधान और विकास की अपील काफी काम आ रही है। एथेनॉल के बाई प्रोडक्ट से पशु आहार का उत्पादन होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

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