दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले स्मॉग का कहर: कई इलाकों में AQI गंभीर स्तर पर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट जारी किया।

दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिवाली की पूर्व संध्या पर वायु प्रदूषण ने चरम सीमा पार कर ली है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार

Oct 19, 2025 - 13:05
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दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले स्मॉग का कहर: कई इलाकों में AQI गंभीर स्तर पर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट जारी किया।
दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले स्मॉग का कहर: कई इलाकों में AQI गंभीर स्तर पर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट जारी किया।

दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिवाली की पूर्व संध्या पर वायु प्रदूषण ने चरम सीमा पार कर ली है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 19 अक्टूबर 2025 की सुबह कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। आनंद विहार में AQI 426 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है और सांस लेना बेहद कठिन बना देता है। इसी तरह, आशोक विहार में 412, विवेक विहार में 349 और आरके पुरम में 322 का AQI रहा। गाजियाबाद के लोनी में 341 और नोएडा के सेक्टर 125 में 342 का स्तर दर्ज हुआ। धुंध और धुएं की चादर ने पूरे क्षेत्र को ढक लिया है, जिससे दृश्यता घटकर 500 मीटर से भी कम रह गई। मौसम विभाग के अनुसार, हल्की हवाओं और ठंडे तापमान ने प्रदूषकों को जमीन के करीब जमा कर दिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिवाली के पटाखों से स्थिति और बिगड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को घर में रहने और मास्क पहनने की सलाह दी है। यह समस्या हर साल दिवाली के आसपास उभरती है, लेकिन इस बार फसल जलाने और वाहनों के धुएं ने इसे और गंभीर बना दिया है।

प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों का धुआं है, जो दिल्ली की कुल प्रदूषण में 16 प्रतिशत योगदान दे रहा है। इसके अलावा, पराली जलाने से 2 से 5 प्रतिशत धुआं आ रहा है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और उद्योगों के उत्सर्जन ने हवा को जहरीला बना दिया है। सीपीसीबी के 38 निगरानी केंद्रों में से नौ पर बहुत खराब श्रेणी का AQI रहा। आनंद विहार, वजीरपुर, जहांगीरपुरी, बावना और सिरि फोर्ट जैसे इलाकों में 300 से ऊपर का स्तर देखा गया। गौतम बुद्ध नगर के सेक्टर 1 में पीएम 2.5 का स्तर 150 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक रहा, जो सुरक्षित सीमा 60 से कहीं ज्यादा है। पीएम 10 का स्तर भी 300 के पार पहुंच गया। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 248, गाजियाबाद के विजय नगर में 324 और नोएडा के कई सेक्टरों में 298 से 342 तक का AQI दर्ज हुआ। गुरुग्राम में 258 का स्तर खराब श्रेणी में रहा, जबकि फरीदाबाद में 190 मध्यम श्रेणी में। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदूषण पूर्वी और उत्तरी इलाकों में ज्यादा प्रभावी है। हवा की गति केवल 5 किलोमीटर प्रति घंटा रहने से प्रदूषक फैल नहीं पा रहे।

दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक संपर्क से सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं। खासकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगियों को खतरा है। फेफड़ों के विशेषज्ञ डॉ. शरद जोशी ने कहा कि पीएम 2.5 कण फेफड़ों में घुसकर खून में मिल जाते हैं, जो हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई है। अस्पतालों में सांस संबंधी शिकायतों के मामले 20 प्रतिशत बढ़ गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में रोजाना 1000 से अधिक लोग प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार, पीएम 2.5 का वार्षिक औसत 5 माइक्रोग्राम होना चाहिए, लेकिन यहां 100 से ऊपर है। यह स्थिति दिवाली के बाद और खराब हो सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 20 अक्टूबर को छोटी दीवाली और 21 को मुख्य दिवाली पर पटाखों से AQI 400 पार कर सकता है।

सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत चरण एक लागू किया है। इसमें निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, वाहनों की जांच और औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी शामिल है। पटाखों की बिक्री पर सख्ती बरती जा रही है। दिल्ली सरकार ने केवल हरे पटाखों की अनुमति दी है, जो 2 घंटे में जल सकते हैं। समय सीमा शाम 8 से 10 बजे तक ही रखी गई है। पराली जलाने पर पंजाब और हरियाणा में जुर्माना लगाया जा रहा है। 5000 से अधिक किसानों को चेतावनी दी गई। दिल्ली में 106 वाटर स्प्रिंकलर तैनात हैं, जो सड़कों पर पानी छिड़क रहे हैं। मेट्रो और बसों में यात्रा बढ़ाने के लिए मुफ्त राइड्स की योजना है। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद प्रदूषण कम नहीं हो रहा। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा कि लंबे समय के उपायों की कमी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगले साल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देंगे।

मौसम का असर भी प्रदूषण बढ़ा रहा है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 19 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहा। सुबह कोहरे की चादर बिछी, जो दोपहर तक छंटी। हवाओं की दिशा उत्तर-पश्चिम से है, जो पराली का धुआं ला रही हैं। अगले दो दिनों में हल्की बारिश की संभावना है, जो थोड़ी राहत दे सकती है। लेकिन दिवाली की रौनक में लोग पटाखे फोड़ने को तैयार हैं। बाजारों में भीड़ बढ़ी है, जिससे वाहनों का दबाव ज्यादा हो गया। चांदनी चौक, सरोजिनी नगर और कमला नगर जैसे बाजारों में ट्रैफिक जाम आम है। ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक रूट सुझाए हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए ऐप्स जैसे सम एयर क्वालिटी और सीपीसीबी का पोर्टल उपलब्ध हैं, जहां लाइव AQI चेक किया जा सकता है।

यह समस्या दिल्ली के लिए पुरानी हो चुकी है। हर साल नवंबर-दिसंबर में स्मॉग की परत बिछ जाती है। 2024 में दिवाली के बाद AQI 500 के पार चला गया था। इस बार भी वैसा ही खतरा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए पराली प्रबंधन मशीनें मुफ्त दें। वाहनों को इलेक्ट्रिक बनाएं और हरियाली बढ़ाएं। दिल्ली में 20 प्रतिशत क्षेत्र जंगल होना चाहिए, लेकिन केवल 10 प्रतिशत है। एनजीओ सक्रिय हो गए हैं। क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क ने अभियान चलाया कि पटाखे न फोड़ें। स्कूलों में बच्चों को प्रदूषण के नुकसान बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ब्रीदफ्रीडिल्ली जैसे ट्रेंड चल रहे हैं। लोग फोटो शेयर कर रहे हैं, जहां इमारतें धुंध में गायब दिख रही हैं। एक यूजर ने लिखा कि हवा सांस लेने लायक नहीं, दिवाली का मजा किरकिरा हो गया।

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