Lucknow : फर्जी दस्तावेजों से शिक्षक बने 22 लोगों की सेवा समाप्त, FIR और वेतन वसूली के आदेश

शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) के निर्देश पर 2014 में आजमगढ़ मंडल में सहायक अध्यापक (पुरुष और महिला) के रिक्त पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। चय

Aug 21, 2025 - 00:45
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Lucknow : फर्जी दस्तावेजों से शिक्षक बने 22 लोगों की सेवा समाप्त, FIR और वेतन वसूली के आदेश
फर्जी दस्तावेजों से शिक्षक बने 22 लोगों की सेवा समाप्त, FIR और वेतन वसूली के आदेश

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ मंडल में शिक्षा विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले 22 शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इन शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ-साथ उनके द्वारा लिए गए वेतन की वसूली का आदेश दिया गया है। यह मामला 2014 की सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा है, जिसमें मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की गई थीं। जांच में पाया गया कि इन शिक्षकों ने जाली मार्कशीट और प्रमाणपत्रों का उपयोग कर नौकरी हासिल की थी। यह कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) के निर्देश पर 2014 में आजमगढ़ मंडल में सहायक अध्यापक (पुरुष और महिला) के रिक्त पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की शैक्षिक योग्यता, जैसे हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और प्रशिक्षण अर्हता, के आधार पर मेरिट तैयार की गई थी। नियुक्ति के बाद काउंसलिंग के दौरान चुने गए अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की गहन जांच की गई। इस जांच में 22 शिक्षकों विनय कुमार यादव, पवन कुमार, अतुल प्रकाश वर्मा, अंकित वर्मा, लक्ष्मी देवी, विवेक सिंह, राज रजत वर्मा, रोहिणी शर्मा, अमित गिरि, रूचि सिंघल, प्रियंका, नूतन सिंह, दीपा सिंह, अनीता रानी, प्रीति सिंह, नंदिनी, आनंद सोनी, गीता, सलोनी अरोरा, किरन मौर्या, रूमन विश्वकर्मा, और सरिता मौर्या के मार्कशीट और प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। ये दस्तावेज मुख्य रूप से हापुड़ की मोनार्ड यूनिवर्सिटी और वाराणसी की संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी से होने का दावा करते थे, लेकिन सत्यापन में इनमें भारी अनियमितताएं सामने आईं।

विभाग ने इन शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं और जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश दिया कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 466 (दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही, इन शिक्षकों द्वारा 2016 से अब तक लिए गए लाखों रुपये के वेतन की वसूली का आदेश भी दिया गया। जांच में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसने दस्तावेजों की गहन जांच कर इस फर्जीवाड़े को उजागर किया। अधिकारियों ने बताया कि यह धोखाधड़ी इतने बड़े पैमाने पर थी कि इसे पकड़ने में लगभग एक दशक लग गया, जिससे भर्ती प्रक्रिया की कमियों पर सवाल उठे हैं।

उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। उदाहरण के लिए, 2021 में बलरामपुर में 92 शिक्षकों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के लिए मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी तरह, 2020 में अनामिका शुक्ला नाम की एक शिक्षिका के दस्तावेजों का उपयोग 25 स्कूलों में एक करोड़ रुपये से अधिक वेतन लेने के लिए किया गया था। आजमगढ़ में ही हाल ही में समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में 25 फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आया था, जहां बिना अनुमोदन के नियुक्तियां की गई थीं। इन घटनाओं ने शिक्षा विभाग में भर्ती प्रक्रिया में सुधार की जरूरत को रेखांकित किया है।

एसटीएफ और शिक्षा विभाग ने इस मामले में डिजिटल सत्यापन प्रणाली की मदद ली। प्रेरणा डिजिटल फ्रेमवर्क जैसे सिस्टम ने एक ही दस्तावेज के कई जगह उपयोग को पकड़ने में सहायता की। पहले, दस्तावेजों का सत्यापन सालों तक लंबित रहता था, जिसका फायदा जालसाज उठाते थे। अब आधार कार्ड आधारित सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड्स ने इस प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया है। अधिकारियों का कहना है कि अगर पूरे राज्य में गहन जांच हो, तो ऐसे और भी मामले सामने आ सकते हैं। एसटीएफ का अनुमान है कि हजारों फर्जी शिक्षक अभी भी सरकारी स्कूलों में काम कर रहे हो सकते हैं।

कुछ बर्खास्त शिक्षकों ने अपनी सेवा समाप्ति के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिससे जांच प्रक्रिया में कुछ देरी हो सकती है। हालांकि, शिक्षा विभाग और एसटीएफ इस तरह की धोखाधड़ी के खिलाफ सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी करने वालों को न केवल बर्खास्त किया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी होगी।

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