दिवाली-छठ पूजा पर Homecoming Rush: सूरत के उधना स्टेशन पर 12 घंटे पहले लगी 2 किमी लंबी कतारें, 16 हजार यात्रियों को पहुंचाई 8 ट्रेनों ने, दिल्ली में भीड़ का प्रवाह। 

दिवाली और छठ पूजा के त्योहारों की चमक के साथ ही देशभर में होमकमिंग का सिलसिला शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में अपने अपनों के बीच लौटने

Oct 19, 2025 - 12:55
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दिवाली-छठ पूजा पर Homecoming Rush: सूरत के उधना स्टेशन पर 12 घंटे पहले लगी 2 किमी लंबी कतारें, 16 हजार यात्रियों को पहुंचाई 8 ट्रेनों ने, दिल्ली में भीड़ का प्रवाह। 
दिवाली-छठ पूजा पर Homecoming Rush: सूरत के उधना स्टेशन पर 12 घंटे पहले लगी 2 किमी लंबी कतारें, 16 हजार यात्रियों को पहुंचाई 8 ट्रेनों ने, दिल्ली में भीड़ का प्रवाह। 

दिवाली और छठ पूजा के त्योहारों की चमक के साथ ही देशभर में होमकमिंग का सिलसिला शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में अपने अपनों के बीच लौटने की होड़ में लाखों प्रवासी मजदूर रेलवे स्टेशनों पर उमड़ पड़े हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लेकर मुंबई, अहमदाबाद और अन्य शहरों तक भारी भीड़ देखने को मिल रही है। खासकर गुजरात के सूरत शहर का उधना रेलवे स्टेशन इस रश का सबसे बड़ा गवाह बन गया है। यहां टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री में काम करने वाले उत्तर भारतीय प्रवासी मजदूरों की संख्या सबसे ज्यादा है। शनिवार शाम को प्लेटफॉर्म नंबर 6 से करीब दो किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। यात्री रविवार को चलने वाली साप्ताहिक और स्पेशल ट्रेनों के लिए 12 घंटे पहले ही लाइन में लग गए। स्टेशन परिसर से बाहर लिंबायत इलाके तक खुले मैदान में रात के अंधेरे में बैठे यात्रियों की तस्वीरें वायरल हो गईं। यह नजारा न केवल त्योहारों की खुशी को दर्शाता है, बल्कि प्रवासियों की मजबूरियों को भी उजागर करता है। रेलवे ने विशेष ट्रेनें चलाईं, लेकिन मांग इतनी ज्यादा है कि भीड़ काबू में नहीं आ रही।

सूरत गुजरात का सबसे बड़ा प्रवासी केंद्र है। यहां उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा से आए लाखों मजदूर टेक्सटाइल मिलों, डायमंड पॉलिशिंग यूनिट्स और अन्य फैक्ट्रियों में काम करते हैं। हर साल दिवाली पर ये लोग अपने गांव लौटते हैं, लेकिन इस बार स्थिति और गंभीर है। दिवाली के साथ छठ पूजा और बिहार विधानसभा चुनावों का संयोग होने से यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच दिनों में उधना और सूरत स्टेशनों से 56 हजार से अधिक यात्री रवाना हो चुके हैं। रविवार को अकेले आठ स्पेशल ट्रेनों ने 16 हजार यात्रियों को उत्तर भारत पहुंचाया। इनमें 12 हजार जनरल कोच में और चार हजार रिजर्व्ड सीटों पर सफर कर रहे थे। उधना-जयनगर अनरिजर्व्ड ट्रेन अकेले पांच हजार यात्रियों को ले गई। वेस्टर्न रेलवे ने 10 अक्टूबर से 62 ट्रेनों को सूरत स्टेशन पर रोकने का फैसला किया, जो पहले उधना पर आ रही थीं। इससे भीड़ का बोझ कम करने की कोशिश की गई। लेकिन स्टेशन पर जगह की कमी से यात्री बाहर मैदान में लाइन लगा रहे हैं।

शनिवार रात का नजारा दिल दहला देने वाला था। प्लेटफॉर्म नंबर 6 से शुरू होकर लाइन स्टेशन के बाहर लिंबायत रोड तक फैल गई। यात्री चादरें बिछाकर बैठे थे, क्योंकि ट्रेनें रविवार सुबह चलनी थीं। एक यात्री ने बताया कि वह जयनगर जा रहा है, छठ मनाने। घर 10 दिन पहले से फोन आ रहे थे, इसलिए 12 घंटे पहले आ गया। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान थे। भीड़ में चलना मुश्किल, पानी और शौचालय की समस्या। रेलवे ने क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया है, जहां यात्रियों को होल्डिंग एरिया में रखा जाता है और ट्रेन आने पर ही प्लेटफॉर्म पर जाने दिया जाता है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यह व्यवस्था कम पड़ रही है। रेलवे जीआरपी, आरपीएफ और सूरत सिटी पुलिस ने संयुक्त रूप से सुरक्षा बढ़ाई। 65 आरपीएफ जवान, 51 जीआरपी कर्मी और 30 सिटी पुलिसकर्मी तैनात थे। बाहर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए बैरिकेडिंग की गई। मोबाइल टिकटिंग सुविधा शुरू की गई, ताकि लंबी कतारों से बचा जा सके। छह टीवीएस मोबाइल यूटिएस मशीनें लगाई गईं, जो यात्रियों के पास जाकर टिकट काट रही हैं।

यह रश केवल सूरत तक सीमित नहीं। नई दिल्ली स्टेशन पर भी यात्री घंटों इंतजार कर रहे हैं। यहां उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में खचाखच भीड़ है। मुंबई के बांद्रा टर्मिनस और लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर भी स्थिति वैसी ही। रेलवे ने 15 प्रमुख स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट बैन कर दिया है, जो 28 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार, सूरत, उधना, वापी, बांद्रा टर्मिनस, सीएसएमटी शामिल हैं। इसका मकसद भीड़ कम करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। एनसीआर से 15 से 27 अक्टूबर तक 349 स्पेशल ट्रेनों की 349 ट्रिप्स चलेंगी। वेस्टर्न रेलवे ने आठ जोड़ी अनरिजर्व्ड स्पेशल ट्रेनें शुरू कीं, जो बांद्रा-बारौनी, वलसाड-बारौनी, उधना-भागलपुर, उधना-समस्तीपुर, प्रताप नगर-कटिहार, प्रताप नगर-जयनगर, साबरमती-गोरखपुर और साबरमती-बेगूसराय जाती हैं। ये 15 अक्टूबर से चल रही हैं। उधना से ही 09041 उधना-बलिया, 09067 उधना-जयनगर जैसी ट्रेनें चल रही हैं। कुल 30 ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए निर्धारित हैं, जिनमें 18 उधना से, सात भेस्टान से और बाकी सूरत से।

प्रवासी मजदूरों की यह होमकमिंग भावुक भी है। कई यात्री कहते हैं कि साल भर की कमाई लेकर घर जा रहे हैं। सूरत की मिलों में 12-14 घंटे काम के बाद त्योहार पर परिवार से मिलना सबसे बड़ा सपना होता है। लेकिन भीड़ में दुर्घटना का डर रहता है। रेलवे ने चेतावनी दी है कि ज्वलनशील वस्तुएं ले जाना मना है। पार्सल सर्विस अस्थायी रूप से बंद है। वेस्टर्न रेलवे के जीएम विवेक गुप्ता ने सोमवार को उधना का दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा पहले। आरपीएफ और जीआरपी को निर्देश दिए कि कोई असुरक्षित घटना न हो। यात्रियों से अपील की कि ऐप से टिकट बुक करें, भीड़ में सतर्क रहें। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां कतारों में बैठे लोग त्योहारों का इंतजार कर रहे। एक पोस्ट में लिखा, यह भीड़ प्रवास की कहानी कहती है। रिपोर्ट एफ3 ने ग्राउंड रिपोर्ट शेयर की, जहां प्रवासी मजदूर रोजगार की कमी पर बोल रहे। दैनिक भास्कर ने बताया कि मंगलवार को नौ ट्रेनों से 14 हजार यात्री रवाना हुए।

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