अयोध्या दीपोत्सव पर अखिलेश यादव का विवादास्पद बयान: दीयों और मोमबत्तियों पर इतना खर्च क्यों करना, भाजपा ने हिंदू विरोधी ठहराया। 

उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन जोरों पर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण और सांस्कृतिक उत्सवों ने शहर को वैश्विक

Oct 19, 2025 - 12:50
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अयोध्या दीपोत्सव पर अखिलेश यादव का विवादास्पद बयान: दीयों और मोमबत्तियों पर इतना खर्च क्यों करना, भाजपा ने हिंदू विरोधी ठहराया। 
अयोध्या दीपोत्सव पर अखिलेश यादव का विवादास्पद बयान: दीयों और मोमबत्तियों पर इतना खर्च क्यों करना, भाजपा ने हिंदू विरोधी ठहराया। 

उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन जोरों पर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण और सांस्कृतिक उत्सवों ने शहर को वैश्विक पहचान दी है। लेकिन इस खुशी के बीच राजनीतिक विवाद ने जोर पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीपोत्सव पर दीये और मोमबत्तियों के उपयोग और खर्च को लेकर एक टिप्पणी की, जिसने पूरे राज्य में हंगामा मचा दिया। भाजपा ने इसे हिंदू आस्था पर हमला बताते हुए कड़ी निंदा की। अखिलेश का बयान ऐसे समय आया जब अयोध्या 20 अक्टूबर को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए 26 लाख 11 हजार 101 दीये जलाने की तैयारी कर रही है। यह नौवां दीपोत्सव होगा, जो सरयू नदी के 56 घाटों पर आयोजित होगा। विवादास्पद बयान ने न केवल सांस्कृतिक आयोजन को राजनीतिक रंग दे दिया, बल्कि भाजपा और सपा के बीच पुरानी रंजिश को फिर से हवा दे दी।

18 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी के मुख्यालय पर अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नए सदस्यों के साथ बैठक की। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि इस बार अयोध्या दीपोत्सव में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के अलावा मोमबत्तियां भी जलाई जा रही हैं और दीयों की संख्या पिछले वर्षों से कम बताई जा रही है। इस पर आपकी क्या राय है। अखिलेश ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि मैं कोई सुझाव नहीं देना चाहता, लेकिन भगवान राम के नाम पर एक सुझाव जरूर दूंगा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में क्रिसमस के दौरान सभी शहर जगमगा उठते हैं और यह सिलसिला महीनों तक चलता रहता है। हमें उनसे सीखना चाहिए। दीयों और मोमबत्तियों पर इतना खर्च क्यों करना और इतना दिमाग क्यों लगाना। इस सरकार से क्या उम्मीद की जा सकती है। इसे हटा देना चाहिए। हमारी सरकार आने पर हम बहुत सुंदर रोशनी कराएंगे। अखिलेश ने आगे कहा कि सपा सरकार बनने पर दिवाली पर कुम्हारों से एक करोड़ दीये खरीदे जाएंगे, जिससे उनकी आजीविका मजबूत होगी। यह बयान एएनआई द्वारा वीडियो के जरिए वायरल हो गया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी।

अखिलेश का यह बयान अयोध्या दीपोत्सव की तैयारियों के बीच आया, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चरम पर हैं। इस बार दीपोत्सव में 21 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे, लेकिन कुछ घाटों पर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर मोमबत्तियां भी शामिल की गई हैं। आयोजन में 2100 वैदिक विद्वानों द्वारा सामूहिक राम वंदना, 1100 ड्रोनों का शो, लेजर शो और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। सरयू नदी के घाटों पर 33 हजार स्वयंसेवक तैनात हैं। पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह आयोजन त्रेता युग की अयोध्या को पुनर्जीवित करेगा। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम भी मौजूद रहेगी। पिछले वर्ष 24 लाख दीयों का रिकॉर्ड बना था, जो इस बार टूटेगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने दीयों, तेल और बातियों के लिए टेंडर जारी किए हैं। नगर निगम ने सफाई, शौचालय और सजावट की व्यवस्था की है। लेकिन अखिलेश की टिप्पणी ने इन तैयारियों पर सवाल उठा दिए। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सांस्कृतिक आयोजनों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।

भाजपा ने अखिलेश के बयान पर तुरंत पलटवार किया। राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह सनातन विरोधी तंत्र है। राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने वाली पार्टी, जो वर्षों तक अयोध्या को अंधेरे में रखती रही और राम भक्तों पर गर्व से हमला करने का दावा करती रही, अब दीपोत्सव की सजावट का विरोध कर रही है। पूनावाला ने कहा कि सपा का इतिहास हिंदू विरोधी बयानों का रहा है। उन्होंने अखिलेश पर तंज कसा कि क्रिसमस का जिक्र करके वे अपनी वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि अखिलेश हिंदू आस्था का मजाक उड़ा रहे हैं। पार्टी ने सपा को सांस्कृतिक विरासत के प्रति असंवेदनशील ठहराया। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि योगी सरकार ने अयोध्या को विश्व पटल पर स्थापित किया, जबकि सपा ने इसे उपेक्षित रखा। विवाद बढ़ने पर सपा ने सफाई दी कि अखिलेश का इरादा सकारात्मक था। उन्होंने कुम्हारों को लाभ पहुंचाने का वादा किया, जो भाजपा की नीतियों से वंचित हैं।

यह विवाद अयोध्या को लेकर सपा-भाजपा की पुरानी दुश्मनी को फिर से उभार रहा है। 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान सपा ने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसे भाजपा कभी नहीं भूलती। अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव पर राम भक्तों पर अत्याचार के आरोप लगे। 2017 में योगी सरकार बनने के बाद अयोध्या का कायापलट हुआ। राम मंदिर निर्माण, दीपोत्सव और ब्रज तीर्थ विकास परियोजना ने शहर को पर्यटन केंद्र बनाया। लेकिन सपा अक्सर भूमि घोटालों का आरोप लगाती रही। अगस्त 2024 में अखिलेश ने कहा था कि भाजपा ने गरीबों की जमीन हड़प ली। हाल ही में अयोध्या में 3800 लाइटों की चोरी पर भी उन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। दीपोत्सव 2023 में अखिलेश ने वीडियो शेयर कर दीयों का तेल इकट्ठा करते बच्चों की तस्वीर पोस्ट की, कहते हुए कि जहां गरीबी तेल लेने को मजबूर करे, वहां उत्सव धुंधला हो जाता है। भाजपा ने इसे नकारात्मक प्रचार बताया।

सोशल मीडिया पर विवाद तेज हो गया। एक्स पर AkhileshAntiHindu जैसे ट्रेंड चले। हजारों यूजर्स ने अखिलेश की आलोचना की, कहा कि दीये भारतीय संस्कृति का प्रतीक हैं, मोमबत्तियां पश्चिमी। कुछ ने समर्थन किया, कहा कि खर्च का सवाल वैध है। न्यूज18 और टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रमुखता से कवर किया। अयोध्या के कुम्हारों ने कहा कि दीपोत्सव से उनकी आय बढ़ी है। एक कुम्हार ने बताया कि पिछले वर्ष 10 लाख दीये बिके। सपा का वादा सराहनीय है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि मोमबत्तियां प्रदूषण कम करती हैं, लेकिन परंपरा का सम्मान जरूरी। दीपोत्सव में इस बार ड्रोन शो और लेजर लाइट्स होंगी, जो आधुनिकता का मिश्रण हैं।

यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले हिंदुत्व का मुद्दा फिर गरमाया। सपा को मुस्लिम वोटबैंक पर निर्भर माना जाता है, जबकि भाजपा हिंदू एकजुटता पर। अखिलेश ने पहले भी बाबरी मस्जिद विवाद पर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम है। लेकिन भाजपा इसे अलगाववादी मानती है। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या में लाखों पर्यटक पहुंचेंगे। आयोजन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। विवाद के बावजूद उत्सव जारी रहेगा। योगी ने कहा कि अयोध्या अब विश्व धरोहर है। अखिलेश का बयान राजनीतिक चालाकी का हिस्सा लगता है, लेकिन इसने सांस्कृतिक बहस छेड़ दी। क्या दीये सिर्फ परंपरा हैं या आर्थिक बोझ? सवाल विचारणीय है।

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