महिला के वोटर आईडी पर छपी सीएम नीतीश की तस्वीर, बीएलओ ने कहा- किसी को बताना नहीं। 

Bihar News: बिहार के मधेपुरा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मधेपुरा शहर के...

Jul 10, 2025 - 15:39
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महिला के वोटर आईडी पर छपी सीएम नीतीश की तस्वीर, बीएलओ ने कहा- किसी को बताना नहीं। 
महिला के वोटर आईडी पर छपी सीएम नीतीश की तस्वीर, बीएलओ ने कहा- किसी को बताना नहीं। 

Bihar News: बिहार के मधेपुरा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मधेपुरा शहर के जयपालपट्टी मोहल्ले में रहने वाली एक महिला के वोटर आईडी कार्ड पर उनकी तस्वीर की जगह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर छप गई है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान किया, बल्कि सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में भी खूब चर्चा बटोरी। महिला के पति चंदन कुमार ने इस गलती को सिस्टम की बड़ी चूक बताया और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यह मामला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच सामने आया है, जब चुनाव आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में व्यस्त है।

चंदन कुमार ने बताया कि करीब ढाई महीने पहले उनकी पत्नी अभिलाषा कुमारी के नाम से वोटर आईडी कार्ड डाक के जरिए उनके घर पहुंचा था। लिफाफे पर नाम, पता और अन्य जानकारी पूरी तरह सही थी। लेकिन जब उन्होंने कार्ड खोला तो उसमें अभिलाषा की तस्वीर की जगह नीतीश कुमार की तस्वीर देखकर वे दंग रह गए। चंदन ने इस गलती को गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि अगर किसी आम व्यक्ति की तस्वीर गलती से छप जाती, तो इसे तकनीकी गलती माना जा सकता था, लेकिन एक राज्य के मुख्यमंत्री की तस्वीर का इस तरह छपना सिस्टम में गहरी खामी को दर्शाता है।

चंदन ने यह भी बताया कि उन्होंने इस गड़बड़ी की शिकायत स्थानीय बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से की, लेकिन उन्हें सलाह दी गई कि वे इस मामले को किसी को न弄नहीं बताएं। इस रवैये से नाराज चंदन ने बिहार बंद के दौरान मीडिया के सामने यह वोटर आईडी कार्ड दिखाकर अपनी बात रखी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अब मैं समझ नहीं पा रहा कि पत्नी किसे मानूं, अभिलाषा को या नीतीश कुमार को।" उनकी यह बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं।

इस मामले पर मधेपुरा के उप निर्वाचन पदाधिकारी जितेंद्र कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि वोटर आईडी कार्ड का निर्माण कर्नाटक में होता है। उन्होंने इस गलती को तकनीकी चूक बताया और कहा कि इसे ठीक करने के लिए पीड़िता को फॉर्म-8 भरकर एसडीओ कार्यालय में या ऑनलाइन जमा करना होगा। कुछ ही दिनों में नया कार्ड उनके घर पहुंच जाएगा। हालांकि, इस जवाब को कई लोगों ने अपर्याप्त माना, क्योंकि यह सवाल उठता है कि इतनी बड़ी गलती आखिर हुई कैसे।

यह घटना केवल एक गलती नहीं, बल्कि वोटर आईडी बनाने की प्रक्रिया में गंभीर खामियों को उजागर करती है। चंदन कुमार ने कहा कि यह कोई छोटी-मोटी गलती नहीं है। एक आम महिला के वोटर कार्ड पर मुख्यमंत्री की तस्वीर छपना न केवल लापरवाही है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।

यह मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब इसे बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के संदर्भ में देखा जाए। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू किया है, जिसके तहत हर मतदाता की पात्रता का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को लेकर पहले ही विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं, जैसे तेजस्वी यादव और राहुल गांधी, ने इसे "लोकतंत्र पर हमला" और "वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश" बताया है। ऐसे में इस तरह की गलती ने उनके आरोपों को और बल दिया है।

यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई। कई यूजर्स ने इसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का मौका बनाया। एक यूजर ने लिखा, "चुनाव आयोग क्या कर रहा है? महिला के वोटर आईडी पर नीतीश कुमार की तस्वीर छप गई। क्या अब भी कहेंगे कि आयोग निष्पक्ष है?" एक अन्य यूजर ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में लेते हुए लिखा, "लापरवाही की हद है, लेकिन मजा तो तब आएगा जब नीतीश जी को वोट डालने के लिए बूथ पर रोका जाए!" इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही सियासी घमासान मचा हुआ है। चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को इस प्रक्रिया की शुरुआत की थी, जिसका मकसद अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाना और केवल योग्य नागरिकों को शामिल करना है। आयोग ने 26 जुलाई 2025 तक दस्तावेज जमा करने की समय सीमा दी है, लेकिन जो लोग इस तारीख तक दस्तावेज नहीं दे पाएंगे, उन्हें दावे और आपत्तियों की अवधि में मौका मिलेगा।

विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि 2003 में पूरे देश में एक साथ पुनरीक्षण हुआ था, लेकिन इस बार सिर्फ बिहार में ही क्यों? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे दलितों और वंचितों के वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश बताया। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू हो चुकी है, जहां कोर्ट ने आयोग से सवाल किया कि चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया क्यों शुरू की गई।

यह घटना केवल एक गलत तस्वीर छपने की बात नहीं है। यह चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और मतदाता सूची का पुनरीक्षण पहले से ही विवादों में है। ऐसे में इस तरह की गलती ने लोगों का भरोसा और कम किया है। चंदन कुमार ने सही कहा कि अगर किसी आम व्यक्ति की तस्वीर गलती से छपती, तो इसे तकनीकी गलती मान लिया जाता, लेकिन मुख्यमंत्री की तस्वीर का छपना साधारण बात नहीं है।

उप निर्वाचन पदाधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि इस गलती को ठीक करना आसान है। पीड़िता को फॉर्म-8 भरकर ऑनलाइन या एसडीओ कार्यालय में जमा करना होगा। लेकिन सवाल यह है कि ऐसी गलती हुई ही क्यों? क्या यह केवल तकनीकी चूक थी, या सिस्टम में कोई बड़ी खामी है? चंदन ने मांग की है कि इस मामले की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।

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