Lucknow : राज्य स्तरीय वर्चुअल बैठक में अधिसूचित क्षेत्रों में अचल संपत्ति अंतरण विलेखों पर स्टाम्प शुल्क के पारदर्शी उपयोग पर विशेष जोर
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग, रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि शासनादेश के अंतर्गत 02 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क
02 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क के समुचित उपयोग और उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर प्रस्तुत करने के लिए स्टांप तथा पंजीयन मंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय वर्चुअल बैठक आयोजित
लखनऊ : राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग, रवीन्द्र जायसवाल की अध्यक्षता में आज उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस (वीसी) बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निकायों के अधिसूचित क्षेत्रों में स्थित अचल संपत्ति के अंतरण विलेखों पर संग्रहित 02 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क की धनराशि के समयानुकूल उपयोग तथा संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्रों के समय पर प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करना था।
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग, रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि शासनादेश के अंतर्गत 02 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क का भुगतान त्रैमासिक आधार पर चार किश्तों में निर्धारित किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम व द्वितीय त्रैमास हेतु संबंधित संस्थाओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान किया गया। तथापि अधिकांश संस्थाओं द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण आगामी किश्तों का भुगतान प्रभावी रूप से बाधित हो रहा है। वर्तमान में उपयोगिता प्रमाण पत्र के अभाव में कुल ₹195.05 करोड़ की धनराशि भुगतान प्रक्रियाधीन है। साथ ही, वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु प्राविधानित कुल धनराशि ₹3333.84 करोड़ में से तृतीय व चतुर्थ त्रैमास हेतु अनेक संस्थाओं को भुगतान प्रक्रियाधीन है।
मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 02 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क की धनराशि का उचित एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने के साथ-साथ संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र नियत समय-सीमा में प्रस्तुत किए जाएं, ताकि वित्तीय प्रावधानों का संपूर्ण लाभ प्राप्त किया जा सके।
मंत्री ने बैठक में यह सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया कि प्रत्येक भुगतान प्रक्रिया शासनादेशों के अनुरूप और पूर्ण पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित की जाए। इस वीसी बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के सार्वजनिक कोष का उचित उपयोग सुनिश्चित कर शासन की जवाबदेही को सुदृढ़ बनाना एवं विकासात्मक गतिविधियों के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना रहा। सभी सम्बद्ध अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि आगामी निर्धारित समयसीमा में उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें, ताकि धनराशि का वांछित लक्ष्य हेतु उपयोग सुनिश्चित हो सके।
बैठक में प्रमुख सचिव अमित कुमार गुप्ता, महानिरीक्षक निबन्धन, नेहा शर्मा, समस्त जिलाधिकारी, आयुक्त, निदेशक, नगर आयुक्त, उपाध्यक्ष, सीईओ, सचिव एवं अधिशासी अधिकारीगण उपस्थित थे।
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