झारग्राम में 'झालमुड़ी' का असर: मोदी के मुरीद हुए मतदाता, भाजपा प्रत्याशी 11,000 मतों से आगे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के साथ ही राज्य की राजनीति में 'जंगलमहल' का क्षेत्र एक बार फिर सत्ता के

May 4, 2026 - 13:07
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झारग्राम में 'झालमुड़ी' का असर: मोदी के मुरीद हुए मतदाता, भाजपा प्रत्याशी 11,000 मतों से आगे।
झारग्राम में 'झालमुड़ी' का असर: मोदी के मुरीद हुए मतदाता, भाजपा प्रत्याशी 11,000 मतों से आगे।
  • जंगलमहल में भगवा परचम: झारग्राम सीट पर लक्ष्मी कांत साऊ ने बनाई बड़ी बढ़त, टीएमसी पिछड़ी
  • रुझानों में बदलाव की बयार: झारग्राम में भाजपा की सुनामी, प्रधानमंत्री की सादगी ने बदला चुनावी गणित

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के साथ ही राज्य की राजनीति में 'जंगलमहल' का क्षेत्र एक बार फिर सत्ता के बदलाव का केंद्र बनकर उभरा है। झारग्राम विधानसभा सीट, जो कभी वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग मानी जाती थी, वहां से आ रहे ताजा रुझानों ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। दोपहर 12:00 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार लक्ष्मी कांत साऊ ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। विशेष रूप से यह वह क्षेत्र है जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्थानीय दुकान पर रुककर 'झालमुड़ी' खाई थी, और आज उसी मिट्टी से भाजपा के पक्ष में जबरदस्त समर्थन निकलता दिखाई दे रहा है। पश्चिम बंगाल की झारग्राम विधानसभा सीट पर हो रही मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को पीछे छोड़ दिया है। सुबह 8 बजे से शुरू हुई वोटों की गिनती में पहले दो राउंड तक मुकाबला बराबरी का था, लेकिन जैसे-जैसे ईवीएम (EVM) के आंकड़े सामने आने लगे, भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मी कांत साऊ ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली। आठवें राउंड की गिनती समाप्त होने तक भाजपा प्रत्याशी लगभग 11,418 मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं। भाजपा को अब तक 47,025 वोट मिले हैं, जबकि टीएमसी के उम्मीदवार मंगल सोरेन 35,607 मतों के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। झारग्राम की यह सीट पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के पास थी, लेकिन इस बार रुझान स्पष्ट रूप से सत्ता विरोधी लहर और बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं।

झारग्राम में इस बार के चुनाव प्रचार का सबसे यादगार पल वह था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जनसभा के बाद अचानक कॉलेज मोड़ के पास एक सड़क किनारे की दुकान पर रुकने का फैसला किया। वहां उन्होंने न केवल स्थानीय लोगों से संवाद किया, बल्कि एक साधारण कागज के ठोंगे में 'झालमुड़ी' का आनंद भी लिया। सादगी का यह संदेश जंगलमहल के मतदाताओं के दिलों में घर कर गया। राजनीतिक गलियारों में इस घटना को 'पब्लिक कनेक्ट' का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। स्थानीय लोग इस बात से बेहद प्रभावित थे कि देश के प्रधानमंत्री ने उनके बीच बैठकर उनकी पसंदीदा स्थानीय डिश को प्राथमिकता दी। आज मतगणना के दौरान आ रहे परिणाम इसी जमीनी जुड़ाव और प्रधानमंत्री के प्रति जनता के भरोसे को प्रमाणित करते नजर आ रहे हैं।

जंगलमहल क्षेत्र, जिसमें झारग्राम शामिल है, ऐतिहासिक रूप से अपनी जनजातीय आबादी और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के लिए जाना जाता है। भाजपा ने इस बार अपने चुनावी अभियान में क्षेत्र के विकास, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे को प्रमुखता से रखा था। प्रधानमंत्री मोदी के 'झालमुड़ी' वाले उस क्षण ने स्थानीय संस्कृति के प्रति उनके सम्मान को प्रदर्शित किया, जिससे पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और ग्रामीण आबादी के बीच भाजपा की साख बढ़ी। लक्ष्मी कांत साऊ की यह बढ़त केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उस सांगठनिक मेहनत का नतीजा है जो भाजपा ने पिछले पांच वर्षों में इस दुर्गम क्षेत्र में की है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की निवर्तमान विधायक और मंत्री बिरबाहा हांसदा इस बार उम्मीदवार नहीं थीं, जिसका नुकसान भी सत्ताधारी दल को उठाना पड़ा है। मतगणना प्रक्रिया के दौरान झारग्राम के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से भाजपा को भरपूर समर्थन मिला है। शुरुआती चार राउंड में ग्रामीण अंचलों की ईवीएम खुलीं, जहाँ भाजपा ने अप्रत्याशित रूप से 8,000 से अधिक की लीड हासिल कर ली थी। पांचवें राउंड के बाद यह अंतर और बढ़ता गया। टीएमसी के रणनीतिकार इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि उनकी कल्याणकारी योजनाएं 'जंगलमहल' में उनकी वापसी सुनिश्चित करेंगी, लेकिन रुझान बताते हैं कि जनता अब केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर बुनियादी ढांचे और भ्रष्टाचार पर जवाबदेही चाहती है। भाजपा ने 'परिवर्तन' के नारे को झारग्राम की स्थानीय समस्याओं से जोड़कर पेश किया, जिसने मतदाताओं को प्रभावित करने का काम किया है।

झारग्राम की चुनावी जंग में इस बार कांग्रेस और वामपंथी दलों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रसेनजित दे और सीपीआईएम के अर्जुन कुमार महतो मुकाबले में कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं और उनकी जमानत बचने पर भी संशय बना हुआ है। यह रुझान स्पष्ट करता है कि बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से द्विध्रुवीय (Bipolar) हो गई है, जहाँ सीधी टक्कर केवल ममता बनर्जी और भाजपा के बीच है। झारग्राम में भाजपा की यह बढ़त राज्य की उन सीटों का प्रतिनिधित्व कर रही है जहाँ टीएमसी की पकड़ ढीली हुई है। स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय बलों की कड़ी निगरानी में हो रही मतगणना ने अब तक पारदर्शिता बनाए रखी है, और भाजपा समर्थकों ने बढ़त को देखते हुए सड़कों पर जश्न मनाना भी शुरू कर दिया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से झारग्राम हमेशा से संवेदनशील रहा है, लेकिन इस बार चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के कारण मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रही है। मतगणना केंद्र के बाहर तैनात भाजपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री का झारग्राम दौरा और उनके द्वारा स्थानीय भावनाओं का सम्मान करना ही इस जीत की मुख्य वजह बनेगा। झारग्राम की यह सीट भाजपा के लिए जंगलमहल का प्रवेश द्वार मानी जा रही है, और यहाँ से मिली सफलता का असर आसपास की अन्य विधानसभा सीटों जैसे गोपीबल्लवपुर और नयाग्राम पर भी पड़ता दिख रहा है। जैसे-जैसे दोपहर ढल रही है, भाजपा की बढ़त का ग्राफ और ऊंचा होता जा रहा है, जो टीएमसी के लिए आत्ममंथन का विषय है।

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