Ayodhya : अयोध्या में सर्दी की ठिठुरन बढ़ी, नगर निगम के अलाव सिर्फ कोरे दावों तक ही सीमित

सत्ता पक्ष के पार्षद भी नगर निगम पर सवाल उठा रहे हैं। महापौर से जब इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वे बाहर हैं और लौटकर व्यवस्था देखेंगे। लेकिन लोग पूछ रहे

Dec 20, 2025 - 00:11
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Ayodhya : अयोध्या में सर्दी की ठिठुरन बढ़ी, नगर निगम के अलाव सिर्फ कोरे दावों तक ही सीमित
प्रतीकात्मक चित्र

अयोध्या। दुनिया भर में आस्था का केंद्र मानी जाने वाली इस रामनगरी में इन दिनों सर्दी का कहर छाया हुआ है। गरीब लोग, बुजुर्ग और सड़कों पर चलने वाले राहगीर रात की ठंड में अलाव की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन नगर निगम के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। हकीकत में शहर के कई हिस्सों में अलाव की व्यवस्था न के बराबर है, जिससे लोग परेशान हैं। सत्ता पक्ष के पार्षद प्रतिनिधि भी नगर निगम पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जो पूरे सिस्टम की पोल खोलते हैं।

मणिराम दास छावनी वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि रिशु पांडे ने बताया कि उनके इलाके में 16 जगहों पर अलाव जलाने की योजना बनी है, लेकिन जमीन पर एक भी जगह अलाव नहीं जल रहा। यह इलाका महापौर के आवास और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के स्थान के करीब है। अगर यहां ऐसी हालत है, तो शहर के अन्य हिस्सों की क्या स्थिति होगी, यह सोचने वाली बात है। इसी तरह हनुमान कुंड वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि अभय श्रीवास्तव ने कहा कि अलाव की पूरी व्यवस्था सिर्फ दस्तावेजों में है। उनके वार्ड में भी 16 में से एक भी जगह पर अलाव नहीं चल रहा। इससे साफ है कि नगर निगम ने असल में लकड़ी की बजाय सिर्फ रिपोर्टें तैयार की हैं।

नगर निगम के एक अधिकारी ने खुलासा किया कि अलाव जलाने के लिए अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। नगर आयुक्त के विशेष अधिकार से कुछ चुनिंदा जगहों पर ही लकड़ी जलाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब टेंडर नहीं हुआ, तो 45 जगहों पर अलाव जलने का दावा कैसे किया जा रहा है? नगर निगम की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि शहर के 60 वार्डों में 45 जगहों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, जिनमें जिला अस्पताल, राम अस्पताल, फतेहगंज चौराहा, लता चौक, राम जन्मभूमि, राम की पैड़ी, सभी अंडरपास, टेढ़ी बाजार चौराहा, सहादतगंज हनुमानगढ़ी, मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर, गांधी आश्रम, साहबगंज, डीएम आवास चौराहा, बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, सब्जी मंडी, सहादतगंज चुंगी, उदासीन आश्रम रानोपाली, कनक भवन टकसाल, रंगमहल बैरियर और गोकुल भवन जैसी जगहें शामिल हैं। साथ ही सात जगहों पर रैन बसेरा भी शुरू किए गए हैं, जैसे गांधी पार्क रोडवेज, बस स्टैंड कैंट, रेलवे स्टेशन, साकेत अंडरपास निषादराज, क्वीन हो पार्क और राम कथा पार्क। महापौर गिरीश पति त्रिपाठी के निर्देश पर नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया, और अपर नगर आयुक्त नागेंद्र नाथ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभिन्न जोनल अधिकारियों जैसे अशोक गुप्त, विनय प्रताप सिंह और सुभाष त्रिपाठी को इलाकों की देखभाल का काम दिया गया है।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के प्रमुख चौराहों पर अब तक अलाव नहीं जले हैं, जिससे राहगीरों, यात्रियों और गरीबों को मुश्किल हो रही है। ठंड बढ़ने से तापमान लगातार गिर रहा है, अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से काफी कम है। रात में तापमान 8 डिग्री से नीचे चला जाता है, और घना कोहरा व गलन लोगों को घरों में कैद कर रही है। सरयू नदी में स्नान करने वाले संत, रामलला के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु, स्कूली बच्चे और रात की ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अस्पतालों में मरीजों को पहुंचने में भी दिक्कत हो रही है। मौसम विभाग ने शीतलहर और कोहरे की चेतावनी जारी की है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

सत्ता पक्ष के पार्षद भी नगर निगम पर सवाल उठा रहे हैं। महापौर से जब इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वे बाहर हैं और लौटकर व्यवस्था देखेंगे। लेकिन लोग पूछ रहे हैं कि क्या ठंड उनके लौटने का इंतजार करेगी? क्या सिर्फ देखने से अलाव जल जाएंगे? हालात इतने खराब हैं कि विपक्षी दल जैसे समाजवादी पार्टी के नेता खुद अलाव जला रहे हैं, जैसे हासापुर चौराहे पर दिव्यांग पंडित समरजीत ने गरीबों के लिए अलाव की व्यवस्था की। इससे साफ है कि सरकारी व्यवस्था की कमी को लोग खुद पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।

यह सिर्फ प्रशासन की लापरवाही नहीं है, बल्कि ठंड से जूझ रहे गरीबों की तकलीफ पर एक तरह का मजाक है। लोग अब पूछ रहे हैं कि अलाव वाकई जल रहे हैं या सिर्फ रिपोर्टें गर्म की जा रही हैं? रामनगरी में ठंड से कांपते लोग अब किससे उम्मीद करें - कागजों से या असल जमीन से? अगर ऐसी ही स्थिति रही, तो अयोध्या में सर्दी की बजाय नगर निगम की उदासीनता सबसे ज्यादा लोगों को सताएगी।

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