Madhyapradesh: केंद्रीय मंत्री जल शक्ति ने बैतूल जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन को जल संचय जन भागीदारी अवार्ड से किया सम्मानित।
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण जब देश में जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बैतूल जिले ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
- केंद्र सरकार से मिली 25 लाख की पुरस्कार राशि 13499 जल संरक्षण कार्यों के साथ वेस्टर्न जोन में बैतूल तीसरे स्थान आने पर मिला राष्ट्रीय सम्मान ,ये हमारी मेहनत नही बल्कि जिले की मेहनत का फल है वास्तव में ये पुरस्कार बैतूल जिले का है प्रभारी कलेक्टर अक्षत जैन ने कहा
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण जब देश में जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बैतूल जिले ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। न्यू दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 6वां नेशनल वाटर अवार्ड समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री जल शक्ति मंत्रालय सी.आर. पाटिल ने बैतूल जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन को "जल संचय जन भागीदारी" अवार्ड से किया सम्मानित है। उन्हें यह सम्मान केंद्र सरकार के जल संसाधन और नदी विकास विभाग द्वारा जल शक्ति अभियान के अंतर्गत प्रारंभ किए गए नवाचार "जल संचय जन भागीदारी" अभियान में बैतूल जिले ने वेस्टर्न जोन में तृतीय स्थान प्राप्त करने पर मिला है। इसके साथ ही बैतूल जिले को 25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस दौरान परियोजना अधिकारी मनरेगा संजय यादव भी उपस्थित रहें।
जनसहभागिता से जल संरक्षण के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने में बैतूल जिले ने देश में परचम लहराया है। केंद्र सरकार के जल संसाधन और नदी विकास विभाग द्वारा जल शक्ति अभियान अंतर्गत प्रारंभ किए गए नवाचार ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में बैतूल जिले ने वेस्टर्न जोन में तृतीय स्थान हासिल किया है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अक्षत जैन ने बताया कि 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक जिले में 13499 जल संरक्षण कार्यों का सत्यापन किया गया है, जिसका अर्थ है कि यह सभी कार्य स्थल पर पूर्ण हो चुके हैं। इन कार्यों में खेत तालाब, स्टॉप डैम, कंटूर ट्रेंच, सोखपीट, चेक डैम, कपिलधारा, तालाब सौंदर्यीकरण आदि प्रमुख जल संरक्षण गतिविधियां शामिल रहीं।
जिले में जल संरक्षण के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई गई। इसमें उद्योगों, स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। कम लागत और अधिक प्रभावी कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण एवं पुराने जलस्रोतों का पुनर्जीवन किया गया। ग्रामीण अंचलों में हजारों कृत्रिम रिचार्ज स्ट्रक्चर और प्रत्येक गाँव में जल संरचनाएं स्थापित कर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया गया। स्थानीय संगठनों और जनसहभागिता से परियोजनाओं को स्थायित्व मिला। साथ ही नागरिकों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए गए। परिणामस्वरूप बैतूल जिले ने जल संरक्षण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर देशभर में अपनी पहचान बनाई है।
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