इलेक्ट्रिक टू-वीलर खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत: 31 मार्च के बाद भी जारी रह सकती है सरकारी सब्सिडी।

भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और उनके उपयोग को गति देने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं

Mar 28, 2026 - 13:26
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इलेक्ट्रिक टू-वीलर खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत: 31 मार्च के बाद भी जारी रह सकती है सरकारी सब्सिडी।
इलेक्ट्रिक टू-वीलर खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत: 31 मार्च के बाद भी जारी रह सकती है सरकारी सब्सिडी।
  • सरकार बढ़ा सकती है ईएमपीएस योजना की मियाद: 3 महीने और मिल सकता है सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का मौका
  • ईवी बाजार में बनी रहेगी रफ्तार: सब्सिडी खत्म होने की डेडलाइन बढ़ने से ग्राहकों और कंपनियों को मिलेगा बड़ा फायदा

भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण और उनके उपयोग को गति देने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का सहारा लिया है। 'फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स' (FAME-II) योजना के समाप्त होने के बाद, सरकार ने ट्रांजिशन फेज के रूप में 'इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम' (EMPS) को पेश किया था। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की खरीद पर वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि उनकी कीमत पेट्रोल वाहनों के करीब लाई जा सके। अब जबकि 31 मार्च की डेडलाइन नजदीक है, मंत्रालय के भीतर चल रही चर्चाओं से यह संकेत मिल रहे हैं कि इस योजना को जून 2026 के अंत तक जारी रखा जा सकता है।

सब्सिडी की समय सीमा बढ़ाने के पीछे सबसे बड़ा कारण आगामी वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। ऑटोमोबाइल उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि सब्सिडी अचानक बंद कर दी जाती है, तो इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की कीमतों में ₹10,000 से ₹15,000 तक की तत्काल वृद्धि हो सकती है। ऐसी स्थिति में मध्यम वर्गीय ग्राहकों का रुझान फिर से पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की ओर मुड़ सकता है, जो सरकार के 'नेट जीरो' कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के खिलाफ होगा। इसीलिए, मंत्रालय एक ऐसे तंत्र पर काम कर रहा है जिससे नई पूर्णकालिक योजना (जैसे FAME-III) के लागू होने तक ग्राहकों को वित्तीय बोझ से बचाया जा सके।

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए यह विस्तार एक जीवनदान की तरह साबित होगा। कई प्रमुख कंपनियां अपने उत्पादन और इन्वेंट्री का प्रबंधन इसी सब्सिडी के आधार पर करती हैं। यदि समय सीमा बढ़ाई जाती है, तो कंपनियों को अपनी बिक्री रणनीति और उत्पादन क्षमता को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा। वर्तमान योजना के तहत, सरकार प्रति किलोवाट घंटा (kWh) के आधार पर प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है, जिसकी एक अधिकतम सीमा तय है। इस विस्तार के दौरान सब्सिडी की राशि में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है, बल्कि मुख्य ध्यान केवल वर्तमान लाभों को निरंतर बनाए रखने पर केंद्रित रहेगा ताकि बाजार में कोई 'पैनिक बाइंग' या भारी गिरावट न आए।

क्या है ईएमपीएस (EMPS) योजना?

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम 2024 को फेम-II के बाद पेश किया गया था। इसका कुल बजट लगभग ₹500 करोड़ आवंटित किया गया था, जिसका उद्देश्य लगभग 3.3 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 41,000 से अधिक तिपहिया वाहनों को सहायता प्रदान करना है। इस योजना में केवल उन वाहनों को शामिल किया जाता है जिनमें उन्नत लिथियम-आयन बैटरी तकनीक का उपयोग किया जाता है।

विस्तार की इस योजना के साथ ही सरकार ईवी इकोसिस्टम के अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दे रही है। मंत्रालय का मानना है कि केवल वाहन सस्ते करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि चार्जिंग बुनियादी ढांचे को भी उतना ही मजबूत बनाना होगा। सब्सिडी के तीन महीने के विस्तार के दौरान, सरकार चार्जिंग स्टेशनों के जाल को और सघन बनाने के लिए कुछ नए प्रावधान ला सकती है। साथ ही, घरेलू स्तर पर बैटरी सेल के निर्माण (PLI स्कीम) को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी तेज किया जा रहा है। सरकार का दीर्घकालिक विजन यह है कि सब्सिडी पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जाए और ईवी की कीमतें बैटरी की लागत घटने के कारण स्वाभाविक रूप से कम हों।

ग्राहकों के दृष्टिकोण से देखें तो, 31 मार्च की समय सीमा को लेकर जो चिंता थी, वह अब काफी हद तक कम हो सकती है। जो लोग बजट की कमी के कारण मार्च के अंत तक खरीदारी करने में असमर्थ थे, उन्हें अब अप्रैल, मई और जून के महीनों में भी सरकारी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि ग्राहकों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए और यदि संभव हो तो जल्द से जल्द बुकिंग करानी चाहिए, क्योंकि सब्सिडी का लाभ पहले आओ-पहले पाओ या निर्धारित बजट समाप्त होने तक ही मिलता है। यह विस्तार विशेष रूप से उन युवाओं और कार्यालय जाने वाले लोगों के लिए मददगार होगा जो पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं।

राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस योजना का विस्तार प्रशासनिक निरंतरता को दर्शाती है। वित्त मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय के बीच बजट आवंटन को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है। यह संभावना जताई जा रही है कि इस तीन महीने के अंतरिम विस्तार के लिए अतिरिक्त फंड की व्यवस्था वर्तमान बजट के बचे हुए हिस्से या नए आवंटन से की जाएगी। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हट रहा है। आने वाले कुछ दिनों में कैबिनेट नोट के जरिए इसकी आधिकारिक पुष्टि होने की पूरी संभावना है।

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