Mussoorie : मज़दूरों की आवाज़ बुलंद, उत्तराखंड में भारतीय मज़दूर संघ की बैठक में बड़े फैसले, सरकार को ज्ञापन भेजने की तैयारी

उन्होने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार श्रम कानूनों पर भी उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा हाल के वर्षों में बनाए गए चार नए श्रम संहिताएं (स्ंइवनत ब्वकमे) कोड ऑन वेजेस,कोड ऑ

Sep 7, 2025 - 23:05
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Mussoorie : मज़दूरों की आवाज़ बुलंद, उत्तराखंड में भारतीय मज़दूर संघ की बैठक में बड़े फैसले, सरकार को ज्ञापन भेजने की तैयारी
मज़दूरों की आवाज़ बुलंद, उत्तराखंड में भारतीय मज़दूर संघ की बैठक में बड़े फैसले, सरकार को ज्ञापन भेजने की तैयारी

रिपोर्ट : सुनील सोनकर

मसूरी में भारतीय मजदूर संध की प्रदेष कार्यकारणी की बैठक संपन्न हो गई। बैठक में उत्तराखंड में मज़दूरों की आवाज़ को लेकर भारतीय मज़दूर संघ द्वारा आयोजित त्रैमासिक कार्यसमिति बैठक में प्रदेशभर के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ठेली-पटरी व्यापारी, होटल वर्कर, रिक्शा चालक, भवन निर्माण श्रमिक, संविदा कर्मचारी और गिग वर्कर्स की समस्याओं पर मसूरी में आयोजित दो दिवसीय बैठक में गंभीर चर्चा हुई।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 25 नवम्बर 2025 को प्रदेश के हर जिले में जिलाधिकारी या उपजिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस मौके पर संध द्वारा मसूरी भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल का षॉल और पुश्पगुच्छ भेटकर स्वागत किया। रजत अग्रवाल ने कहा कि भाजपा हमेष से मजदूरों के रक्षा और उनके सम्मान के लिये कार्य करती है व बैठक के दौरान कई मागें संध के द्वारा उठाई गई है और उनको पूरा विष्वास है कि सरकार के स्तर से इन सभी मागों पर विचार किया जायेगा जिससे मजदूरों को उनका अधिकार मिल सके। बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और नेपाल से आए हुए भारतीय मज़दूर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।भारतीय मज़दूर संघ के प्रदेष अध्यक्ष उमेष जोषी, प्रदेष महामंत्री सुमित सिंघल और क्षेत्रिय संगठन मंत्री अनुपम ने कहा कि संध द्वारा सरकार से मजदूरों को लेकर विभिन्न मागें जैसे संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, ईएसआई और पीएफ की सुविधा दी जाए। ठेली-पटरी व्यापारी, जो रोज़गार का अहम हिस्सा हैं, उनकी समस्याओं को दूर कर स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।होटल वर्कर्स को श्रम कानूनों के तहत न्यूनतम वेतन और सुरक्षा मिले। गिग वर्कर्स (जैसे ज़ोमैटो, स्विग्गी, उबर आदि पर काम करने वाले) को भी सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिले।

उन्होने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार श्रम कानूनों पर भी उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा हाल के वर्षों में बनाए गए चार नए श्रम संहिताएं (स्ंइवनत ब्वकमे) कोड ऑन वेजेस,कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशंस और कोड ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंसका असली लाभ अभी तक ज़मीनी स्तर पर श्रमिकों को नहीं मिल पाया है। संघ का कहना है कि इन कानूनों में सुधार की ज़रूरत है ताकि अनौपचारिक क्षेत्र के करोड़ों मज़दूरों को भी सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और न्यूनतम मजदूरी जैसे अधिकार मिल सकें। उन्होने स्पष्ट कहा कि यह केवल ज्ञापन देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक संगठित आंदोलन की शुरुआत है। मज़दूरों का हक़ अब दबाया नहीं जा सकता। प्रदेश अध्यक्ष उमेश जोशी ने कहा कि हम केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से माँग करते हैं कि वे न केवल श्रम कानूनों को लागू करें, बल्कि उसे मज़दूरों के पक्ष में व्यावहारिक बनाएं। हम हर स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार हैं।

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