Lucknow : गेहूं की फसल में पीलापन आने पर समय रहते उपचार जरूरी
गंधक की कमी से पीलापन हो तो सिंचाई से पहले 100 किलो जिप्सम या घुलनशील गंधक डालें। लौह तत्व की कमी में ऊपरी पत्तियां कागजी सफेद या हल्की पीली हो जाती हैं।
उत्तर प्रदेश में गेहूं की पैदावार सबसे अधिक होती है। अच्छी फसल के लिए पीलापन की समस्या को जल्दी दूर करना जरूरी है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र सिंह चौहान के अनुसार, गेहूं में पीलापन मुख्य रूप से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी, पानी की अधिकता, धूप की कमी, ज्यादा सर्दी, दीमक का हमला या खरपतवार नाशक दवाओं का गलत इस्तेमाल से होता है। नाइट्रोजन की कमी में नए पत्ते हरे रहते हैं, लेकिन पुराने पत्ते पीले पड़ जाते हैं। इसे दूर करने के लिए खड़ी फसल में 5-6 किलो यूरिया को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। अगर जिंक की कमी भी हो तो घोल में 1 किलो जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) मिला लें।
गंधक की कमी से पीलापन हो तो सिंचाई से पहले 100 किलो जिप्सम या घुलनशील गंधक डालें। लौह तत्व की कमी में ऊपरी पत्तियां कागजी सफेद या हल्की पीली हो जाती हैं। इसे ठीक करने के लिए 1 किलो फेरस सल्फेट और 4 किलो यूरिया को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। कई दिनों तक कोहरा या बादल रहने से धूप न मिलने पर पीलापन आता है, जो मौसम साफ होने पर खुद ठीक हो जाता है। चिकनी या दोमट मिट्टी में ज्यादा सिंचाई या बारिश से पानी भरने पर भी पीलापन होता है। ऐसे में खेत से पानी निकालें और हल्की सिंचाई करें। पीलापन ज्यादा हो तो 3 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव फायदेमंद है।
खरपतवार नाशक दवाओं का गलत इस्तेमाल से पीलापन आए तो खाली पानी का 2-3 बार छिड़काव करें। दीमक या सूत्रकृमि जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इनकी रोकथाम के लिए सिफारिशित कीटनाशक मिट्टी में डालें। पीला रतुआ रोग में पत्तियों पर पीले फफोले कतारों में बनते हैं। इसे रोकने के लिए 200 मिलीलीटर प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। पीलापन रोकने के लिए हमेशा गली-सड़ी गोबर की खाद डालें। कच्ची गोबर खाद से भी पीलापन आ सकता है, ऐसे में उचित मात्रा में नाइट्रोजन उर्वरक डालें। समय पर उपचार से फसल हरी-भरी रहेगी और पैदावार अच्छी मिलेगी।
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