Lucknow : नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

सहारनपुर के शाकुम्भरी देवी मंदिर में भी नवरात्रि के दूसरे दिन शाम तक 80 हजार से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं। वहीं बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिर में करीब 2.5 लाख भक्तों

Mar 20, 2026 - 21:55
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Lucknow : नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
Lucknow : नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

  • नवरात्रि के दूसरे दिन मां विंध्यवासिनी, मां पाटेश्वरी देवी, मां विशालाक्षी के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, युवा भक्तों की सबसे अधिक रही संख्या
  • विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, मां शाकुम्भरी देवी, मां कात्यायनी और मां पाटेश्वरी देवी के धामों में लगा रहा भक्तों का तांता

लखनऊ। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी देवी मंदिरों में आस्था का अद्भुत जनसैलाब देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के दूसरे दिन भी शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लाखों की संख्यां में भक्तों ने मां भगवती का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, सहारनपुर, देवीपाटन और वृंदावन सहित कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सुबह से ही देखी गईं। श्रद्धालुओं के सैलाब में युवाओं की संख्या सबसे ज़्यादा रही, उनके जोश और उत्साह भरे “जय माता दी” के जयकारों से मंदिरों परिसर पूरी तरह भक्तिमय नजर आये। विशेष अवसर के चलते नगर निगमों और प्रशासन द्वारा स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को मां भगवती के सुगम दर्शन सुलभ हो सकें। 

नवरात्रि के दूसरे दिन मीरजापुर स्थित माँ विंध्यवासिनी धाम में लोगों की आस्था चरम पर रही। सुबह से लेकर शाम तक यहां 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबारों में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। मीरजापुर सिटी मजिस्ट्रेट और मेला प्रभारी अविनाश कुमार ने बताया कि प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की संख्या सुबह ही 2 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी। मां विंध्यवासिनी के धाम में नवरात्रि के अवसर पर पूरे दिन और रात दर्शन-पूजन का क्रम चल रहा है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में पेयजल, छाया, कूलर के साथ एलईडी स्क्रीन की भी  व्यवस्था की गई है, जिससे कतार में लगे भक्तों को भी मां के दर्शन का लाभ मिल सके। साथ ही न केवल मंदिर परिसर, बल्कि विंध्याचल धाम के आस-पास के क्षेत्रों व अन्य मंदिरों में भी सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे दर्शन व्यवस्था सुगम बनी रही।

इसी तरह प्रयागराज स्थित मां ललिता देवी शक्तिपीठ में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। पिछले दो दिनों में यहां लगभग 2.5 से 3 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसके साथ ही प्रयागराज के अन्य प्रसिद्ध देवी धाम अलोप शंकरी और कल्याणी देवी मंदिर में भी  की भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में वाराणसी के प्रसिद्ध मां विशालाक्षी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गई। सामान्य दिनों में जहां 4 से 5 हजार लोग दर्शन करने आते हैं, वहीं नवरात्रि में यह संख्या बढ़कर 7 से 8 हजार तक पहुंच गई है। यहां विशेष रूप से दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। इसी क्रम में नगर निगम और प्रशासन द्वारा यहां स्वच्छता और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। 

सहारनपुर के शाकुम्भरी देवी मंदिर में भी नवरात्रि के दूसरे दिन शाम तक 80 हजार से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं। वहीं बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिर में करीब 2.5 लाख भक्तों ने दर्शन किए। इन सभी स्थलों पर भक्तों में खासा उत्साह देखा गया, जिसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। वहीं कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन भी नवरात्रि के अवसर पर शक्ति की भक्ति में डूबा नजर आ रहा है। वृंदावन स्थित शक्ति पीठ मां कात्यायनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शुरुआती दो दिनों में ही यहां 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने माँ के दर्शन किए। मंदिर में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।

नवरात्रि के अवसर पर प्रदेश के मंदिरों में उमड़ी इस भारी भीड़ के बीच प्रशासन द्वारा सुगम दर्शन, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। नगर निगम की टीमें लगातार सफाई व्यवस्था में जुटी हैं, जबकि महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर प्रमुख स्थल पर सीसीटीवी कैमरे और भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदेश में नवरात्रि के दौरान उमड़ा यह जनसैलाब न केवल आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर चल रही है, उसे देखते हुए नई पीढ़ी में भी अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था और विश्वास बढ़ा है।

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