तमिलनाडु में 'थलपति' विजय का महा-उदय: टीवीके की आंधी में उड़ा डीएमके-कांग्रेस का अभेद्य किला।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मतगणना रुझानों ने दक्षिण भारत की राजनीति में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव

By INA News Desk
May 4, 2026 - 13:14
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तमिलनाडु में 'थलपति' विजय का महा-उदय: टीवीके की आंधी में उड़ा डीएमके-कांग्रेस का अभेद्य किला।
तमिलनाडु में 'थलपति' विजय का महा-उदय: टीवीके की आंधी में उड़ा डीएमके-कांग्रेस का अभेद्य किला।
  • सनातन के अपमान पर भारी पड़ा जनादेश: मनोज तिवारी का स्टालिन पर तीखा प्रहार, बोले- 'तमिलनाडु ने उन्हें नष्ट कर दिया'
  • रुझानों में टीवीके 100 के पार: द्रविड़ राजनीति के नए युग की शुरुआत, एआईएडीएमके दूसरे और डीएमके तीसरे स्थान पर खिसकी

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मतगणना रुझानों ने दक्षिण भारत की राजनीति में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव के संकेत दिए हैं। अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली नवगठित पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने अपने पहले ही चुनावी रण में ऐसी आंधी चलाई है कि राज्य के स्थापित राजनीतिक दिग्गज धराशायी होते नजर आ रहे हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने समूचे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य की 234 सीटों के लिए हो रही गिनती में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने करिश्माई प्रदर्शन करते हुए 100 सीटों के जादुई आंकड़े को छू लिया है। यह प्रदर्शन इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि राज्य की राजनीति दशकों से द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच ध्रुवीकृत रही है। टीवीके की इस बढ़त ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट दिया है। सत्ताधारी डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को जनता ने सिरे से नकार दिया है और रुझानों के अनुसार वे तीसरे नंबर पर खिसकते दिखाई दे रहे हैं। विजय की लोकप्रियता और उनके द्वारा उठाए गए बुनियादी मुद्दों ने राज्य के युवाओं और महिलाओं को बड़े पैमाने पर अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसका सीधा परिणाम अब ईवीएम मशीनों से निकलता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस ऐतिहासिक फेरबदल के बीच बयानों का दौर भी तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने एक चर्चा के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनके गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया है। तिवारी ने स्टालिन के पिछले विवादास्पद बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जो लोग सनातन धर्म को नष्ट करने की मंशा रखते थे, आज तमिलनाडु की पवित्र भूमि ने उन्हें खुद राजनीतिक रूप से नष्ट कर दिया है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि महिलाओं का अपमान करने वाली और धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाली राजनीति का अंत अब निश्चित हो गया है। मनोज तिवारी के इस बयान ने दिल्ली से लेकर चेन्नई तक की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इसे सीधे तौर पर 'सनातन बनाम द्रविड़ विचारधारा' की लड़ाई के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।

तमिलनाडु की सत्ता में काबिज डीएमके गठबंधन के लिए ये रुझान किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। मुख्यमंत्री स्टालिन के नेतृत्व में लड़े गए इस चुनाव में पार्टी को भारी एंटी-इंकंबेंसी का सामना करना पड़ा है। भ्रष्टाचार के आरोप और परिवारवाद के मुद्दों ने विपक्षी दलों को एक बड़ा आधार प्रदान किया। एआईएडीएमके, जो मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी, वह भी फिलहाल टीवीके की लहर के सामने दूसरे नंबर पर संघर्ष करती दिख रही है। अन्नाद्रमुक गठबंधन फिलहाल 65 से 70 सीटों के आसपास सिमटता नजर आ रहा है। सबसे बड़ी गिरावट डीएमके के वोट बैंक में देखी गई है, जहाँ उनके पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले मध्य और दक्षिणी तमिलनाडु में भी टीवीके ने बड़ी सेंधमारी की है। मतगणना केंद्रों के बाहर टीवीके समर्थकों का भारी जमावड़ा लगा हुआ है और वे पहले से ही विजय का उत्सव मना रहे हैं। मनोज तिवारी ने अपने प्रहार को और धार देते हुए यह भी कहा कि तमिलनाडु की जनता शांत और धार्मिक प्रवृत्ति की है और उन्होंने इस चुनाव के माध्यम से उन शक्तियों को करारा जवाब दिया है जो समाज को बांटने का काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सनातन विरोधी टिप्पणी करने वाले नेताओं को जनता ने यह सिखा दिया है कि देश की संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तिवारी ने महिलाओं के प्रति डीएमके नेताओं के पुराने रवैये पर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य की मातृशक्ति ने इस बार वोट की चोट से अपना बदला लिया है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है, जहाँ एक पक्ष इसे वैचारिक जीत बता रहा है तो दूसरा पक्ष इसे केवल सत्ता के खिलाफ जनता का आक्रोश मान रहा है।

तमिलनाडु की सीटों के विश्लेषण से पता चलता है कि टीवीके ने न केवल ग्रामीण बल्कि शहरी इलाकों में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है। चेन्नई, कोयंबटूर और मदुरै जैसे बड़े शहरों में विजय की पार्टी के उम्मीदवारों ने अपनी पैठ बनाई है। अभिनेता विजय का सिनेमाई करिश्मा अब एक ठोस राजनीतिक ताकत में तब्दील होता दिख रहा है। उनकी रैलियों में उमड़ी भीड़ केवल दिखावा नहीं थी, बल्कि वह एक सुलगता हुआ जनादेश था जो आज सामने आ रहा है। विजय ने अपने घोषणापत्र में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और स्थानीय रोजगार पर विशेष जोर दिया था, जो शायद मतदाताओं के मन को भा गया। डीएमके के गढ़ माने जाने वाले कावेरी डेल्टा क्षेत्र में भी टीवीके ने प्रभावशाली बढ़त बनाई है, जिससे द्रविड़ राजनीति के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मतगणना की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। राज्य भर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है। डीएमके खेमे में छाई खामोशी और निराशा यह बताने के लिए काफी है कि उन्हें इस स्तर की हार की उम्मीद नहीं थी। पार्टी के कई कद्दावर नेता, जो दशकों से अजेय माने जाते थे, वे आज टीवीके के युवा उम्मीदवारों से पीछे चल रहे हैं। यह रुझान यह भी दर्शाते हैं कि तमिलनाडु में अब 'तीसरे विकल्प' की मांग जोरों पर थी, जिसे विजय ने सफलतापूर्वक पूरा किया है। भाजपा सांसद के बयान ने इस चुनावी लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश बना दिया है, जहाँ सनातन धर्म की रक्षा का मुद्दा अब दक्षिण के चुनावों में भी निर्णायक भूमिका निभाता दिख रहा है।

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