Pahalgam Terror Attack: ... और मैंने भी जोर-जोर से कलमा पढ़ना शुरू कर दिया तो आतंकी ने मुझे छोड़ दिया.. जिंदा बचे प्रोफेसर देबाशीष ने सुनाई भयानक दास्तां

उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार के साथ पेड़ के नीचे लेटा हुआ था। तभी अचानक मैंने सुना कि मेरे आसपास मौजूद सभी लोग जोर-जोर से कल...

Apr 24, 2025 - 00:04
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Pahalgam Terror Attack: ... और मैंने भी जोर-जोर से कलमा पढ़ना शुरू कर दिया तो आतंकी ने मुझे छोड़ दिया.. जिंदा बचे प्रोफेसर देबाशीष ने सुनाई भयानक दास्तां

Pahalgam Terror Attack Updates.

हम पेड़ के नीचे छिपे हुए थे। मैंने वहां आसपास कुछ लोगों को कलमा पढ़ते हुए सुना। मैं भी उन लोगों में शामिल हो गया। तभी एक आतंकवादी (Terrorist) मेरे पास आया, फिर उसने मेरी तरफ देखा और पूछा- क्या कर रहे हो, ये क्या बोल रहे हो? क्या राम नाम बोल रहे हो? तो मैं जोर-जोर से कलमा पढ़ने लगा। हालांकि मुझे सीधे तौर पर कलमा पढ़ने के लिए नहीं बोला गया, लेकिन मैंने कलमा पढ़ना जारी रखा। थोड़ी देर बाद वह आतंकी मुड़ा और वहां से चला गया। पहलगाम (Pahalgam) में अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने पहुंचे असम यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर देबाशीष (Debasish) भट्टाचार्य की मंगलवार को आतंकियों की गोली से जान कलमा पढ़ने से बची।

जिसके बाद उन्होंने उन डरावने पलों को याद कर अपनी दास्तां बयां की। देबाशीष (Debasish) भट्टाचार्य ने बताया कि वो और उनकी पत्नी असम विश्वविद्यालय के बंगाली डिपार्टमेंट में कार्यरत है। वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ कश्मीर गए थे। जिस वक्त पहलगाम (Pahalgam) में आतंकी हमला हुआ, तब वह उसी जगह पर मौजूद थे। भट्टाचार्य ने बताया कि गोलियां चलने के बाद आतंकियों को देखते ही उनके आसपास के लोग जमीन पर लेट गए और कलमा पढ़ना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मैंने भी उनकी नकल शुरू कर दी।

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एक आतंकवादी (Terrorist) हमारे करीब आया और मेरे बगल में लेटे एक व्यक्ति को गोली मार दी। फिर उसने मेरी तरफ देखा और पूछा कि क्या कर रहे हो। मैंने उसके सवाल का जवाब तो नहीं दिया, लेकिन जोर-जोर से कलमा पढ़ना शुरू कर दिया। उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (Pahalgam) में मंगलवार (22 अप्रैल) को हुए 4 आतंकवादियों ने कश्मीर की वादियों में घूमने आए पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में अब तक 28 लोगों की जान जा चुकी है और 17 लोग घायल हैं।

हमले के चश्मदीदों ने बताया कि आतंकवादी (Terrorist) लोगों से उनका नाम और धर्म पूछकर उन्हें अपना निशाना बना रहे थे। कई लोगों ने यह भी कहा कि आतंकी लोगों से कलमा पढ़ने के लिए कह रहे थे। ऐसे में जो भी कलमा पढ़कर सुनाता था, वे उन्हें छोड़ देते थे। इसी तरह असम यूनिवर्सिटी में बंगाली डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष (Debasish) भट्टाचार्य ने अपनी जान बचा ली क्योंकि वह कलमा पढ़ना जानते थे।

पहलगाम (Pahalgam) आतंकी हमले के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एक इतनी पुरानी सभ्यता और इतना बड़ा देश है, जिसे ऐसी किसी भी आतंकी गतिविधियों से डराया नहीं जा सकता। ऐसी हरकतों का जवाब इसके ज़िम्मेदार लोगों को आने वाले कुछ ही समय में ज़ोरदार तरीक़े से नज़र आएगा। उन्होंने कहा कि आतंकियों को ऐसा जवाब मिलेगा कि दुनिया देखेगी। उन्होंने कहा कि साजिश रचने वालों की तह तक जाएंगे, नापाक साजिश रचने वालों को नहीं छोड़ेंगे। हम जोरदार तरीके से जवाब देंगे, किसी भी दोषी को नहीं बख्शेंगे।

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उधर देबाशीष (Debasish) भट्टाचार्य ने यह भी बताया कि मुझे नहीं पता कि क्या हुआ, वह मुड़ा और वहां से चला गया। उन्होंने कहा कि जैसे ही आतंकी वहां से गए, वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ तुरंत उस जगह को छोड़कर वापस चलने लगे। मैंने किसी तरह वहां लगे बाड़ को पार कर बचने में कामयाब रहा। करीब दो घंटे तक पैदल चलने के बाद हमें एक स्थानीय व्यक्ति मिला, जिसने पहलगाम (Pahalgam) तक वापस जाने का रास्ता बताया।

प्रोफेसर देबाशीष (Debasish) भट्टाचार्य ने एक भारतीय चैनल से बातचीत में बताया कि जब पहलगाम (Pahalgam) में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था, तब वह अपने परिवार के साथ वहीं मौजूद थे और आतंकियों के डर के एक पेड़ के नीचे लेटे हुए थे। उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार के साथ पेड़ के नीचे लेटा हुआ था। तभी अचानक मैंने सुना कि मेरे आसपास मौजूद सभी लोग जोर-जोर से कलमा पढ़ रहे थे।

यह सुनकर मैंने भी कलमा पढ़ना शुरू कर दिया। तभी एक आतंकी मेरी ओर बढ़ा और मेरे बगल में लेटे शख्स के सिर में गोली मार दी।” प्रोफसर देबाशीष (Debasish) भट्टाचार्य ने कहा कि मुझे अभी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि मैं अभी भी जिंदा हूं। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया है कि आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाने से पहले उनका धर्म पूछा और केवल पुरुषों को ही निशाना बनाया, इस संबंध में पूछे जाने पर भट्टाचार्य ने कहा कि वह बहुत घबराए हुए हैं और अन्य सवालों के जवाब नहीं दे पाएंगे।

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