कई वाहनों में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़, नोएडा में श्रमिक अशांति के पीछे बड़ी साजिश की आशंका, मुख्यमंत्री ने उपद्रवियों के खिलाफ दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

नोएडा की सड़कों पर हुई इस हिंसा का असर न केवल सामान्य जनजीवन पर पड़ा है, बल्कि निवेश के माहौल पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और निवेशकों को भरोसा दिलाया

By INA News Desk
Apr 13, 2026 - 17:22
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कई वाहनों में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़, नोएडा में श्रमिक अशांति के पीछे बड़ी साजिश की आशंका, मुख्यमंत्री ने उपद्रवियों के खिलाफ दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
कई वाहनों में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़, नोएडा में श्रमिक अशांति के पीछे बड़ी साजिश की आशंका, मुख्यमंत्री ने उपद्रवियों के खिलाफ दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
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  • औद्योगिक शांति भंग करने वालों पर नकेल कसने की तैयारी, वेतन वृद्धि की मांग के बीच हिंसक झड़प से सहमा नोएडा
  • विकास की रफ्तार रोकने की कोशिश बर्दाश्त नहीं, मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग और प्रशासन को दिए समन्वय के आदेश

उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा में पिछले कुछ दिनों से जारी श्रमिकों का आंदोलन अब एक गंभीर मोड़ ले चुका है। वेतन वृद्धि और श्रम कानूनों के क्रियान्वयन जैसी मांगों को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन अचानक हिंसा में तब्दील हो गया, जिसने प्रशासन और सरकार दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नोएडा के फेज-2 स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की, लेकिन देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों द्वारा निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई वाहनों में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीरता से लिया है और इसे राज्य की प्रगति में बाधा डालने की एक सुनियोजित कोशिश करार दिया है।

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में उपजी इस अशांति पर अपना कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कुछ असामाजिक तत्व प्रदेश के शांत वातावरण को बिगाड़ने का कुचक्र रच रहे हैं। उन्होंने एक उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य सरकार सदैव श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील रही है, लेकिन विरोध की आड़ में हिंसा और अराजकता को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, कुछ विघटनकारी शक्तियां भोले-भले कामगारों को भ्रमित कर उन्हें कानून हाथ में लेने के लिए उकसा रही हैं। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि उन चेहरों की पहचान की जाए जो पर्दे के पीछे रहकर इस हिंसा की पटकथा लिख रहे हैं।

हिंसक प्रदर्शनों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। नोएडा के विभिन्न संवेदनशील सेक्टरों, विशेषकर सेक्टर 59, 60, 62 और 84 में भारी पुलिस बल के साथ-साथ पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स की कई कंपनियां तैनात की गई हैं। पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारियों द्वारा पूरे ऑपरेशन की निगरानी की जा रही है। उपद्रव के दौरान पत्थरबाजी और आगजनी करने वालों के खिलाफ सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ में शामिल कुछ बाहरी लोग जो श्रमिक संगठनों के नाम पर हिंसा भड़का रहे थे, उनके खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मांगों और संवाद की कमी पर मंथन

श्रमिकों की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 20,000 रुपये करने और ओवरटाइम के बकाये भुगतान से जुड़ी है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते उद्योग मालिकों और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच प्रभावी संवाद हुआ होता, तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। अब सरकार ने 24 घंटे के भीतर सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने कर्मियों के साथ संवाद स्थापित करने का अल्टीमेटम दिया है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में एक बड़ी आशंका यह भी व्यक्त की है कि इस आंदोलन के माध्यम से उन विचारधाराओं को फिर से जीवित करने की कोशिश की जा रही है जो देश में लगभग समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने नक्सलवाद जैसी प्रवृत्तियों के पुनरुत्थान की ओर इशारा करते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह की कट्टरता फैलाना राज्य की अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाने का एक बड़ा षड्यंत्र हो सकता है। इंटेलिजेंस नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन प्रदर्शनों को कहीं बाहर से फंडिंग या वैचारिक समर्थन तो नहीं मिल रहा है। प्रशासन को औद्योगिक क्लस्टरों में निगरानी बढ़ाने और किसी भी भड़काऊ गतिविधि को तुरंत कुचलने के आदेश दिए गए हैं।

इस बीच, श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए श्रम विभाग को भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि जहां एक तरफ अराजकता से निपटना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ श्रमिकों की जायज मांगों को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। श्रम विभाग को आदेश दिया गया है कि वह उन फैक्ट्रियों का ऑडिट करे जहां से शोषण या वेतन विसंगति की शिकायतें मिल रही हैं। औद्योगिक इकाइयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे श्रम कानूनों का पूरी तरह पालन कर रही हैं। पारदर्शिता और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है, जो इस पूरे संकट के मूल कारणों की जांच करेगी और श्रमिकों के कल्याण के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगी।

नोएडा की सड़कों पर हुई इस हिंसा का असर न केवल सामान्य जनजीवन पर पड़ा है, बल्कि निवेश के माहौल पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सुरक्षा और उद्योगों का सुचारू संचालन सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया को रोकने के लिए जो लोग भ्रम फैला रहे हैं, उन्हें सफल नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी साझा करने वालों पर साइबर सेल के माध्यम से नजर रखी जा रही है। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए भी एक्सप्रेस-वे और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है।

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