Lucknow: देशी गायों के लिए बड़ी पहल: वैक्सीन, दवा और उन्नत नस्ल पर फोकस।

उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि देशी गाय का दूध अमृत है। गौपालक और किसान गायों के दूध देना बंद करने पर इधर-उधर

Feb 3, 2026 - 22:14
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Lucknow: देशी गायों के लिए बड़ी पहल: वैक्सीन, दवा और उन्नत नस्ल पर फोकस।
देशी गायों के लिए बड़ी पहल: वैक्सीन, दवा और उन्नत नस्ल पर फोकस।
  • प्रदेश के सभी ब्लाकों पर पशुओं के लिए पशुधन औषधि केन्द्र खोले जायेंगे
  • पशुधन औषधि केन्द्रों पर एथनोमेडिसिन भी रहेगी उपलब्ध
  • गोवंश व अन्य पशुओं के उपचार हेतु पीपीपी मोड पर वेटनरी और पैरावेटनरी सेवाएं शुरू कराई जायेंगी
  • पशुओं की जांच हेतु पैथालॉजी और  पॉलीक्लिनिक केन्द्र की स्थापना होगी
  • चारा उगाने के लिए किसानों को चारे का बीज फ्री मिलेगा
  • पशुपालकों को अनुदानित योजनाओं हेतु बजट को वर्ष 2021-22 में 6.02 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में  22.45 करोड़ रुपये किया गया
  • पशुधन क्षेत्र का राज्य के प्राथमिक सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान- धर्मपाल सिंह

उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि देशी गाय का दूध अमृत है। गौपालक और किसान गायों के दूध देना बंद करने पर इधर-उधर न छोड़ें। राज्य सरकार द्वारा गायों के उन्नत नस्ल सुधार कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है। संक्रामक रोगों पर नियंत्रण हेतु वैक्सीन और औषधियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रदेश के सभी ब्लाकों पर पशुओं के लिए पशुधन औषधि केन्द्र खोले जायेंगे। इन औषधि केन्द्रों पर एथनोमेडिसिन की उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जायेगी। 

श्री सिंह आज विधान भवन स्थित तिलक हाल में प्रेस प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गोवंश व अन्य पशुओं के उपचार हेतु पीपीपी मोड पर वेटनरी और पैरावेटनरी सेवाएं शुरू कराई जायेंगी। पशुओं की जांच हेतु पैथालॉजी केन्द्र खोले जायेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए नई चारा नीति लागू की गई है, इसके अंतर्गत किसानों को चारे का बीज फ्री दिया जायेगा। 

श्री सिंह ने कहा उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि एवं पशुपालन पर आधारित हैं। राज्य की लगभग 68 प्रतिशत जनसंख्या जीविकोपार्जन हेतु कृषि एवं पशुपालन कार्यों पर निर्भर है। पशुपालन विभाग पारम्परिक विकास के साथ-साथ ’विकसित उत्तर प्रदेश-समर्थ उत्तर प्रदेश 2047“ की दीर्घकालिक संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुधन क्षेत्र राज्य के प्राथमिक सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है। प्रदेश में पशुजन्य पदार्थों का सकल मूल्यवर्धन वर्ष 2017-18 में 0.99 लाख करोड़ था, जो बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है। पशुपालन क्षेत्र के कार्यों में सकल मूल्यवर्धन में वर्ष 2017-18 के सापेक्ष वर्ष 2024-25 के अनुमान में 8.2 प्रतिशत वृद्धि दर के साथ विकास परिलक्षित हुआ है।

श्री सिंह ने कहा कि 20वीं पशुगणना 2019 के अनुसार देश में उत्तर प्रदेश विशाल पशु सम्पदा से अच्छादित राज्य है, जिसमें 190.20 लाख गोवंश, 330.17 लाख महिषवंश, 9.85 लाख भेड़, 144.80 लाख बकरी एवं 4.09 सूकर हैं। पशुपालकों के आर्थिक उत्थान एवं बेहतर जीविकोपार्जन के लिए पशुपालन से सम्बन्धित योजनाओं हेतु बजट में वर्ष 2017-18 में स्वीकृत 137423. 53 लाख रुपए के सापेक्ष उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए वर्ष 2024-25 में 411529.86 लाख रुपये स्वीकृत (लगभग 3 गुना की वृद्धि) किये गयें हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का देश के दुग्ध उत्पादन में 15.66 प्रतिशत का योगदान है तथा उत्पादन की दृष्टि से देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश का दुग्ध उत्पादन वर्ष 2017-18 में 290.52 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 388. 15 लाख मीट्रिक टन (33 प्रतिशत की वृद्धि) हो गया है। वर्ष 2017-18 में अंडा उत्पादन 244 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 611 करोड़ हो गया जो अपेक्षाकृत 367 करोड़ अधिक (लगभग 2.5 गुना की वृद्धि) है।

श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2025-26 हेतु दुग्ध उत्पादन के लिए 447.83 लाख मीट्रिक टन, अंडा उत्पादन-7980.52 मिलियन एवं ऊन उत्पादन 8.49 लाख किलोग्राम का लक्ष्य रखा गया है। अंडा उत्पादन वृद्धि दर वर्ष 2016-17 के 2.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 4.1 प्रतिशत हो गया है तथा आगामी पाँच वर्षों में इसे बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। नस्ल सुधार कार्यक्रम के फलस्वरूप वर्ष 2017-18 में विदेशी संकर एवं देसी अवर्णित गायों की दुग्ध उत्पादकता क्रमशः 7.24 तथा 3.02 किलोग्राम प्रतिदिन / पशु से वर्ष 2024-25 में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 9.16 तथा 4.18 किलोग्राम प्रतिदिन / पशु हो गयी है, जो राष्ट्रीय औसत 9.05 तथा 3.86 किलोग्राम प्रतिदिन / पशु से अधिक है। वर्ष 2017-18 में भैसों की दुग्ध उत्पादकता 4.49 किलोग्राम प्रतिदिन / पशु से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 5.83 किलोग्राम दिन पशु हो गयी है।

श्री सिंह ने कहा कि ऊन उत्पादन प्रदेश में बढ़ाने के लिए भेड़ बाहुल्य जनपदों में से 37 जनपदों को चिन्हांकित कर पायलेट प्रोजेक्ट के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में  395.40 लाख रुपये का व्यय किया गया है तथा पशुपालकों को वैज्ञानिक विधि से भेड़ एवं बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पशुधन मृत्यु दर को कम करने और उत्पादकता में सुधार करने के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं और रोग निगरानी को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रदेश में 520 मोबाईल वेटनरी यूनिट-टोल फ्री नं0-1962 के माध्यम से पशुपालको के द्वार पर सुविधा दी जा रही है, साथ ही पशुधन बीमा योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में वर्ष 2019 में प्रथम बार निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति का प्रख्यापन कर वर्ष 2018-19 में 99.12 करोड़ रुपये निर्गत करते हुये गोवंश आश्रय एवं सुरक्षा का कार्य किया गया, जिसे वर्ष 2024-25 में बढ़ाकर 2454.58 करोड़ रुपये कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 439 वृहद गो सरंक्षण केंद्रो सहित कुल 7497 गो आश्रय स्थलों में 12,38,847 गोवंश वर्तमान में संरक्षित हैं। साथ ही माननीय मुख्यमंत्री सहभागिता योजना एवं पोषण मिशन अंतर्गत 1,13,631 पशुपालको को अद्यतन 1,81,418 गोवंश सुर्पुद किये गये। संरक्षित गोवंशों के भरण पोषण हेतु धनराशि  30 रुपये को बढ़ा कर 50 रुपये प्रतिपशु प्रतिदिन प्रतिगोवंश कर दिया गया हैं।

श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के पशुपालकों को अनुदानित योजनाओं के माध्यम से लाभ दिये जाने के लिए वर्ष 2021-22 में 6.02 करोड़ रुपये को बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में  22.45 करोड़ रुपये (लगभग 3.5 गुना की वृद्धि) कर दिया गया हैं। लाभार्थीपरक योजनाओं यथा बकरी, भेड़, सूकर एवं बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना से पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी एवं उनके पोषण स्तर में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग पशुस्वास्थ, सुरक्षा, रोगों के उन्मूलन, पशुपालकों के आर्थिक बेहतरी एवं राष्ट्र की जी०डी०पी० में महत्वपूर्ण योगदान हेतु कृत संकल्पित हैं।

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