ममता बनर्जी पर ओवैसी का तीखा प्रहार, कहा- 'पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के साथ जानवरों जैसा सलूक कर रही है तृणमूल सरकार'।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण का दौर शुरू हो गया है, जहाँ एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन

Apr 14, 2026 - 14:25
 0  27
ममता बनर्जी पर ओवैसी का तीखा प्रहार, कहा- 'पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के साथ जानवरों जैसा सलूक कर रही है तृणमूल सरकार'।
ममता बनर्जी पर ओवैसी का तीखा प्रहार, कहा- 'पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के साथ जानवरों जैसा सलूक कर रही है तृणमूल सरकार'।
  • सियासी घमासान: असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल की मुख्यमंत्री को घेरा, अल्पसंख्यकों की स्थिति पर उठाए बेहद गंभीर सवाल
  • वोट बैंक की राजनीति या जमीनी हकीकत? ओवैसी के 'जानवरों जैसा बर्ताव' वाले बयान से गरमाई बंगाल की राजनीति

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण का दौर शुरू हो गया है, जहाँ एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अब तक का सबसे कड़ा हमला बोला है। ओवैसी ने तृणमूल कांग्रेस के शासन में अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया है कि राज्य सरकार मुसलमानों के साथ 'जानवरों जैसा बर्ताव' कर रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल में स्थानीय निकाय चुनावों और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर सभी दल अपनी बिसात बिछा रहे हैं। ओवैसी का यह हमला न केवल ममता बनर्जी की धर्मनिरपेक्ष छवि को चुनौती देता है, बल्कि राज्य के एक बड़े वोट बैंक के भीतर सुलग रहे असंतोष को भी स्वर देता है।

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने संबोधन के दौरान उन क्षेत्रों का विशेष रूप से जिक्र किया जहाँ मुस्लिम आबादी घनी है, लेकिन विकास के मानक अभी भी काफी नीचे हैं। उन्होंने दलील दी कि ममता बनर्जी खुद को मुसलमानों का सबसे बड़ा मसीहा बताती हैं, लेकिन असलियत में उनकी सरकार ने इस समुदाय को केवल वोट बैंक तक सीमित कर दिया है। ओवैसी का मानना है कि राज्य की जेलों में बंद मुस्लिम कैदियों की संख्या और शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में उनकी पिछड़ी स्थिति सरकार के दावों की पोल खोलती है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि जब हक मांगने की बात आती है, तो सरकार दमनकारी नीतियां अपनाती है, जो किसी भी सभ्य लोकतंत्र में नागरिकों के साथ होने वाले व्यवहार के विपरीत है।

तृणमूल कांग्रेस और एआईएमआईएम के बीच का यह वाकयुद्ध नया नहीं है, लेकिन इस बार ओवैसी के शब्दों की तल्खी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। ओवैसी ने यह भी तर्क दिया कि बंगाल में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा और प्रशासनिक उपेक्षा को 'धर्मनिरपेक्षता' के लबादें में ढका जा रहा है। उन्होंने सरकारी तंत्र पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिसिया कार्रवाई अक्सर एकतरफा होती है और समुदाय के युवाओं को निशाना बनाया जाता है। इस तरह के गंभीर आरोप ममता बनर्जी के उस दुर्ग पर चोट करते हैं, जिसे उन्होंने पिछले एक दशक में अल्पसंख्यक समर्थन के दम पर सुरक्षित रखा है। पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 27% से अधिक है, जो राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से कम से कम 100 सीटों पर हार-जीत का फैसला करने की ताकत रखते हैं। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम पिछले कुछ वर्षों से मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिसे तृणमूल कांग्रेस भाजपा को फायदा पहुँचाने वाली 'बी-टीम' करार देती रही है।

ओवैसी के इस हमले का एक अन्य पहलू बंगाल के सामाजिक-आर्थिक ढांचे से जुड़ा है। उन्होंने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट और उसके बाद के आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि आखिर क्यों इतने वर्षों के शासन के बाद भी बंगाल का मुसलमान आर्थिक रूप से कमजोर बना हुआ है। ओवैसी का आरोप है कि ममता बनर्जी केवल भाजपा का डर दिखाकर मुसलमानों का वोट हासिल करती हैं, लेकिन उनके उत्थान के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनातीं। 'जानवरों जैसा बर्ताव' वाले जुमले के पीछे उनका इशारा उस प्रशासनिक कठोरता की ओर था, जिसका सामना अक्सर गरीब और वंचित तबके के लोगों को करना पड़ता है।

इस राजनीतिक हमले के बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि ओवैसी केवल चुनाव के समय दिखाई देते हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष वोटों का ध्रुवीकरण करना है। हालांकि, ओवैसी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे किसी को चुनाव जिताने या हराने नहीं, बल्कि अपने समुदाय को उनका संवैधानिक हक दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि डर की राजनीति अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी और लोग अब विकास व सुरक्षा के नाम पर जवाबदेही मांग रहे हैं। यह बहस अब केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल के गांवों और कस्बों में चर्चा का विषय बन गई है। बंगाल की राजनीति के जानकारों का मानना है कि ओवैसी की सक्रियता ममता बनर्जी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। यदि मुस्लिम वोटों का मामूली हिस्सा भी एआईएमआईएम की ओर खिसकता है, तो इसका सीधा असर तृणमूल कांग्रेस की सीटों पर पड़ेगा। ओवैसी ने अपने भाषणों में अक्सर यह बात दोहराई है कि राज्य में अल्पसंख्यकों को केवल 'राजनीतिक बंधक' बनाकर रखा गया है। उन्होंने प्रशासन द्वारा धार्मिक आयोजनों में डाली जाने वाली बाधाओं और कुछ क्षेत्रों में लगाए गए अघोषित प्रतिबंधों को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। उनके अनुसार, सम्मान के साथ जीने का अधिकार हर नागरिक का है, जिसे बंगाल सरकार सुनिश्चित करने में विफल रही है।

Also Read- बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार, सत्ता हस्तांतरण के बीच मांझी बोले- 'नीतीश के बिना विकास की कल्पना कठिन'

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।