Sambhal : मुहर्रम पर सख्ती, कांवड़ पर छूट क्यों? रशीक अनवर ने उठाए समान नियमों के सवाल
हालांकि रशीक अनवर ने सरकार और प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यदि मुहर्रम के दौरान डीजे और शक्ति प्रदर्शन पर रोक लगाई जा रही है, तो यही नियम कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक जुलूसों पर भी समान रूप से लागू होने चाहि
Report : उवैस दानिश, सम्भल
मुहर्रम के जुलूसों में डीजे, हथियारों के प्रदर्शन और शक्ति प्रदर्शन पर सरकार की सख्ती के बीच समाजसेवी रशीक अनवर का बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम मुसलमानों के लिए गम और मातम का महीना है, क्योंकि इसी महीने कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। ऐसे में मुहर्रम के जुलूसों में डीजे बजाना या किसी भी प्रकार का अनावश्यक प्रदर्शन करना उचित नहीं है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह स्वयं भी डीजे के इस्तेमाल के खिलाफ हैं।
हालांकि रशीक अनवर ने सरकार और प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यदि मुहर्रम के दौरान डीजे और शक्ति प्रदर्शन पर रोक लगाई जा रही है, तो यही नियम कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक जुलूसों पर भी समान रूप से लागू होने चाहिए। उनका कहना था कि कांवड़ यात्रा के दौरान कई स्थानों पर बेहद तेज आवाज में डीजे बजते हैं और कुछ जुलूसों में लाठी, डंडे, तलवार तथा अन्य हथियारों का प्रदर्शन भी देखने को मिलता है। रशीक अनवर ने कहा कि कानून और प्रशासनिक व्यवस्था किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों और समुदायों के लिए बराबर होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मुहर्रम के जुलूसों में बच्चों द्वारा तलवार लेकर चलने जैसी परंपराएं भी काफी हद तक समाप्त हो गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी धार्मिक आयोजनों पर एक समान नियम लागू होना जरूरी है।
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