नोएडा हिंसा की साजिश का पर्दाफाश- जांच में 'बाहरी तत्वों' की भूमिका आई सामने, 7 मुख्य आरोपियों पर एफआईआर दर्ज।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा में पिछले कुछ दिनों से जारी श्रमिक असंतोष ने उस समय हिंसक रूप ले लिया जब वेतन वृद्धि की मांग
- औद्योगिक हब में सुनियोजित बवाल: आगजनी और तोड़फोड़ के पीछे मास्टरमाइंड की तलाश तेज, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
- नोएडा में तनावपूर्ण शांति: उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस का 'जीरो टॉलरेंस' एक्शन, सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई थी भ्रामक जानकारी
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा में पिछले कुछ दिनों से जारी श्रमिक असंतोष ने उस समय हिंसक रूप ले लिया जब वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों के बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ कर दी। पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा की गई शुरुआती जांच में इस पूरे बवाल के पीछे 'बाहरी हाथ' होने के पुख्ता संकेत मिले हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि औद्योगिक शांति को भंग करने के लिए रची गई एक गहरी साजिश थी। शहर के विभिन्न औद्योगिक सेक्टरों में जिस तरह से एक साथ पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं, वे इसके सुनियोजित होने की ओर इशारा करती हैं। फिलहाल, जिले में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।
हिंसा की गंभीरता को देखते हुए नोएडा पुलिस ने अब तक 7 अलग-अलग प्राथमिकियां (एफआईआर) दर्ज की हैं, जिनमें कई नामजद और सैकड़ों अज्ञात लोग शामिल हैं। इन एफआईआर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, पुलिस बल पर हमला करने और दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस कमिश्नरेट की विशेष टीमें सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के जरिए उन चेहरों की पहचान कर रही हैं, जो स्थानीय फैक्ट्रियों में काम नहीं करते थे लेकिन भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग पड़ोसी राज्यों से आए थे और उनका मुख्य उद्देश्य मजदूरों को उकसाकर हिंसा फैलाना था। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस साजिश के मुख्य सूत्रधारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
प्रशासन की सक्रियता के चलते नोएडा के फेज-2, सेक्टर-60 और सेक्टर-80 जैसे संवेदनशील इलाकों में अब स्थिति काबू में है। पुलिस ने इन क्षेत्रों में 'फ्लैग मार्च' निकाला है ताकि आम नागरिकों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच सुरक्षा का भाव बना रहे। हिंसा के बाद कई कंपनियों ने डर के मारे काम बंद कर दिया था, लेकिन अब पुलिस सुरक्षा के आश्वासन के बाद औद्योगिक इकाइयां धीरे-धीरे दोबारा शुरू हो रही हैं। पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर बैरिकेडिंग कर दी है और बिना पहचान पत्र के किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को औद्योगिक क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। ड्रोन कैमरों की मदद से भीड़भाड़ वाले इलाकों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न हो सके। नोएडा पुलिस के साइबर सेल ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी का पता लगाया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ व्हाट्सएप ग्रुप्स और टेलीग्राम चैनल्स के माध्यम से भड़काऊ संदेश प्रसारित किए गए थे। इन संदेशों में पुलिसिया कार्रवाई के बारे में झूठी खबरें फैलाई गईं, जिससे मजदूर आक्रोशित हो गए। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों की ट्रेसिंग कर रही है जिनसे ये भ्रामक जानकारियां सबसे पहले साझा की गई थीं। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी आईटी एक्ट के तहत अलग से मामला दर्ज किया जा रहा है।
हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने न केवल निजी वाहनों को आग के हवाले किया, बल्कि पुलिस की पीसीआर वैन और सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुँचाया। कई फैक्ट्रियों के शीशे तोड़ दिए गए और वहां मौजूद मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गई। इस आर्थिक नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन ने एक विशेष टीम गठित की है। उत्तर प्रदेश सरकार के कड़े रुख को देखते हुए, यह संभावना जताई जा रही है कि नुकसान की भरपाई चिन्हित किए गए दंगाइयों की संपत्ति से की जा सकती है। औद्योगिक संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में एक स्थायी पुलिस चौकी या त्वरित प्रतिक्रिया बल की तैनाती की जाए।
मजदूरों की वास्तविक मांगों को लेकर सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई है, लेकिन हिंसा को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया गया है। स्थानीय श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वेतन वृद्धि और अन्य सुविधाओं को लेकर बातचीत के द्वार हमेशा खुले थे। हालांकि, कुछ स्वयंभू श्रमिक नेताओं ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए भोले-भले मजदूरों को गलत रास्ता दिखाया। पुलिस अब उन संगठनों की सूची भी तैयार कर रही है जो बिना किसी मान्यता के मजदूरों के बीच सक्रिय हैं और उन्हें उकसाने का काम करते हैं। वास्तविक श्रमिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और शांतिपूर्वक अपनी बात उचित मंच पर रखें। नोएडा में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएसी (प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी) और रैपिड एक्शन फोर्स की कई कंपनियां तैनात की गई हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ 'नेशनल सिक्योरिटी एक्ट' (एनएसए) के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। शहर के सभी प्रमुख चौराहों और बॉर्डर पॉइंट्स पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। बाहरी जिलों से आने वाली बसों और वाहनों की विशेष रूप से तलाशी ली जा रही है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अब यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक गतिविधियों में कोई बाधा न आए और निवेशकों का भरोसा बना रहे, क्योंकि नोएडा राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
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